साहित्य » पिता होना बात तो है पर राष्ट्रपिता होना ? कभी न चाहते हुए भी कुछ लिखना जरूरी हो जाता है

पिता होना बात तो है पर राष्ट्रपिता होना ? कभी न चाहते हुए भी कुछ लिखना जरूरी हो जाता है

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हम हैं

कितना हैं

हमको आभास है

अपने उतना होने का

हम बिल्कुल भी नहीं थे

जब तुम थे पूरे से भी जियादा

तुम नहीं थे तब हम हैं

कितना हैं पता नहीं है

हमारे होने और हमारे न होने में

बहुत बड़ा फासला नहीं है

आज हैं कल नहीं भी होंगे

कितना नहीं होंगे

समय फैसला करेगा

तुम कल भी थे आज भी हो

और तुम रहोगे भी

तुम्हारा होना भी उतना ही जरूरी है

तुम थे तब हालात बहुत खराब थे

तुम नहीं थे हालात और भी खराब हो गए

संतुलन की धुरी में

तुमने तब भी बनाए रखा विश्वास

आज भी है तुम्हारे नहीं होने के बाद भी

हमने तुम्हें नहीं देखा हमने तुम्हारे बारे में सुना

कितने भाग्यशाली होंगे वो लोग जो तुम्हारे साथ थे

कितने अभागे हैं हम

तुम नहीं हो हमारे साथ हमारे ही कारण

एक पीढ़ी से लेकर दूसरी पीढ़ी

क्या अनंत तक अंत नहीं है तुम्हारा

आज के दिन तुम्हें याद करना

सबसे जरूरी है

क्योंकि

आज भी वैसे ही दिन हैं

जैसे तब थे जब तुम थे

‘उलूक’ नतमस्तक है तेरे सामने

जब तू नहीं है

राष्ट्रपिता बापू

आज ही नहीं हर दिन तेरा दिन है

नमन |

चित्र साभार: https://www.shutterstock.com/

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