विदेश » US-Israel-Iran War| Iran updates: ईरान, इजराइल और अमेरिका: क्‍यों चर्चा में हैं ये तीनों देश, कैसे पड़े इनके नाम, क्‍या है इसके पीछे की कहानी?

US-Israel-Iran War| Iran updates: ईरान, इजराइल और अमेरिका: क्‍यों चर्चा में हैं ये तीनों देश, कैसे पड़े इनके नाम, क्‍या है इसके पीछे की कहानी?

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US-Israel-Iran War: म‍िडिल ईस्‍ट में ईरान और इजराइल के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और अमेरिका भी इसमें शामिल दिख रहा है.अमेरिका इजराइल और ईरान के बीच वॉर चल रहा है.इसकी आंच कई देशों तक पहुंच गई है.ऐसे में इन तीनों देशों के नाम सुर्खियों में हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इनके नामों के पीछे कितनी दिलचस्प कहानियां छिपी हैं. आइए समझते हैं कि ईरान, इजराइल और अमेरिका के नाम कैसे पड़े और इनका असली मतलब क्या है?

ईरान:‘आर्यों की भूमि’से निकला नाम

आज हम जिसे ईरान कहते हैं उसे पहले ज्यादातर लोग पर्शिया (Persia) के नाम से जानते थे, लेकिन असल नाम ईरान बहुत पुराना है. ये शब्द प्राचीन आर्यन से आया है जिसका मतलब है आर्यों की भूमि या आर्य लोगों का देश.1935 में उस समय के शासक रेजा शाह पहलवी ने दुनिया से कहा कि अब इसे पर्शिया नहीं, बल्कि ईरान कहा जाए. उनका मकसद था देश की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को सामने लाना.दरअसल स्थानीय लोग हजारों साल से इसे ईरान ही कहते थे,लेकिन पश्चिमी दुनिया में पर्शिया नाम ज्यादा चलता था.ईरान का नाम आर्यों की भूमि से हैं.ईरान(Īrān)शब्द मध्य फारसी (Middle Persian) के Ērān से आया है जो तीसरी शताब्दी ईस्वी से इस्तेमाल होता था. इसका मतलब शुरू में आर्यों का या आर्यों की भूमि था. ये ओल्‍ड ईरानियन (Old Iranian)भाषा के arya(आर्य) से निकला है जो प्राचीन इंडो-ईरानी लोगों का खुद का नाम था.जोरोएस्ट्रियन धर्म की प्राचीन किताबें अवेस्‍टा (Avesta)में Airya या Airyānąm का इस्तेमाल आर्यों की भूमि के लिए हुआ है.अकेमेनिंद (Achaemenid)काल के कालदारा प्रथम के शिलालेख में Ariya का जिक्र है जहां राजा खुद को आर्य कहते थे.तीसरी शताब्दी में सस्‍सानीद (Sassanid)काल में अर्दशीर प्रथम के नक्श-ए-रुस्तम शिलालेख में Ērān का पहला स्पष्ट इस्तेमाल मिलता है जिसका मतलब आर्यों से है.

1935 में नाम बदलने का फैसला

रेजा शाह पहलवी ने 21 मार्च 1935 को विदेशी राजदूतों को पत्र लिखकर कहा कि अब आधिकारिक तौर पर Persia की जगह Iran इस्तेमाल किया जाए.जिसका मकसद देश की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना और परसिया (Persia) को जो सिर्फ एक क्षेत्र (Parsa) से जुड़ा था, उससे हटकर पूरी राष्ट्र की पुरानी जड़ों आर्यन/ईरानी को सामने लाना था.स्थानीय लोग हजारों साल से इसे ईरान ही कहते थे,लेकिन पश्चिमी दुनिया में ग्रीम और रोमन प्रभाव के कारण पर्सिया (Persia) ज्यादा चलता था.ब्रिटिश और अन्य विदेशी दस्तावेजों में 1935 का ये बदलाव दर्ज है.इतिहासकारों की किताबें और आर्टिकल्स जैसे History Hit, Far Horizons और विकिपीडिया पहलवी इरान (Pahlavi Iran) पेज में स्पष्ट लिखा है कि ये सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का हिस्सा था.कुछ अफवाहें हैं कि ये नाजी जर्मनी से प्रभावित था क्योंकि आर्यन शब्द, लेकिन मुख्यधारा के इतिहासकार इसे खारिज करते हैं.

बाइबिल से जुड़ी है इजराइल के नाम की कहानी

इजराइल के नाम की पूरी कहानी बाइबिल से जुड़ी है और ये काफी इंटरेस्टिंग है.बाइबिल में याकूब नाम का एक आदमी था. वो इब्राहिम और इसहाक का पोता था. याकूब का नाम पहले से ही मतलब वाला था एड़ी पकड़ने वाला या धोखेबाज/जगह छीनने वाला. वो बचपन से ही चालाक था.भाई एसाव से जन्म के समय एड़ी पकड़कर आया था और बड़ा होकर भी कई बार चालाकी की.एक रात याकूब नदी के किनारे था. वहां एक अनजान आदमी जिसे बाइबिल में एक आदमी कहा गया है, लेकिन बाद में पता चलता है कि वो ईश्वर का दूत या ईश्वर खुद था से उसकी पूरी रात कुश्ती हो गई. सुबह होने पर वो आदमी बोला मुझे जाने दे,क्योंकि सुबह हो रही है लेकिन याकूब ने कहा-नहीं पहले मुझे आशीर्वाद दो.तब उस आदमी ने पूछा-तुम्हारा नाम क्या है? इस पर याकूब ने अपना नाम बताया. फिर वो बोला कि अब तुम्हारा नाम याकूब नहीं रहेगा,बल्कि इजराइल होगा क्योंकि तुमने ईश्वर के साथ और इंसानों के साथ संघर्ष किया है और तुम जीत गए हो.ये घटना जेनेसिस (Genesis 35)में है जहां ईश्वर खुद याकूब को ये नाम देता है.

नाम का मतलब क्या है?

हिब्रू भाषा में इजराइल (Yisra’el) दो हिस्सों से बना है.Yisra या Sara जिसका मतलब है संघर्ष करना, लड़ना, कोशिश करना, जूझना और El से यहां आशय ईश्वर(God)से है.तो इसका सीधा मतलब है जो ईश्वर के साथ संघर्ष करता है या ईश्वर के साथ जूझने वाला है.कई जगह इसे ईश्वर के साथ जीतने वाला या ईश्वर के साथ प्रयास करने वाला भी कहते हैं.बाइबिल में खुद कहा गया है कि तुमने ईश्वर के साथ संघर्ष किया और जीत हासिल की.

1948 में आधुनिक देश का नाम क्यों इजराइल?

जब 1948 में यहूदियों ने अपना नया देश बनाया तो नाम चुनने में काफी बहस हुई.14 मई को डेविड बेन-गुरियन ने इसकी घोषणा की. कुछ लोग चाहते थे कि Judea (यहूदिया),Zion (जियोन), Eretz Israel (इजराइल की भूमि) या The State of the Jews लेकिन आखिर में State of Israel चुना गया क्योंकि ये नाम बाइबिल से सीधा जुड़ा था याकूब की संतान इजराइल की बारह जनजातियां से पूरा यहूदी इतिहास और पहचान दिखाता है.ये सिर्फ एक छोटे इलाके जैसे Judea का नाम नहीं था, बल्कि पूरी परंपरा, पुरानी कहानियों और यहूदी लोगों की जड़ों को कवर करता था. फैसला एक छोटी कमेटी में वोटिंग से हुआ. बेन-गुरियन ने Israel सुझाया और वो पास हो गया. घोषणा में लिखा गया कि यहूदियों की राज्य Eretz-Israel में, जिसे State of Israel कहा जाएगा.तो कुल मिलाकर इजराइल का नाम बाइबिल की उस रात की कुश्ती से आया जहां याकूब ने ईश्वर से जूझकर नया नाम पाया -ईश्वर के साथ संघर्ष करने वाला. 1948 में देश बनने पर इसी पुरानी, धार्मिक और ऐतिहासिक जड़ के आधार पर नाम रखा गया, ताकि पूरी यहूदी पहचान (बारह जनजातियां, याकूब की संतान) सामने आए.ये कोई नया नाम नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी परंपरा का वापस लाना था.

ईटली के खोजकर्ता के नाम पर पड़ा नाम

अमेरिका का नाम किसी राजा, देवता या पुरानी सभ्यता से नहीं पड़ा,बल्कि एक इटालियन खोजकर्ता के नाम पर पड़ा है.लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस (Library of Congress),एनसाइक्‍लोपिडिया ब्रिटेनिका समेत कई इतिहासकारों की किताबों में यह तथ्‍य है.

अमेरिका नाम कैसे पड़ा?

1454-1512 ईस्‍वी में अमेरिगो वेस्पुची नाम का एक इटालियन एक्सप्लोरर था. वो 1499, 1501-1502 में स्पेन और पुर्तगाल के लिए जहाज पर नई दुनिया की यात्राएं करता था.उसने लिखा कि कोलंबस ने जो जगहें खोजीं वो एशिया नहीं, बल्कि एक नया महाद्वीप है. उसकी लेटर्स यूरोप में बहुत पॉपुलर हो गईं.1507 में मार्टिन वाल्डसीमुलर नाम का जर्मन मैप मेकर कार्टोग्राफर ने एक बड़ा विश्व मानचित्र बनाया. ये मैप Universalis Cosmographia कहलाता है.इस मैप में पहली बार नए महाद्वीप को अलग दिखाया गया और उस पर अमेरिका नाम लिखा क्योंकि वाल्डसीमुलर ने वेस्पुची की खोजों और लेटर्स से प्रभावित होकर सोचा कि ये जगह वेस्पुची ने डिस्कवर की है इसलिए उसका नाम लैटिन में महिला नाम जैसा Americus→ America रखा जाए.ये मैप आज Library of Congress में रखा है और इसे अमेरिका का जन्म प्रमाण पत्र कहा जाता है.नाम पहले सिर्फ दक्षिण अमेरिका पर लगा था,लेकिन बाद में पूरे नए महाद्वीप नॉर्थ +साउथ पर फैल गया.

USA: यूनाइटेड स्‍टेटस ऑफ अमेरिका कैसे बना?

जब 1776 में ब्रिटेन से आजादी मिली तो कॉलोनियां पहले यूनाइटेड कॉलोनिज (United Colonies) कहलाती थीं.9 सितंबर 1776 को सेकंड कांटिनेंटल कांग्रेस (Second Continental Congress)ने फैसला किया कि अब इसका नाम यूनाइटेड स्‍टेटस ऑफ अमेरिका (United States of America) होगा.ये नाम थॉमस जेफरसन (Thomas Jefferson)ने डिक्‍लिरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट (Declaration of Independence)में इस्तेमाल किया था और ये कई राज्यों के संघ (union)को दिखाता है.पहले से ही 1776 की शुरुआत में कुछ लेटर्स में यूनाइटेड स्‍टेटस ऑफ अमेरिका (United States of America)लिखा जा रहा था.इसकी जानकारी National Archives, Constitution Center और US history records आदि में उपलब्‍ध है.कुल मिलाकर अमेरिका नाम अमेरिगो वेस्पुची के नाम पर 1507 के वाल्डसीमुलर मैप से आया. एक जर्मन मैप मेकर ने वेस्पुची की खोजों को सम्मान देते हुए रखा.ये कोई प्लान्ड नाम नहीं था, बल्कि एक मैप पर लिखा गया और बाद में पॉपुलर हो गया.1776 में देश बनने पर पूरा नाम यूनाइटेड स्‍टेटस ऑफ अमेरिका (United States of America) रखा जो अमेरिका को यूएसए के साथ जोड़ता है.

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