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वेनेजुएला में अमेरिका ने उथल-पुथल मचा दी है. ट्रंप की स्पेशल फोर्स इस देश के राष्ट्रपति को ही उठा कर ले गई है. जहां एक तरफ न्यूयॉर्क में निकोलस मादुरो की किस्मत का फैसला हो रहा है. वहीं, दूसरी तरफ वेनेजुएला की कमान डेल्सी रोड्रिगेज के हाथ में आ गई है. ट्रंप की बातों में डेल्सी से उम्मीदें साफ नजर आ रही हैं. डेल्सी के कुर्सी पर बैठते ही उनकी ‘साईं बाबा’ के प्रति आस्था चर्चा में आ गई है. मादुरो की तरह डेल्सी भी सत्य साईं बाबा की भक्त हैं और उनके दर्शन के लिए भारत आ चुकी हैं. उनके आस्था भरे भारत दौरे की तस्वीरें हाल ही में खूब वायरल हो रही हैं.

वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति की कमान संभालने वालीं डेल्सी रोड्रिगेज, निकोलस मादुरो की करीबी मानी जाती हैं. आस्था के मामले में भी वो मादुरो की तरह ही पुट्टापार्थी के सत्य साईं बाबा की अनन्य भक्त हैं. वो उनके विचार फॉलो करती हैं और हर अहम फैसले साईं बाबा को याद करते हुए ही लेती हैं.

डेल्सी रोड्रिगेज का ‘साईं’ प्रेम भारत यात्राओं में साफ झलक चुका है. उन्होंने 2023 और हाल ही में अक्टूबर 2024 में आंध्र प्रदेश के पुट्टापार्थी की यात्रा की थी. जहां उन्होंने बाबा की समाधि पर माथा टेका था. इस भक्तिमय दौरे की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं.

पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस भी बाबा के परम भक्त थे. वे 2005 में पुट्टापार्थी आए थे और बाबा के चरणों में बैठकर आशीर्वाद लिया था. दोनों के उस दौरे की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं.
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कहा जाता है कि मादुरो के बेडरूम और उनके राष्ट्रपति कार्यालय में महान क्रांतिकारी साइमन बोलिवर के साथ सत्य साईं बाबा की विशाल तस्वीर हमेशा लगी रहती थी. मादुरो उनकी तस्वीर को माथे से लगाए बगैर अहम फैसले नहीं लेते थे.

विशेषज्ञों का मानना है कि डेल्सी रोड्रिगेज अपनी मुश्किल घड़ी में बाबा के ‘मानवीय मूल्यों’ से शक्ति लेती हैं. उन्होंने अपनी पुट्टापार्थी यात्रा के दौरान वहां की शांति और ऊर्जा का विशेष जिक्र किया था.

मादुरो और अब डेल्सी के संरक्षण में वेनेजुएला में सत्य साईं संगठन तेजी से फला-फूला है. वहां कई स्कूल और आध्यात्मिक केंद्र चल रहे हैं जिन्हें सरकार का पूरा समर्थन प्राप्त है.

2011 में जब सत्य साईं बाबा का निधन हुआ था, तब वेनेजुएला की संसद ने आधिकारिक तौर पर शोक प्रस्ताव पारित किया था और एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था.





