मार्स की सतह के नीचे क्या छिपा है, यह सवाल वैज्ञानिकों को हमेशा से रोमांचित करता रहा है. कुछ साल पहले जब यह दावा सामने आया कि मार्स के दक्षिणी ध्रुव पर मोटी बर्फ की चादर के नीचे शायद नमकीन पानी की एक झील हो सकती है, तो अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के बीच हलचल मच गई थी.c लेकिन अब नासा के मार्स Reconnaissance Orbiter (MRO) की एक नई स्टडी ने उस दावे पर नई रोशनी डाली है.
नए रडार से मिली नई तस्वीर
एमआरओ में लगा SHARAD नाम का रडार वर्षों से मार्स की सतह और अंदरूनी हिस्से को स्कैन कर रहा है. पहले इस रडार के डेटा में वो गहराई नहीं मिल रही थी, जहां 2018 में “झील जैसा” सिग्नल मिला था. लेकिन इस बार वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका अपनाया- स्पेसक्राफ्ट को लगभग 120 डिग्री तक घुमा कर रडार को नई दिशा से काम करने दिया गया.
यह पूरा मानेवर आसान नहीं था. स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में इतने बड़े एंगल तक रोल कराना रिस्क भरा कदम था. Lockheed Martin Space और नासा के JPL के इंजीनियरों ने इसे बहुत सोच-समझकर प्लान किया.
नतीजा ये रहा कि SHARAD पहली बार बर्फ की लगभग 1.5 किलोमीटर मोटी परत के नीचे 20 किलोमीटर तक का हिस्सा स्कैन कर पाया. और जो सिग्नल मिला, वह उम्मीद से बिलकुल अलग था.
झील जैसी चमक थी पर पानी नहीं निकला
2018 में जो चमकीला रडार सिग्नल मिला था, वह पानी की पहचान जैसा था. पानी रडार की तरंगों को बहुत तेज और साफ तरीके से वापस लौटाता है, जैसे टॉर्च की रोशनी दर्पण से टकराकर पलटती है. इसी वजह से वैज्ञानिकों ने सोचा था कि मार्स की बर्फ के नीचे नमकीन झील हो सकती है.
लेकिन SHARAD के नए डेटा में सिग्नल काफी कमजोर मिला. यानी बर्फ के नीचे पानी नहीं, बल्कि चट्टान और धूल जैसी चीजें हो सकती हैं. पास के दूसरे स्थान पर यही बड़ा रोल प्रयोग किया गया, लेकिन वहां कोई सिग्नल मिला ही नहीं. इससे साफ हुआ कि यह चमकीला सिग्नल किसी खास वजह से आया था, पानी की वजह से जरूरी नहीं.
क्या यह कोई पुराना लावा फ्लो हो सकता है?
ढेरों जांच के बाद वैज्ञानिकों ने एक नई थ्योरी रखी है- शायद जिस जगह से सिग्नल मिला था, वहां बर्फ के नीचे कोई बहुत सपाट और चिकनी सतह है. मार्स पर इस तरह की सतह पुरानी ज्वालामुखी गतिविधि की ओर इशारा कर सकती है- यानी कभी वहां से लावा बहा होगा और उसने जमीन को समतल कर दिया होगा.
‘शरद’ के वैज्ञानिक Gareth Morgan और Than Putzig का मानना है कि यह रडार सिग्नल किसी ऐसे इलाके से आया है जो बाकी सतहों से अलग है. इसी वजह से उसे “झील जैसा” समझ लिया गया.
मार्स का दक्षिणी ध्रुव: बर्फ के नीचे टेढी-मेढी दुनिया
मार्स के दक्षिणी ध्रुव पर मोटे बर्फीले ढक्कन के नीचे बहुत उबड़-खाबड़ जमीन है. कहीं गहरी घाटियां, कहीं ऊंचे टीले, कहीं पुराने टकराओ से बने गड्ढे- सबकुछ बर्फ के नीचे छिपा हुआ है. रडार इमेजेज से पता चलता है कि इस इलाके की संरचना बहुत जटिल है.
अब वैज्ञानिक “बड़े रोल” वाली इस नई तकनीक को मार्स के दूसरे रहस्यमय इलाकों में भी इस्तेमाल करना चाहते हैं. इनमें से सबसे दिलचस्प जगह है मेडुसा फोसा— मार्स का एक विशाल और अनोखा इलाका जहां रडार सिग्नल बहुत ही कम लौटता है.
Medusae Fossae में क्या छिपा है? बर्फ या ज्वालामुखी की राख?
मेडुसा फोसा को लेकर कई सिद्धांत चल रहे हैं. कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि यह हजारों साल पुराने ज्वालामुखी की राख है. दूसरों का मानना है कि यहां बर्फ की मोटी परतें हो सकती हैं, जो रडार तरंगों को अंदर ही सोख लेती हैं.
अगर यहां सच में बर्फ मिली, तो यह मार्स की भविष्य की मानव यात्रा के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. क्योंकि यह क्षेत्र पृथ्वी की तरह मार्स के “इक्वेटर” के पास आता है- जहां ज्यादा धूप मिलती है, तापमान थोड़ा ज्यादा रहता है और इंसानों के रहने व काम करने के लिए बेहतर माहौल होता है.





