नई दिल्ली. म्यूजिक इंडस्ट्री में ‘बादशाह’ के नाम से मशहूर आदित्य प्रतीक सिंह एक बार फिर विवादों में हैं. उनके नए हरियाणवी गाने ‘टेट्टिरी’ ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है, बल्कि कानूनी पचड़े में भी पड़ गया है. हरियाणा पुलिस से लुकआउट नोटिस और बड़े पैमाने पर विरोध का सामना करने के बाद, पहले तो इस गाने को यूट्यूब से हटाया गया और फिर बादशाह ने एक इमोशनल वीडियो जारी कर माफी मांगी, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या कुछ सेकंड की माफी उन लाखों लोगों की भरपाई कर सकती है जिनकी संस्कृति, महिलाओं और बच्चों को उनके लिरिक्स से ठेस पहुंची है? क्या एंटरटेनमेंट के नाम पर मर्यादा तोड़ना एक बिजनेस मॉडल बन गया है?
जानबूझकर गलती और फिर ‘विक्टिम कार्ड’ खेलना
बादशाह का यह दावा, ‘मेरा किसी को चोट पहुंचाने का इरादा नहीं था,’ यकीन नहीं होता. जब कोई आर्टिस्ट गाना लिखता है, उसे रिकॉर्ड करता है, वीडियो शूट करता है और फिर उसे एडिट करके रिलीज करता है तो उसे हर शब्द और विजुअल के बारे में पता होता है. ‘टेट्टीरी’ के लिरिक्स और विजुअल्स में स्कूल ड्रेस में बच्चियों को दिखाना… ये ‘अनजाने में हुई चूक’ नहीं हो सकती. पहले, कॉन्ट्रोवर्शियल कंटेंट परोसकर व्यूज और हाइप जुटाना, और फिर जब कानून अपना असर दिखाए तो अपनी हरियाणवी जड़ों का हवाला देकर माफी मांगना. अगर बादशाह को अपनी हरियाणवी पहचान पर इतना गर्व है, तो उन्होंने रिलीज से पहले यह क्यों नहीं सोचा कि यह गाना उनकी अपनी मिट्टी की इज्जत को खराब कर रहा है?
‘रोल मॉडल’ बनने के लायक हैं बादशाह?
सबसे सीरियस बात यह है कि बादशाह आज देश के सबसे बड़े रियलिटी शो के जज और जूरी मेंबर हैं. वह स्टेज पर बैठकर यंग टैलेंट को कल्चर, मेहनत और आर्ट का पाठ पढ़ाते हैं. जब अश्लीलता या कल्चरल बेइज्जती का आरोपी जूरी में बैठता है, तो वह समाज को क्या मैसेज दे रहा है? बादशाह के इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर लाखों फॉलोअर्स हैं, जिनमें से ज्यादातर बच्चे और टीनएजर्स हैं. जब वे देखते हैं कि उनका पसंदीदा स्टार विवादित कामों में शामिल होने के बावजूद एक बड़े शो को जज कर रहा है, तो वे इसे ‘सफलता का शॉर्टकट’ मानते हैं. चैनलों और प्रोडक्शन हाउस को अब कड़ा रुख अपनाना चाहिए. समाज के नैतिक ताने-बाने को कमजोर करने वाले कलाकारों को तुरंत जूरी से हटा देना चाहिए. जूरी की जगह सिर्फ पॉपुलैरिटी के आधार पर नहीं, बल्कि कैरेक्टर के आधार पर दी जानी चाहिए.
हनी सिंह से बादशाह तक
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े रैपर ने रीजनल भाषाओं और कल्चर का मजाक उड़ाया हो. इससे पहले, यो यो हनी सिंह ने अपने लिरिक्स के जरिए भोजपुरी ऑडियंस और उनकी भाषा की बेइज्जती की थी. यह एक खतरनाक ट्रेंड बन गया है- रीजनल भाषाओं का ‘तड़का’ लगाकर उन्हें गंदे तरीके से पेश करना. चाहे हनी सिंह हों या बादशाह, इन कलाकारों ने अपनी पॉपुलैरिटी का इस्तेमाल म्यूजिक को ऊपर उठाने के बजाय उसे सस्ता करने के लिए किया है. अगर आज उन्हें नहीं रोका गया, तो कल कोई दूसरा आर्टिस्ट दूसरे राज्य की भावनाओं से खेलेगा और फिर ‘सॉरी’ कहकर चला जाएगा.
अब है एक्शन की जरूरत
हरियाणा पुलिस का जारी किया गया लुकआउट नोटिस एक अच्छा कदम है. बोलने की आजादी का मतलब यह नहीं है कि आप किसी भी कम्युनिटी की महिलाओं या बच्चों के बारे में बुरी बातें कह सकते हैं. सोशल मीडिया पर माफी मांगना एक पीआर स्टंट से ज्यादा कुछ नहीं है. असली जिम्मेदारी तब तय होगी जब उन्हें कानूनी तौर पर सजा मिलेगी और उनका कंटेंट सभी प्लेटफॉर्म से हमेशा के लिए हटा दिया जाएगा.
अनफॉलो करने का समय?
ऑडियंस को भी खुद के बारे में सोचने की जरूरत है. हम ही हैं जो इन आर्टिस्ट को ‘बादशाह’ बनाते हैं. जब तक हम उनके विवादित गानों को लाखों व्यूज देते रहेंगे, वे ऐसा ही कंटेंट बनाते रहेंगे. जिस दिन व्यूअर्स ऐसे आर्टिस्ट को अनफॉलो करना और उनके शो का बॉयकॉट करना शुरू कर देंगे, उन्हें अपनी ‘जिम्मेदारी’ का एहसास होगा. क्या हम ऐसा एंटरटेनमेंट चाहते हैं जो हमारे बच्चों के मन में हमारी नेगेटिव इमेज बनाए? बादशाह का माफी मांगना सिर्फ एक लीगल फॉर्मैलिटी है. अगर उन्हें सच में पछतावा है, तो उन्हें कुछ समय के लिए पब्लिक लाइफ और रियलिटी शोज से दूरी बना लेनी चाहिए. इसके अलावा, जो टेलीविजन नेटवर्क रेटिंग्स के चक्कर में ऐसे विवादित लोगों को ‘गुरु’ का पद देते हैं, उन्हें भी जवाब देना चाहिए. एंटरटेनमेंट की दुनिया में ‘बादशाहत’ सिर्फ हिट गानों से नहीं, बल्कि समाज की इज्जत से मिलती है. बादशाह ने ‘टेट्टीरी’ के साथ वह इज्जत खो दी है.





