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Explainer: आखिर ट्रंप का वेनेजुएला में तेल का खेल क्या है और ये कितना आसान या मुश्किल

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कहा जा रहा है कि अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के तेल के अथाह भंडार पर कब्जा करना चाहते हैं. इसी वजह से उन्होंने नार्को ट्रैफिकिंग की आड़ में वहां कार्रवाई की. उनके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और पत्नी सिलिया को गिरफ्तार करके न्यूयार्क ले गया. अब अमेरिका ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो को वेनेजुएला का वाइसराय बना दिया गया है. इसमें कोई शक नहीं कि वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा तेल का भंडार है, जिसमें केवल एक फीसदी का ही दोहन हो पा रहा है. बाकि भंडार को एक्सप्लोर करना बमुश्किल है. समझते हैं कि आखिर इस लातिनी देश में ट्रंप का तेल का खेल क्या है.

3 जनवरी की रात को अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के तानाशाह निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने इरादे स्पष्ट किए. उन्होंने कहा, “वेनेजुएला में तेल का कारोबार लंबे समय से पूरी तरह ठप पड़ा है. हम अपनी बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियों से अरबों डॉलर खर्च करवाएंगे, बुरी तरह क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को ठीक करवाएंगे और देश के लिए मुनाफा कमाना शुरू करेंगे.”

सवाल – क्या ये सही है कि पहले वेनेजुएला के तेल का दोहन अमेरिकी कंपनियां करती थीं, जिनको मादुरो ने पूरी तरह हटा दिया?

– हां, वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियां दशकों तक सक्रिय थीं लेकिन बाद में उन्हें राष्ट्रीयकरण और राजनीतिक टकराव के कारण बाहर होना पड़ा.
20वीं सदी के अधिकांश हिस्से में वेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों का दबदबा था. 1930 से लेकर 70 के दशक तक ये कंपनियां वहां तेल की खोज, उत्पादन, रिफाइनिंग और निर्यात सभी चीजों पर कंट्रोल करती थीं. वेनेजुएला तब अमेरिका का एक प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता था. फिर 1976 में वहां राष्ट्रीयकरण हुआ और पहली बार विदेशी कंपनियों को झटका लगा. 1976 में राष्ट्रपति कार्लोस आंद्रेस पेरेज़ ने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया. लेकिन उन्हें पूरी तरह निकाला नहीं गया बल्कि वो अल्प हिस्सेदारी के रूप में बनी रहीं. असली टकराव ह्यूगो चावेज़ के दौर में 1999 के बाद शुरू हुआ.

डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला के तेल को कंट्रोल करने की योजना पर इतनी आसान भी नहीं. (Image:AI)

सवाल – चावेज़ ने क्या किया?

– तेल को “राष्ट्रीय संप्रभुता” का हथियार घोषित किया. विदेशी कंपनियों से कहा, सरकार की कम से कम 51% हिस्सेदारी स्वीकार करो. मुनाफे का बड़ा हिस्सा सरकार को दो. रॉयल्टी और टैक्स काफी बढ़ा दिए गए. जब कंपनियों ने इसे मानने से मना किया तो उनकी संपत्तियां जब्त कर ली गईं. वेनेजुएला पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में मुकदमे चले. शेवरान, टोटल और ईएनआई जैसी कंपनियां शर्तें मानकर सीमित रूप में बनी रहीं.

सवाल – मादुरो के समय पूरी तरह किनारे क्यों हो गईं अमेरिकी कंपनियां?

– निकोलस मादुरो 2013में सत्ता में आए. तब वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध और कड़े हो गए तो अमेरिकी कंपनियां वहां से निकल गईं.

सवाल – क्या इसीलिए ट्रंप ये आरोप लगा रहे हैं कि वेनेजुएला ने अमेरिकी तेल चुरा लिया है?

– हां, ये बात कुछ ऐसी ही है. ह्यूगो चावेज़ के शासनकाल में, वेनेज़ुएला ने अमेरिकी और अन्य पश्चिमी कंपनियों की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था. वेनेज़ुएला और उसकी राष्ट्रीय तेल कंपनी पीडीवीएसए के खिलाफ अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय अदालतों में कुल 60 अरब डॉलर के मुकदमे दायर किए गए हैं. इसी वजह से ट्रंप लगातार वेनेज़ुएला से “वह सारा तेल, ज़मीन और अन्य संपत्तियां लौटाने” की मांग कर रहे थे और कह रहे थे कि ये हमसे चुराई गई हैं.

सवाल – तो अब ट्रंप वेनेजुएला के तेल का क्या करना चाहते हैं?

– राष्ट्रपति ट्रंप केवल प्रतिशोध नहीं बल्कि उससे कहीं अधिक चाहते हैं. दशकों से कम निवेश और कुप्रबंधन के कारण वेनेजुएला का तेल उत्पादन 2000 के दशक के उत्तरार्ध से दो-तिहाई गिरकर लगभग 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया है. ट्रंप चाहते हैं कि वहां निष्क्रिय क्षमता को बहाल करें, जिससे वेनेजुएला समृद्ध होगा. साथ ही अमेरिकी जेबें भी भरेंगी.

सवाल – क्या ये सही है कि वेनेजुएला के पास दुनिया में सबसे बड़ा तेल भंडार है?

– हां, ये करीब सही है. वेनेजुएला के पास लगभग 300 अरब बैरल तेल का भंडार है, जो विश्व के भंडार का पांचवां हिस्सा है. उत्पादन और भी बढ़ सकता है,लेकिन इस तेल को निकालना बहुत चुनौतीपूर्ण है. निकट भविष्य में वेनेजुएला के कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ने के बजाय घटने की संभावना अधिक है. दिसंबर में अमेरिका ने प्रतिबंधित टैंकरों द्वारा ले जाए जा रहे वेनेजुएला के कच्चे तेल पर नाकाबंदी लगा दी; फिर उनमें से एक को जब्त कर लिया. तब से निर्यात में भारी गिरावट आई है.
वेनेजुएला में नेफ्था की भी कमी है, एक ऐसा पदार्थ जिसकी उसे अपने अत्यधिक गाढ़े कच्चे तेल को परिवहन योग्य बनाने के लिए जरूरत होती है, जो अब रूस से नहीं आ रहा है. जब तक नाकाबंदी नहीं हटाई जाती, जो राजनीतिक और सैन्य घटनाक्रमों पर निर्भर करता है, वेनेजुएला के उत्पादन को और कम करना पड़ेगा, शायद 700,000 बैरल प्रति दिन से भी कम.

सवाल – क्या ट्रंप वापस वेनेजुएला के तेल उत्पादन को उसी पोजिशन में ला सकेंगे, जो पहले था?

– एक कंसल्टेंसी फर्म रायस्टैड एनर्जी का अनुमान है कि वेनेजुएला के तेल उत्पादन को 15 साल पहले के स्तर पर वापस लाने के लिए अकेले अन्वेषण और उत्पादन पर 110 अरब डॉलर के पूंजीगत व्यय की आवश्यकता होगी, यह राशि 2024 में अमेरिका की प्रमुख तेल कंपनियों द्वारा विश्व स्तर पर किए गए संयुक्त निवेश से दोगुनी है. हालांकि ट्रंप को लगता है कि ये कंपनियां बड़े निवेश करने के लिए तुरंत आगे आएंगी. जो आसान नहीं लगता.
शेवरॉन पहले से ही वेनेजुएला में मौजूद है. प्रतिबंधों में छूट के तहत अमेरिका को लगभग 200,000 बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात कर रही है, वो जरूर अपने परिचालन का विस्तार करेगी लेकिन अन्य कंपनियां अतीत के कष्टों को नहीं भूली हैं. वो एक एक पैर फूंककर रखेंगी. क्योंकि आमतौर पर माना जा रहा है कि ट्रंप की योजनाओं की सफलता की कोई गारंटी नहीं है. वे तीन साल से कुछ अधिक समय में व्हाइट हाउस छोड़ देंगे.
विश्लेषकों का कहना है कि वेनेजुएला में उत्पादन बढ़ाना सस्ता नहीं होगा. एनर्जी एस्पेक्ट्स नामक एक शोध फर्म ने अनुमान लगाया है कि प्रतिदिन अतिरिक्त पांच लाख बैरल उत्पादन बढ़ाने में 10 अरब डॉलर का खर्च आएगा और इसमें लगभग दो साल लगेंगे.

सवाल – इसे लेकर और कौन से सवाल हैं?

– अगर पर्याप्त तेल कंपनियों को निवेश करने के लिए राजी भी कर लिया जाए, तो भी वेनेजुएला का तेल उद्योग इस मांग को पूरा कर पाएगा, इसमें संदेह है. हाल के वर्षों में कुशल श्रमिकों का भारी पलायन हुआ है. इंजीनियरों से लेकर भूवैज्ञानिकों तक हजारों कुशल श्रमिक देश छोड़कर चले गए हैं. वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए का अधिकांश संचालन अब सशस्त्र बलों द्वारा किया जा रहा है. अगर वेनेजुएला की तेल क्षमता बढ़ानी है तो 70000 कर्मचारी बाहर से लाने होंगे. इसके बाद भी इसमें सालों लग जाएंगे. फिर वेनेजुएला का अधिकांश तेल अत्यधिक भारी है, जिससे यह प्रदूषण करने वाला है और प्रोसेस करने में खासा महंगा.
एक हालिया अध्ययन के अनुसार, देश के तेल क्षेत्र जर्जर अवस्था में हैं और “वर्षों से अपर्याप्त ड्रिलिंग, जर्जर बुनियादी ढांचे, बार-बार बिजली कटौती और उपकरण चोरी” जैसी समस्याओं से ग्रस्त हैं.

सवाल – तेल उत्पादन पर अमेरिकी नियंत्रण का क्या अर्थ होगा?

– अगर अमेरिकी तेल कंपनियों को अधिक छूट दी जाती है तो वेनेजुएला में तेल की आपूर्ति से तेल उद्योग को धीरे-धीरे पुनर्जीवित करने में मदद मिल सकती है. हालांकि ये सभी कह रहे हैं कि विश्लेषकों का कहना है कि वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाना सस्ता नहीं होगा.

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