मनोरंजन » तिग्मांशु धूलिया को मिली थी मारने-मुंह काला करने की धमकी, मांगी जया बच्चन से मदद, फिर बनी क्लासिक फिल्म

तिग्मांशु धूलिया को मिली थी मारने-मुंह काला करने की धमकी, मांगी जया बच्चन से मदद, फिर बनी क्लासिक फिल्म

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मुंबई. फिल्म निर्माता तिग्मांशु धूलिया ने हाल ही में खुलासा किया कि अपने होमटाउन इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में अपनी पहली फिल्म ‘हासिल’ की शूटिंग के दौरान उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा. तिग्मांशु ने बताया कि फिल्म में कैंपस पॉलिटिक्स को दिखाने पर स्थानीय नेताओं ने कड़ा विरोध किया, जिससे उन्हें जया बच्चन से मदद मांगनी पड़ी. साल 2003 में रिलीज हुई हासिल को उत्तर प्रदेश में छात्र राजनीति की सच्ची तस्वीर दिखाने के लिए खूब सराहा गया.

‘हासिल’ में इरफान खान, ऋषिता भट्टा, आशुतोष राणा और जिम्मी शेरगिल लीड रोल में थे. यह फिल्म तिग्मांशु धूलिया के करियर की टर्निंग प्वाइंट साबित हुई थी. द लल्लनटॉप के मुताबिक, तिग्मांशु ने बताया कि फिल्म के पहले ही सीन की शूटिंग के बाद मुश्किलें शुरू हो गई थीं, जिसमें आशुतोष राणा का किरदार दिखाया गया था. उन्होंने कहा, “जब मैं इलाहाबाद में हासिल की शूटिंग कर रहा था, पहले सीन में आशुतोष राणा की एंट्री थी. फिल्म में वह यूनिवर्सिटी प्रेसिडेंट बने हैं.”

तिग्मांशु धुलिया ने कहा,”किसी कहानी में अगर राम है तो रावण भी होना चाहिए. मैंने ‘रावण’ वाला सीन पहले शूट किया, तो लोगों को लगा कि मैं विश्वविद्यालय को गलत तरीके से दिखा रहा हूं.” उन्होंने आगे बताया कि कुछ स्थानीय लोगों को लगा कि किरदार असली छात्र नेताओं से इंस्पायर हैं.

तिग्मांशु धुलिया ने कहा, “वहां एक छात्र नेता थे लक्ष्मी शंकर ओझा. फिल्म में आशुतोष का नाम लक्ष्मी शंकर पांडे था, जिसे बाद में गौरी शंकर पांडे कर दिया. जल्द ही मुझे कॉल आया, ‘आप हमारे ऊपर फिल्म बना रहे हैं.’” स्थिति तेजी से बिगड़ गई और उन्हें जिला मजिस्ट्रेट के ऑफिस बुलाया गया.

‘हासिल’ की शूटिंग के दौरान भड़क गए थे नेता

तिग्मांशु धुलिया ने कहा, “यह पहली बार था जब शहर में फिल्म की शूटिंग हो रही थी. मैं तब ‘तिग्मांशु धूलिया’ नहीं बना था; यह मेरी पहली फिल्म थी. मैं अपने शहर बहुत उत्साहित होकर गया था, सोच रहा था कि वहीं शूटिंग करूंगा. लेकिन हालात जल्द ही तनावपूर्ण हो गए. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के करीब 20-25 पूर्व अध्यक्ष वहां मौजूद थे. उन्होंने मुझे घेर लिया और धमकी देने लगे. यात्री होटल की खिड़कियां तोड़ देंगे, उसमें आग लगा देंगे, मेरा चेहरा काला कर देंगे, मुझे गधे पर बैठाकर पूरे शहर में घुमाएंगे.”

रोने लगे थे तिग्मांशु धुलिया

तिग्मांशु धुलिया ने कहा कि वह डर गए और रोने लगे. सारी भावनाएं बाहर आ गईं. मैं अपने ही शहर आया था और वहां अपमानित महसूस कर रहे थे. बाद में उन्हें समझ आया कि विवाद फिल्म की वजह से नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीतिक रंजिशों की वजह से हुआ था. आखिरकार उन्होंने जया बच्चन से मदद मांगी और स्थिति संभली.

तिग्मांशु धुलिया ने मांगी जया बच्चन से मदद

तिग्मांशु धुलिया ने कहा,”मुझे जया बच्चन जी को कॉल करना पड़ा. अगर उन्होंने मदद नहीं की होती तो बड़ी समस्या हो जाती. वह अमर सिंह जी को बीच में लाया और मामला सुलझ गया.” विवाद के बाद फिल्म निर्माताओं ने फिल्म में शहर का नाम हटाने का फैसला किया. उन्होंने कहा,”इसी वजह से हासिल में आपको कहीं भी इलाहाबाद का नाम नहीं मिलेगा.”

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