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मधुबाला की वो फिल्म, जिसे बनने में लग गए थे 16 साल, डायरेक्टर ने पानी की तरह बहा डाला था पैसा

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बॉलीवुड की वो फिल्म जिसे बनने में डेढ़ दशक से ज्यादा समय लगा था. आज ये फिल्म क्लासिक कल्ट के तौर पर देखी जाती है. इसे बनाने में डायरेक्टर ने अपना सबकुछ झोंक दिया था. एक्ट्रेस ने अपनी जान को दांव पर लगा कर फिल्म की शूटिंग पूरी की थी.

5 अगस्त 1960 को एक फिल्म आई थी जिसे आज बॉलीवुड में क्लासिक कल्ट का दर्जा हासिल है. इस फिल्म को बनने में एक दशक से ज्यादा समय लगा था और जब ये बनकर रिलीज हुई तो सिनेमाघरों में ऐसी लगी कि लोग बस देखते ही रह गए. ये क्लासिक फिल्म महीनों तक पर्दे पर टंगी रही थी.

5 अगस्त 1960 को एक फिल्म आई थी जिसे आज बॉलीवुड में क्लासिक कल्ट का दर्जा हासिल है. इस फिल्म को बनने में एक दशक से ज्यादा समय लगा था और जब ये बनकर रिलीज हुई तो सिनेमाघरों में ऐसी लगी कि लोग बस देखते ही रह गए. ये क्लासिक फिल्म महीनों तक पर्दे पर टंगी रही थी.

के. आसिफ द्वारा निर्देशित, 'मुगल-ए-आज़म' भारतीय सिनेमा में एक कालजयी क्लासिक मानी जाती है. 1960 की इस फिल्म में पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार और मधुबाला ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं और इसे पूरा करने में 16 साल लगे. इस फिल्म का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है.

के. आसिफ द्वारा निर्देशित, ‘मुगल-ए-आज़म’ भारतीय सिनेमा में एक कालजयी क्लासिक मानी जाती है. 1960 की इस फिल्म में पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार और मधुबाला ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं और इसे पूरा करने में 16 साल लगे. इस फिल्म का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है.

इस फिल्म का बजट 1.5 करोड़ रुपए था. 'मुगल-ए-आज़म' ने कई वर्षों की देरी, आसमान छूते बजट और एक ऐसे गाने का सामना किया, जिसकी लागत उस समय की पूरी फिल्म से भी अधिक थी. जब औसत हिंदी फिल्म 10 लाख रुपए से कम में बनती थी, तब 'मुगल-ए-आज़म' का बजट इतना था कि उससे विंटेज कारों का बेड़ा खरीदा जा सकता था.

इस फिल्म का बजट 1.5 करोड़ रुपए था. ‘मुगल-ए-आज़म’ ने कई वर्षों की देरी, आसमान छूते बजट और एक ऐसे गाने का सामना किया, जिसकी लागत उस समय की पूरी फिल्म से भी अधिक थी. जब औसत हिंदी फिल्म 10 लाख रुपए से कम में बनती थी, तब ‘मुगल-ए-आज़म’ का बजट इतना था कि उससे विंटेज कारों का बेड़ा खरीदा जा सकता था.

आइकॉनिक गाना "प्यार किया तो डरना क्या" अकेले ही 1 करोड़ रुपए की लागत से बना था, जो उस समय के लिए अविश्वसनीय था और आज भी एक क्लासिक है. बताया जाता है कि फिल्म का सेट बनाने में दो साल लगे, जिसकी लंबाई 150 फीट थी.

आइकॉनिक गाना “प्यार किया तो डरना क्या” अकेले ही 1 करोड़ रुपए की लागत से बना था, जो उस समय के लिए अविश्वसनीय था और आज भी एक क्लासिक है. बताया जाता है कि फिल्म का सेट बनाने में दो साल लगे, जिसकी लंबाई 150 फीट थी.

फिल्म के सेट में क्लासिक स्पेशल तौर पर विशेष रूप से मंगवाए गए बेल्जियम के कांच का उपयोग किया गया था. निर्माण में रुकावटें, द्वितीय विश्व युद्ध, कास्ट में बदलाव (दिलीप कुमार ने सलीम की भूमिका निभाई) और के. आसिफ की महत्वाकांक्षा ने इस फिल्म को एक मिथक बना दिया.

फिल्म के सेट में क्लासिक स्पेशल तौर पर विशेष रूप से मंगवाए गए बेल्जियम के कांच का उपयोग किया गया था. निर्माण में रुकावटें, द्वितीय विश्व युद्ध, कास्ट में बदलाव (दिलीप कुमार ने सलीम की भूमिका निभाई) और के. आसिफ की महत्वाकांक्षा ने इस फिल्म को एक मिथक बना दिया.

के. आसिफ द्वारा निर्देशित इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मधुबाला दिल की बीमारी से जूझ रही थीं. मधुबाला के दिल में छेद था जिसकी वजह से उनकी तबीयत काफी खराब थी, लेकिन उन्होंने बीमारी में भी फिल्म की शूटिंग की थी. मधुबाला ने दिल की बीमारी से जूझते हुए कई दृश्य फिल्माए, जो उनके प्रदर्शन में एक विशेष भावुकता जोड़ता है.

के. आसिफ द्वारा निर्देशित इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मधुबाला दिल की बीमारी से जूझ रही थीं. मधुबाला के दिल में छेद था जिसकी वजह से उनकी तबीयत काफी खराब थी, लेकिन उन्होंने बीमारी में भी फिल्म की शूटिंग की थी. मधुबाला ने दिल की बीमारी से जूझते हुए कई दृश्य फिल्माए, जो उनके प्रदर्शन में एक विशेष भावुकता जोड़ता है.

1960 में रिलीज होने पर, 'मुगल-ए-आज़म' ने 11 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की, जो आज के समय में 3,600 करोड़ रुपए से अधिक है. ब्लैक एंड व्हाइट में रिलीज हुई इस फिल्म का सिर्फ एक गाना कलर में था जिसे 2004 में डिजिटल रूप से रंगीन किया गया और फिर से रिलीज किया गया.

1960 में रिलीज होने पर, ‘मुगल-ए-आज़म’ ने 11 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की, जो आज के समय में 3,600 करोड़ रुपए से अधिक है. ब्लैक एंड व्हाइट में रिलीज हुई इस फिल्म का सिर्फ एक गाना कलर में था जिसे 2004 में डिजिटल रूप से रंगीन किया गया और फिर से रिलीज किया गया.

री-रिलीज के दौरान फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फिर से हिट रही. दशकों बाद भी, 'मुगल-ए-आज़म' को सिर्फ याद नहीं किया जाता, बल्कि भारतीय सिनेमा में एक महान उपलब्धि के रूप में देखा जाता है.

री-रिलीज के दौरान फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फिर से हिट रही. दशकों बाद भी, ‘मुगल-ए-आज़म’ को सिर्फ याद नहीं किया जाता, बल्कि भारतीय सिनेमा में एक महान उपलब्धि के रूप में देखा जाता है.

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