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Fastest Quadcopter Drone Speed: बाप-बेटे की एक जोड़ी ने 656 किमी/घंटा की रफ्तार से दुनिया का सबसे तेज ड्रोन ‘पेरेग्रीन 4’ बनाया है. उन्होंने 3D प्रिंटिंग और शक्तिशाली मोटरों की मदद से बेन बिग्स का पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने अब इस अद्भुत उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि कर दी है. यह इस बाप-बेटे की जोड़ी का तीसरा विश्व रिकॉर्ड है.
रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार का नया किंग: बाप-बेटे ने बनाया सबसे तेज ड्रोन. (Credit: YouTube/Luke Maximo Bell)Fastest Quadcopter Drone: एक मशहूर यूट्यूबर ल्यूक बेल और उनके पिता माइक बेल ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. उन्होंने दुनिया का सबसे तेज क्वाडकॉप्टर ड्रोन बनाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. इस ड्रोन का नाम ‘पेरेग्रीन 4’ (Peregrine 4) रखा गया है. इस शक्तिशाली मशीन ने हवा में 408 मील प्रति घंटे यानी करीब 656 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार पकड़ी है. यह रफ्तार किसी सुपरकार से भी कहीं अधिक तेज है. बेल परिवार ने ऑस्ट्रेलियाई इंजीनियर बेन बिग्स का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. बेन बिग्स के ड्रोन ने पिछले महीने 389 मील प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की थी. ल्यूक और माइक ने पिछले पांच महीनों से इस प्रोजेक्ट पर दिन-रात काम किया है. उन्होंने इंजीनियरिंग और 3D प्रिंटिंग तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल किया है.
कैसे बनाया गया दुनिया का सबसे तेज और शक्तिशाली ‘पेरेग्रीन 4’ ड्रोन?
ल्यूक बेल ने बताया कि उन्होंने पेरेग्रीन 4 के डिजाइन में कई बड़े बदलाव किए हैं. उन्होंने ड्रोन के हर हिस्से को बेहतर बनाने के लिए कई सिमुलेशन टेस्ट किए. इस बार उन्होंने ‘बम्बू लैब H2D’ ड्यूल-एक्सट्रूडर 3D प्रिंटर का इस्तेमाल किया है. इससे ड्रोन की मुख्य बॉडी और कैमरा माउंट को एक ही हिस्से के रूप में प्रिंट किया गया. इस तकनीक की मदद से ड्रोन की बनावट पहले से ज्यादा एरोडायनामिक और मजबूत हो गई है. उन्होंने इसमें चार शक्तिशाली ‘T-Motor 3120’ ब्रशलेस मोटर का इस्तेमाल किया है. ये मोटर ड्रोन को पलक झपकते ही आसमान की ऊंचाइयों तक ले जाते हैं. इस नए मॉडल का आकार पहले के मुकाबले थोड़ा बड़ा रखा गया है. लेकिन इसकी परफॉर्मेंस ने पुराने सभी रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया है.
कैसे 3D प्रिंटिंग तकनीक ने इस ड्रोन की रफ्तार में चार चांद लगा दिए?
- गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकारियों ने इस रिकॉर्ड की पुष्टि करने के लिए बेहद सख्त नियमों का पालन किया है. ड्रोन को हवा की गति के प्रभाव से बचाने के लिए दो अलग-अलग दिशाओं में उड़ाया गया था. इसके बाद उन दोनों उड़ानों की औसत रफ्तार निकाली गई. यह औसत रफ्तार 408 मील प्रति घंटा दर्ज की गई जो एक नया कीर्तिमान है.
- ल्यूक और उनके पिता ने पिछले साल जून 2025 में भी एक बड़ा रिकॉर्ड सेट किया था. लेकिन बीच में दूसरे आविष्कारकों ने उन्हें पीछे छोड़ दिया था. अब उन्होंने तीसरी बार इस प्रतिष्ठित खिताब को अपने नाम किया है. 3D प्रिंटिंग की वजह से ड्रोन की सतह को बहुत ही स्मूथ फिनिश मिली है. इससे हवा का घर्षण कम हुआ और रफ्तार बढ़ गई.
क्या भविष्य में ड्रोन की रफ्तार के ये रिकॉर्ड और भी ज्यादा टूटते रहेंगे?
जिस तेजी से तकनीक बदल रही है उसे देखकर लगता है कि यह रिकॉर्ड भी ज्यादा दिन नहीं टिकेगा. पिछले कुछ सालों में ड्रोन की गति के रिकॉर्ड कई बार टूटे हैं. ल्यूक बेल और उनके पिता लगातार अपने डिजाइन को अपडेट कर रहे हैं. वे अब और भी हल्की और मजबूत धातुओं के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं. यह मुकाबला अब केवल रफ्तार का नहीं बल्कि इंजीनियरिंग की समझ का भी बन गया है. दुनिया भर के इंजीनियर अब इस रिकॉर्ड को तोड़ने की तैयारी में जुट गए होंगे. लेकिन फिलहाल बेल परिवार इस बड़ी जीत का जश्न मना रहा है.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें
January 14, 2026, 17:05 IST





