विदेश » पाकिस्तान को ICJ में घसीटा जाए, बोंडी बीच आतंकी हमले की निंदा से काम नहीं चलेगा, 15 बेगुनाहों की मौत पर गुस्सा

पाकिस्तान को ICJ में घसीटा जाए, बोंडी बीच आतंकी हमले की निंदा से काम नहीं चलेगा, 15 बेगुनाहों की मौत पर गुस्सा

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बर्लिन. जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज (जेएसएमएम) के चेयरमैन शफी बुरफत ने 14 दिसंबर 2025 को सिडनी के बोंडी बीच पर हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की है. उन्होंने वैश्विक बिरादरी से अपील की कि पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के तहत आरोप तय किए जाएं. बुरफत के अनुसार, चरमपंथी विचारधारा और आतंकवाद फैलाने के लिए उस पर कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने यह अपील ऑस्ट्रेलिया के बोंडी बीच पर यहूदी त्योहार के दौरान पाकिस्तानी मूल के बाप-बेटे की जोड़ी द्वारा किए गए आतंकवादी हमले के बाद की, जिसमें 15 बेगुनाहों की जान चली गई थी.

ऑस्ट्रेलियाई जांच अधिकारियों के अनुसार, 50 साल के साजिद अकरम और 24 साल के नवीद अकरम ने रविवार को सिडनी के बोंडी बीच पर यहूदी त्योहार के पहले दिन को मनाने के लिए आयोजित ‘हनुक्का बाय द सी’ कार्यक्रम में अंधाधुंध गोलीबारी की. इस हमले में हमलावर साजिद सहित 16 लोगों की मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि सबसे कम उम्र की पीड़ित 10 साल की एक लड़की थी, जिसकी बाद में बच्चों के अस्पताल में मौत हो गई, जबकि सबसे ज्यादा उम्र का पीड़ित 87 साल का था.

जर्मनी से निर्वासित जीवन जी रहे बुरफत ने अपने आधिकारिक बयान में हमले को “मानवता के खिलाफ अपराध और निर्दोष लोगों की हत्या का गंभीर पाप” करार दिया. उन्होंने इसे वैश्विक साजिश का हिस्सा बताया, जो डर, नफरत और विभाजन फैलाती है. बुरफत ने लंबे समय से चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान की राज्य-प्रायोजित धार्मिक कट्टरता और उग्रवादी समूहों की ट्रेनिंग सीमाओं से परे फैलकर वैश्विक आतंकवाद का रूप लेगी.

उनका आरोप है कि इस हमले में साफतौर पर पाकिस्तान द्वारा दशकों से पोषित कट्टरवादी मानसिकता और वैचारिक ढांचे के निशान दिखते हैं. पाकिस्तान “टू-नेशन थ्योरी” के जरिए असहिष्णुता और उग्रवाद को बढ़ावा देता रहा है. उन्होंने आगे कहा, “जब से पाकिस्तान ने धार्मिक उग्रवाद और आतंकवादी समूहों को ट्रेनिंग देना अपनी आधिकारिक सरकारी नीति के तौर पर अपनाया है, और उनका इस्तेमाल पड़ोसी इलाकों और उससे बाहर किया है, तब से सिंध के लोगों की ऐतिहासिक सूफी, धर्मनिरपेक्ष और मानवतावादी परंपराओं पर आधारित सिंधदेश राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन के राजनीतिक नेतृत्व ने लगातार दुनिया को बुरे नतीजों के बारे में चेतावनी दी है.”

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील कर कहा कि हमले की निंदा करने से ही बात नहीं बनेगी बल्कि इस देश को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में घसीटा जाए. पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य, राजनीतिक, कूटनीतिक और गुप्त वित्तीय सहायता तुरंत रोकी जाए. पाक सेना को उग्रवादी ताकतों का संरक्षक बताते हुए इसका संरक्षण बंद किया जाए. इसके साथ ही उन्होंने स्वतंत्र जांच की मांग की.

बुरफत ने कहा कि सिंधी राष्ट्र अपनी सूफी, धर्मनिरपेक्ष और मानवतावादी परंपराओं के अनुरूप सभी आतंक पीड़ितों के साथ खड़ा है, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों. शफी बुरफत सिंधुदेश आंदोलन के प्रमुख नेता हैं, जो सिंध को पाकिस्तान से अलग स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की वकालत करते हैं. वे पाकिस्तानी सेना और आईएसआई पर सिंध में दमन और कट्टरता फैलाने के आरोप लगाते रहे हैं. यह बयान हमले के तुरंत बाद जारी किया गया, जिसमें उन्होंने विश्व से राज्य-प्रायोजित उग्रवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की अपील की. यह हमला ऑस्ट्रेलिया में 1996 के बाद सबसे घातक मास शूटिंग है, जिसने वैश्विक स्तर पर निंदा और गन कानून सुधार की चर्चा छेड़ दी है.

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