नई दिल्ली. 3 जनवरी 2026 की रात वेनेजुएला के लिए किसी डरावने सपने जैसी थी. अमेरिकी सेना की सबसे घातक यूनिट डेल्टा फोर्स ने ‘ऑपरेशन साउदर्न स्पीयर’ के तहत एक ऐसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की, जिसने दुनिया को सन्न कर दिया. 9 घातक हेलीकॉप्टरों के काफिले ने राजधानी काराकास के आसमान को चीरते हुए धमाकों की गूंज के बीच धावा बोला. रात के करीब 2:00 बजे काराकास के मुख्य सैन्य ठिकानों—फुएर्ते तिउना और ला कार्लोटा एयरबेस पर एक साथ कम से कम सात भीषण धमाके हुए. बमबारी का मकसद वेनेजुएला के रडार और संचार सिस्टम को अंधा करना था. आसमान में 160th SOAR (नाइट स्टालकर्स) के MH-60 डैप हेलीकॉप्टरों ने रॉकेट दागकर सुरक्षा घेरे को नेस्तनाबूद कर दिया. राष्ट्रपति निकोलस मदुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस फोर्ट तिउना के अपने “किलेनुमा” सुरक्षित आवास में थे. डेल्टा फोर्स के कमांडो रस्सियों के सहारे नीचे उतरे और मदुरो को उनके ही घर से कब्जे में ले लिया. पूरा ऑपरेशन महज 30 मिनट में खत्म हो गया. मदुरो को तुरंत उठाकर अमेरिकी युद्धपोत USS Iwo Jima पर ले जाया गया, जहां से उन्हें सीधे न्यूयॉर्क भेजा गया है. वेनेजुएला की 3.40 लाख की विशाल फौज इस प्रेसिजन स्ट्राइक के सामने बेबस दिखी. ट्रंप ने इसे शानदार ऑपरेशन’ बताते हुए पुष्टि की कि अब मदुरो पर अमेरिकी अदालतों में ‘नार्को-टेररिज्म’ का मुकदमा चलेगा.






