Agency:एजेंसियां
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युगांडा में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान इंटरनेट बंदी, मतदान में देरी और भारी सुरक्षा तैनाती ने लोकतंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 1986 से सत्ता में बैठे राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी एक बार फिर मैदान में हैं, जबकि विपक्ष गड़बड़ियों और दमन का आरोप लगा रहा है. मानवाधिकार संगठनों ने चुनावी माहौल को डर और दबाव भरा बताया है.
युगांडा का चुनाव.कंपाला: युगांडा में गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया, लेकिन वोटिंग के पहले ही दिन हालात सवालों में घिर गए. देशभर में इंटरनेट बंद है, कई मतदान केंद्रों पर देरी हुई और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती देखने को मिली. इन सबके बीच लोगों में नाराजगी और बेचैनी साफ नजर आई. वहीं युगांडा जहां से कभी भारतीयों को तानाशाह ईदी अमीन ने देश छोड़ने को मजबूर कर दिया था. युगांडा में बीते कई दिनों से इंटरनेट सेवाएं बंद हैं. सरकार का कहना है कि यह कदम अफवाहों, चुनावी गड़बड़ी और हिंसा भड़काने से रोकने के लिए उठाया गया है. लेकिन विपक्ष और मानवाधिकार संगठन इसे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश बता रहे हैं. इंटरनेट बंद होने से बैंकिंग और अन्य जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं.
चुनावों में क्या आई दिक्कत?
सुबह सात बजे मतदान शुरू होना था, लेकिन राजधानी कंपाला समेत कई इलाकों में मतदान सामग्री समय पर नहीं पहुंची. कई जगहों पर वोटिंग मशीनें ठीक से काम नहीं कर रही थीं. इससे लंबी कतारें लग गईं और लोग घंटों इंतजार करने को मजबूर हो गए. कंपाला में एक मतदान केंद्र के बाहर मौजूद उमरु मुत्याबा ने कहा कि इतनी देर तक इंतजार करना बेहद परेशान करने वाला है. उन्होंने कहा कि लोग यहां खाली बैठने नहीं आए हैं, सबके अपने काम हैं. विपक्ष के वरिष्ठ नेता और सांसद सेमुज्जु नगांडा ने बताया कि उन्हें वोट डालने के लिए तीन घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ा. उनका कहना है कि मशीनों की खराबी और देरी से शहरी इलाकों में मतदान प्रतिशत गिर सकता है, जहां विपक्ष को मजबूत समर्थन मिलता है. उन्होंने चेतावनी दी कि हालात और बिगड़े तो अराजकता फैल सकती है.
8वीं बार राष्ट्रपति मैदान में?
इस चुनाव में 81 साल के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी लगातार आठवीं बार मैदान में हैं. वह 1986 से सत्ता में हैं और अफ्रीका के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में शामिल हैं. उनके खिलाफ सात उम्मीदवार हैं, जिनमें सबसे प्रमुख नाम गायक से नेता बने रॉबर्ट क्यागुलान्यी उर्फ बॉबी वाइन का है. बॉबी वाइन लंबे समय से राजनीतिक बदलाव की मांग कर रहे हैं और युवाओं में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. युगांडा की आबादी करीब साढ़े चार करोड़ है और 2 करोड़ 16 लाख से ज्यादा मतदाता पंजीकृत हैं. चुनाव आयोग के अनुसार शाम चार बजे मतदान बंद होगा और नतीजे 48 घंटे के भीतर घोषित किए जाएंगे.
2021 के चुनाव में क्या हुआ था?
युगांडा के इतिहास में अब तक सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण कभी नहीं हुआ है. आलोचकों का कहना है कि मुसेवेनी की सत्ता अब सेना के सहारे टिकी है, जिसका नेतृत्व उनके बेटे मुहोजी काइनरुगाबा करते हैं. इससे सत्ता को परिवार में बनाए रखने की आशंका भी जताई जा रही है. 2021 के चुनाव में भी मुसेवेनी और बॉबी वाइन आमने-सामने थे. उस समय मुसेवेनी को 58 फीसदी और बॉबी वाइन को 35 फीसदी वोट मिले थे. यह मुसेवेनी का अब तक का सबसे कमजोर प्रदर्शन माना गया था.
चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई थी. सड़कों पर सेना और पुलिस की तैनाती की गई है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने विपक्षी समर्थकों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की है. एक रैली के दौरान गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत का भी दावा किया गया है.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें
January 15, 2026, 15:12 IST





