खेल » जब एक्टिंग करना था कलंक, तब फिल्मों में मारी एंट्री, ‘मां’ के रोल निभाकर हुई अमर, जीते जी बनीं मिसाल

जब एक्टिंग करना था कलंक, तब फिल्मों में मारी एंट्री, ‘मां’ के रोल निभाकर हुई अमर, जीते जी बनीं मिसाल

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एक्ट्रेस ने एक्टिंग तब शुरू की, जब फिल्मों में काम करना कलंक माना जाता था. उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में मां का किरदार निभाया था. दुर्गा खोटे की जिंदगी अपने-आप में एक मिसाल है.

एक्टिंग करना था कलंक, तब फिल्मों में मारी एंट्री,  'मां' के रोल निभाकर हुई अमरदुर्गा खोटे ने शॉर्ट फिल्में भी बनाई थीं.
नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के पर्दे पर जो ग्लैमर और चकाचौंध दिखती है, उसके पीछे कलाकारों का स्ट्रगल अक्सर कहीं अधिक गहरा और असरदार होता है. खासकर उन अभिनेत्रियों के लिए, जिनके लिए अभिनय हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है. दुर्गा खोटे ऐसी ही अभिनेत्री थीं, जिन्होंने दर्जनों फिल्मों में मां का किरदार निभाया था. उन्होंने अपने स्ट्रगल और जिंदादिली की एक अलग ही मिसाल कायम की.

दुर्गा खोटे ने न केवल अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने जीवन को एक नई दिशा दी. दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को महाराष्ट्र के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. एक ऐसे दौर में, जब फिल्मों में काम करना महिलाओं के लिए सामाजिक कलंक माना जाता था, उन्होंने इस सोच को चुनौती दी. उनकी शादी महज 18 साल की उम्र में विश्वनाथ खोटे से हुई, जो एक सफल मैकेनिकल इंजीनियर थे. कुछ ही सालों में वह दो बच्चों की मां बनीं, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था. जब दुर्गा सिर्फ 20 साल की थीं, तब उनके पति का निधन हो गया. आर्थिक रूप से टूट चुकीं दुर्गा खोटे को अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए काम की तलाश थी.

घर चलाने के लिए ट्यूशन भी पढ़ाया
दुर्गा खोटे ने पढ़ी-लिखी थीं, इसलिए ट्यूशन देना शुरू कर दिया, लेकिन जब फिल्मों से ऑफर मिला, तो उन्होंने स्वीकार किया. उनकी पहली फिल्म ‘फरेबी जाल’ (1931) थी, जो असफल रही. लेकिन निर्देशक वी. आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, शांताराम ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और फिल्म ‘अयोध्येचा राजा’ (1932) में तारामती की भूमिका के लिए मौका दिया. इससे वह रातों-रात स्टार बन गईं. इसके बाद उन्होंने ‘माया मच्छिंद्र’, ‘भरत मिलाप’, ‘मुगल-ए-आजम’, ‘बॉबी’, ‘कर्ज’ जैसी फिल्मों में काम किया और खुद को अभिनय की हर शैली में सिद्ध किया.

कई शॉर्ट फिल्में भी बनाईं
दुर्गा खोटे ने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और भारतीय सिनेमा को ‘मां’ के किरदारों में एक गरिमा दी. उन्होंने ‘फैक्ट फिल्म्स’ नाम से प्रोडक्शन हाउस भी शुरू किया और कई शॉर्ट फिल्में बनाईं. उनके योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया. 22 सितंबर 1991 में 86 साल की उम्र में दुर्गा खोटे का निधन हो गया. लेकिन उन्होंने जो राह बनाई, वह आने वाली कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई.

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Abhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल… और पढ़ें

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