विदेश » South Africa G20 Summit 2025 Joint Declaration : PM Modi And Other Leaders Slam Rich Nations Europe US | अमेरिका और यूरोप की दादागिरी खत्म! PM मोदी की अगुवाई में अफ्रीका जी-20 ने बदल दिए दुनिया के नियम

South Africa G20 Summit 2025 Joint Declaration : PM Modi And Other Leaders Slam Rich Nations Europe US | अमेरिका और यूरोप की दादागिरी खत्म! PM मोदी की अगुवाई में अफ्रीका जी-20 ने बदल दिए दुनिया के नियम

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नई दिल्ली: इतिहास गवाह है कि सदियों से दुनिया के नियम चंद अमीर देश तय करते आए हैं. लेकिन 22 और 23 नवंबर 2025 को जोहान्सबर्ग में जो हुआ, उसने पुरानी विश्व व्यवस्था की नींव हिला दी है. अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों की दादागिरी और अब नहीं चलेगी. पहली बार अफ्रीका की धरती पर जी-20 का शिखर सम्मेलन हुआ. यह महज एक बैठक नहीं थी. यह ग्लोबल साउथ का शक्ति प्रदर्शन था. भारत की जी-20 प्रेसिडेंसी (नई दिल्ली) ने जिस बदलाव की चिंगारी सुलगाई थी, वह अब दक्षिण अफ्रीका में ज्वाला बन चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीकन यूनियन को जी-20 का सदस्य बनाकर जो दांव चला था, आज उसी अफ्रीकन यूनियन ने टेबल पर बैठकर अमीर देशों की बोलती बंद कर दी है. अब दुनिया ‘सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट’ के पश्चिमी सिद्धांत पर नहीं चलेगी. अब नियम बदल गए हैं. जोहान्सबर्ग में ‘उबंटू’ का दर्शन अपनाया गया है. इसका मतलब है- ‘मैं हूं, क्योंकि हम हैं’. यानी अब अमेरिका या यूरोप अपनी मनमानी करके और दूसरों को कुचलकर आगे नहीं बढ़ सकते. इस समिट में साफ कर दिया गया है कि अगर एक भी देश पीछे छूटा, तो पूरी दुनिया हार जाएगी. यह आर्टिकल आपको बताएगा कि कैसे विकासशील देशों ने एकजुट होकर पश्चिम की आर्थिक और कूटनीतिक दादागिरी को चुनौती दी है.
  • महाशक्तियों को सीधी चेतावनी: सुधरो या मिट जाओ

दुनिया इस वक्त खतरनाक दौर से गुजर रही है. युद्ध, भुखमरी और असमानता ने कोहराम मचा रखा है. ऐसे में जी-20 के मंच से नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि अब बहुत हो चुका. संयुक्त राष्ट्र के चार्टर की धज्जियां उड़ाना बंद करो. किसी भी देश की जमीन हड़पने के लिए ताकत का इस्तेमाल अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह सीधा इशारा उन महाशक्तियों की तरफ है जो अपनी विस्तारवादी नीतियों से बाज नहीं आ रहे.

नेताओं ने एक सुर में कहा कि परमाणु हथियारों की धमकी देना बंद करो. नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए. सूडान, गाजा और यूक्रेन में चल रहे कत्लेआम पर जी-20 ने गहरी चिंता जताई है. संदेश साफ है- शांति के बिना कोई भी देश, चाहे वह कितना भी अमीर क्यों न हो, सुरक्षित नहीं रह सकता. यह पश्चिम के उन नेताओं के लिए एक बड़ा झटका है जो हथियार बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था चलाते हैं.

  • आर्थिक आजादी का ऐलान: कर्ज के जाल को काट फेंका

दशकों से आईएमएफ (IMF) और वर्ल्ड बैंक जैसे संस्थानों के जरिए गरीब देशों को कर्ज के जाल में फंसाया जाता रहा है. लेकिन इस बार विकासशील देशों ने हिसाब मांग लिया है. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले 10 सालों में गरीब देशों (LICs) का ब्याज भुगतान दोगुना हो गया है. यह एक तरह की आर्थिक गुलामी है. जी-20 ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है. नेताओं ने कहा कि कर्ज का बोझ विकास को रोक रहा है और इसे खत्म करना होगा.

‘कॉमन फ्रेमवर्क’ को अब सख्ती से लागू किया जाएगा. चाड, जाम्बिया, घाना और इथियोपिया जैसे देशों को राहत दी गई है. लेकिन बात यहीं नहीं रुकी. नेताओं ने साफ कहा कि कर्ज देने वाले प्राइवेट क्रेडिटर्स को भी अब पारदर्शिता रखनी होगी. अब तक ये प्राइवेट कंपनियां अंधेरे में तीर चलाती थीं और गरीब देशों को लूटती थीं. अब उन्हें भी हिसाब देना होगा. आईएमएफ में सब-सहारा अफ्रीका के लिए 25वीं कुर्सी (Chair) बनाकर ग्लोबल साउथ ने अपनी ताकत दिखा दी है. अब फैसलों में अफ्रीका का भी वीटो होगा.

  • खनिजों की लूट पर पूर्ण विराम: अब हमारा माल, हमारा राज

सदियों से अफ्रीका और एशिया के खनिजों (Minerals) को लूटकर पश्चिम ने अपनी तिजोरियां भरी हैं. लेकिन अब यह खेल खत्म हो गया है. दुनिया को आज लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ मिनरल्स की सख्त जरूरत है. इनके बिना न इलेक्ट्रिक कार चल सकती है, न स्मार्टफोन बन सकता है. जी-20 ने ‘क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क’ लॉन्च करके एक लकीर खींच दी है.

साउथ अफ्रीका G20 समिट में पीएम मोदी (Photo : Reuters)

अब विकासशील देश सिर्फ कच्चा माल निर्यात नहीं करेंगे. अब ‘लोकल बेनिफिशिएशन’ होगा. यानी खनिजों की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन उसी देश में होगा जहां से वे निकलेंगे. इससे नौकरियां वहीं पैदा होंगी, अमेरिका या चीन में नहीं. जी-20 ने साफ कर दिया है कि खनिज संपदा वाले देशों को अपनी शर्तों पर व्यापार करने का संप्रभु अधिकार है. यह उन मल्टीनेशनल कंपनियों के मुंह पर तमाचा है जो अफ्रीका की मिट्टी को कौड़ियों के भाव खरीदकर अरबों कमाती थीं. अब उन्हें वहीं फैक्ट्रियां लगानी होंगी, वरना माल नहीं मिलेगा.

  • ऊर्जा का पाखंड बेनकाब: 60 करोड़ लोगों को अंधेरे में रखकर कैसी तरक्की?

पश्चिम के देश अक्सर पर्यावरण के नाम पर गरीब देशों को भाषण देते हैं. लेकिन जोहान्सबर्ग में उनकी पोल खुल गई. जी-20 डॉक्यूमेंट ने दुनिया को बताया कि आज भी 60 करोड़ अफ्रीकियों के पास बिजली नहीं है. यह आंकड़ा शर्मनाक है. दुनिया की औसत बिजली पहुंच के मुकाबले अफ्रीका सबसे नीचे है. इससे भी भयानक बात यह है कि साफ ईंधन न होने की वजह से हर साल 20 लाख अफ्रीकी अपनी जान गंवा रहे हैं.

जी-20 ने ‘मिशन 300’ का समर्थन किया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक अफ्रीका के 30 करोड़ लोगों को बिजली पहुंचाना है. नेताओं ने स्पष्ट कहा कि ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय संप्रभुता का मामला है. अब विकासशील देश अपनी शर्तों पर ऊर्जा का चुनाव करेंगे. रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता तीन गुना की जाएगी, लेकिन इसके लिए अमीर देशों को पैसा देना होगा. सिर्फ वादों से काम नहीं चलेगा. विकासशील देशों को सस्ती दरों पर फाइनेंस चाहिए और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी चाहिए.
  • क्लाइमेट चेंज: अमीर देशों को चुकानी होगी कीमत

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के मुद्दे पर अब तक अमीर देश बचने की कोशिश करते रहे हैं. लेकिन इस समिट में उन्हें घेर लिया गया. जी-20 ने पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को दोबारा याद दिलाया है. स्पष्ट कहा गया है कि अगर तापमान 2 डिग्री तक बढ़ा तो तबाही मच जाएगी. लेकिन असली मुद्दा पैसा है. विकासशील देशों को अपने क्लाइमेट लक्ष्यों (NDCs) को पूरा करने के लिए 2030 तक 5.8 से 5.9 ट्रिलियन डॉलर की जरूरत है.

यह एक बहुत बड़ी रकम है. जी-20 ने अमीर देशों से कहा है कि क्लाइमेट फाइनेंस को ‘अरबों से खरबों’ (Billions to Trillions) में बदलना होगा. अब सिर्फ सरकारी मदद काफी नहीं है. प्राइवेट सेक्टर को भी पैसा लगाना होगा. साथ ही, यह भी चेतावनी दी गई है कि क्लाइमेट के नाम पर कोई भी देश ‘ग्रीन ट्रेड वॉर’ नहीं शुरू कर सकता. यानी पर्यावरण बचाने की आड़ में गरीब देशों के सामान पर टैक्स लगाना अब नहीं चलेगा. यह सीधे तौर पर यूरोपीय यूनियन की नीतियों को चुनौती है.

  • 88 अरब डॉलर की चोरी: अफ्रीका का पैसा वापस करो

एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. हर साल अफ्रीका से अवैध रूप से 88 अरब डॉलर (88 Billion USD) बाहर भेजे जाते हैं. यह वह पैसा है जो करप्शन, टैक्स चोरी और अवैध व्यापार के जरिए कमाया जाता है. सोचिए, अगर यह पैसा अफ्रीका में रहता तो कितनी सड़कें और स्कूल बन सकते थे. जी-20 ने इस लूट के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है.

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