खेल » बदहाली में गुजरा बचपन, सड़कों पर बिताई रात, जिंदगी में बनाई सिर्फ 1 ही फिल्म, नेशनल अवॉर्ड मिलते तोड़ दिया दम

बदहाली में गुजरा बचपन, सड़कों पर बिताई रात, जिंदगी में बनाई सिर्फ 1 ही फिल्म, नेशनल अवॉर्ड मिलते तोड़ दिया दम

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अनुराग कश्यप कहते हैं कि वो चाइना और कोरिया के फिल्ममेकर्स से प्रेरणा लेते हैं. उन्होंने हिंदी सिनेमा के एक दिग्गज का भी नाम लिया जिनसे उन्हें प्रेरणा मिलती है. वो डायरेक्टर अवतार कौल जिन्होंने अपने करियर में सिर्फ एक ही फिल्म 27 Down बनाई जिसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला था.

बदहाली में गुजरा बचपन, सड़कों पर बिताई रात, जिंदगी में बनाई सिर्फ 1 ही फिल्म,27 डाउन, अवतार कौल इकलौती फिल्म थी.
नई दिल्ली.  अनुराग कश्यप बॉलीवुड के वो डायरेक्टर हैं जिन्हें लीक से हटकर फिल्मों के लिए जाना जाता है. अनुराग कश्यप ने गैंग्स ऑफ वासेपुर से हिंदी सिनेमा में अलग तरह की फिल्मों की नींव रखी. हालिया इंटरव्यू में डायरेक्टर ने बात करते हुए बताया कि ऐसी फिल्में बनाने कि प्रेरणा उन्हें कहां से आती है. वो कहते हैं कि वो चाइना और कोरिया के फिल्ममेकर्स से काफी प्रेरणा लेते हैं जो इतने प्रतिबंध के बावजूद अच्छी फिल्में बनाने का जज्बा नहीं छोड़ते हैं. दिग्गज डायरेक्टर का मानना है कि बॉलीवुड में भी ऐसे कई फिल्ममेकर्स रहे हैं, लेकिन उनके बारे में कोई ज्यादा बात नहीं करता है और ऐसे ही एक फिल्ममेकर अवतार कौल हैं.

अवतार कौल, हिंदी सिनेमा का वो नाम जिन्हें ज्यादातर लोग शायद जानते तक न हो. उन्होंने अपने 35 साल के करियर में सिर्फ एक ही फिल्म बनाई थी. लेकिन वो फिल्म भी ऐसी कि उसे कोई भूल ही न पाए. इस फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला था. इसका नाम 27 डाउन था. फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिलने के ऐलान के चंद घंटों बाद ही फिल्ममेकर अवतार कौल ने दम तोड़ दिया था.

पिता ने बचपन में ढाया जुल्म

35 साल की उम्र में वो इस दुनिया को हमेशा के लिए छोड़कर चले गए, लेकिन जाते-जाते वो सिनेमा के लिए एक ऐसा मार्ग खोल गए जो समाज का आइना बनी. 1939 में श्रीनगर में जन्में अवतार कौल का बचपन मुश्किलों भरा था. उनका बचपन हर उस ख्वाब के बिलकुल विपरीत था, जो हर बच्चा अपने बचपन में देखता है. उनके पिता खठोरता की मिसाल थे, वो बचपन में आए दिन उन्हें बाहर निकाल देते थे.

प्लेटफॉर्म पर गुजारी रात

द वायर के लिए लिखे एक लेख में विनोद कौल ने अपने चाचा के शुरुआती जीवन को याद करते हुए लिखा था, ‘दिल्ली में सबसे बड़े भाई के रूप में अवतार ने अपने पिता की क्रूरता का सामना किया. एक दिन गुस्से में उनके पिता ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया और चेतावनी दी कि कभी वापस न आएं. कोई आश्रय न होने के कारण, अवतार को दिल्ली रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोने के लिए मजबूर होना पड़ा और गुजारा करने के लिए चाय की दुकान पर काम करना पड़ा उनके छोटे भाई उन दिनों को उसी डर और पीड़ा के साथ याद करते हैं जो उन्हें तब महसूस हुआ जब उन्होंने अवतार की कंकाल जैसी स्थिति और निराशाजनक हालत देखी.’

उन्होंने दर्द के साथ आगे कहा था कि उनके पिता के डर से उनके परिवार का कोई उनकी मदद के लिए आगे नहीं जा सका था. 1970 में, अवतार भारत लौटे और मर्चेंट/आइवरी प्रोडक्शंस की फिल्म बॉम्बे टॉकी पर काम किया. उन्होंने बस एक ही फिल्म 27 डाउन का निर्देशन किया था.

अवतार कौल के भतीजे ने उनकी जिंदगी के बारे में बताते हुए कहा कि डायरेक्टर हमेशा अपने परिवार को सबसे आगे रखते थे. पहली ही फिल्म के बाद दुनिया को छोड़ गए निर्देशक अवतार कौल के पास मरने से पहले तीन फिल्मों की स्क्रिप्ट थीं. मेके रैना ने उनकी मौत पर दुख जताते हुए कहा था कि अगर वो जिंदा होते तो शायद फिल्म इंडस्ट्री पर गहरा प्रभाव छोड़ जाते.

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