विदेश » ‘बैठाए दो थे, निकले तीन’, कनाडा की -23 डिग्री वाली ठंड में भारतीय टैक्सी ड्राइवर का कमाल, दुनिया कर रही तारीफ

‘बैठाए दो थे, निकले तीन’, कनाडा की -23 डिग्री वाली ठंड में भारतीय टैक्सी ड्राइवर का कमाल, दुनिया कर रही तारीफ

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World News in Hindi: कनाडा में -23 डिग्री की बर्फीली रात में भारतीय मूल के ड्राइवर हरदीप सिंह तूर ने मिसाल पेश की. उन्होंने एक गर्भवती महिला को एम्बुलेंस के इंतजार के बजाय खुद अस्पताल पहुंचाया. रास्ते में टैक्सी की पिछली सीट पर ही बच्चे का जन्म हुआ. हरदीप की सूझबूझ से जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं. अब उनकी इस बहादुरी की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है.

'बैठाए दो थे, निकले तीन', कनाडा की ठंड में भारतीय टैक्सी ड्राइवर का कमालकनाडा टैक्‍सी ड्राइवर ने कमाल कर दिया.

बाहर शून्य से 23 डिग्री नीचे (-23°C) का जानलेवा तापमान, सड़कों पर बिछी बर्फ की चादर और हाथ कंपा देने वाली बर्फीली हवाएं. ऐसी ही एक खौफनाक रात में भारतीय मूल के टैक्सी ड्राइवर हरदीप सिंह तूर के लिए एक कॉल आई, जिसने न केवल उनकी धड़कनें बढ़ा दीं बल्कि उनके 4 साल के ड्राइविंग करियर का सबसे यादगार पल भी रच दिया. यह कहानी एक ऐसे सफर की है जो अस्पताल पहुंचने की रेस थी जिसमें एक नन्हीं जान ने टैक्सी की पिछली सीट पर ही इस दुनिया में कदम रखा. हरदीप ने गर्व से कहा, “मैंने गाड़ी में दो लोगों को बैठाया था, लेकिन जब दरवाजा खुला तो तीन लोग बाहर निकले.”

जब समय के खिलाफ शुरू हुई जंग
पिछले शनिवार की देर रात हरदीप सिंह तूर को एक इमरजेंसी डिस्पैच कॉल मिली. जब वह मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक गर्भवती महिला दर्द से बुरी तरह कराह रही थी और उसका साथी उसे संभालने की कोशिश कर रहा था. हरदीप ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को भांप लिया. ग्लोबल न्यूज के मुताबिक हरदीप के मन में पहला विचार एम्बुलेंस बुलाने का आया, लेकिन बाहर के मौसम और फिसलन भरी सड़कों को देखकर उन्होंने फैसला किया कि एम्बुलेंस का इंतजार करना जानलेवा हो सकता है. महिला की बॉडी लैंग्वेज बता रही थी कि उनके पास बिल्कुल समय नहीं है.

वो 30 मिनट जो साल भर से लंबे लगे
हरदीप ने अपनी टैक्सी को अस्पताल की ओर दौड़ा दिया. पीटर लॉघीड सेंटर तक का वह 30 मिनट का सफर हरदीप के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था. पीछे की सीट से चीखने-चिल्लाने और दर्द से छटपटाने की आवाजें आ रही थीं. हरदीप ने बताया कि रास्ते में पड़ने वाली हर रेड लाइट उनके सब्र का इम्तिहान ले रही थी. सड़क पर फिसलन थी और दृश्यता (visibility) बहुत कम, लेकिन हरदीप का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ सुरक्षित ड्राइविंग पर था.

टैक्सी में गूंजी किलकारी
अस्पताल से महज कुछ ब्लॉक की दूरी पर अचानक पीछे की सीट से आने वाली चीखें शांत हो गईं. हरदीप समझ गए कि बच्चा पैदा हो चुका है. उन्होंने एक पल के लिए भी गाड़ी नहीं रोकी. उनके मन में बस यही विचार था कि जल्द से जल्द जच्चा-बच्चा को मेडिकल हेल्प मिलनी चाहिए. जैसे ही टैक्सी अस्पताल के गेट पर रुकी, स्टाफ मदद के लिए दौड़ पड़ा. बाद में डॉक्टरों ने बताया कि मां और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं. इस घटना के बाद हरदीप सिंह तूर रातों-रात स्थानीय मीडिया में हीरो बन गए हैं. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए इसे अपनी जिंदगी का सबसे गर्व भरा क्षण बताया. मानवता की यह मिसाल दिखाती है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में एक सही फैसला और साहस किसी की जिंदगी बचा सकता है.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

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