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2 वर्जन, 2 अलग एहसास, वो गाना जिसने बहार बनकर ली जिंदगी में एंट्री, 30 सालों से बरकरार है रोमांटिक जादू

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90 के दशक का संगीत आज भी लोगों के दिलों में इसलिए बसता है क्योंकि उन गीतों में सच्ची मोहब्बत की सादगी और गहराई महसूस होती है. ऐसा ही एक गीत है ‘आए हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनके’, जिसने अपनी रिलीज के साथ ही प्रेम का मौसम सा बना दिया था.

2 वर्जन, 2 अलग एहसास, वो गाना जिसने बहार बनकर ली जिंदगी में एंट्रीZoom

नई दिल्ली. 1996 की सुपरहिट फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ का गाना ‘आए हो मेरी जिंदगी में’ भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम संगीत का एक अनमोल रत्न है. इसे गाया था उदित नारायण ने, जबकि इसके बोल समीर ने लिखे थे और संगीत दिया था नदीम-श्रवण की जोड़ी ने. इस गाने के दो वर्जन हैं एक उदित नारायण का और एक अलका याग्निक का और दोनों ही अपनी जगह लाजवाब हैं. आमिर खान और करिश्मा कपूर की रोमांटिक केमिस्ट्री ने इस गाने को और भी खास बना दिया. इस गाने में ‘बहार बनके’ और ‘हजार सपने’ जैसे शब्द प्रेम की गहराई को बयां करते हैं. संगीत निर्देशक नदीम-श्रवन की कैची धुनें और समीर के दिल छू लेने वाले बोल जैसे ‘आये हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनके, आंखों में तुम बसे हो सपने हजार बनकेट ने इसे 90s के सबसे यादगार लव सॉन्ग्स में शुमार कर दिया.

‘आए हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनके’ जब फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ का एक गाना आया और सीधे दिलों में उतर गया . संगीतकार नदीम-श्रवण ने जो धुन बनाई, उसे उदित नारायण और कुमार शानू जैसे दो बड़े गायकों ने अपनी आवाज दी और इन दोनों ही वर्जन ने गाने को अमर बना दिया. हालांकि, दोनों संस्करणों का एहसास बिल्कुल अलग है.

पहला एहसास: उदित नारायण का जादू

जो वर्जन फिल्म में आर्यन (आमिर खान) पर फिल्माया गया, वह उदित नारायण ने गाया. उनकी आवाज में जो मासूमियत और प्यार में डूबे एक युवा लड़के की बेचैनी है, वो कमाल है. यह वर्जन पहली नजर के प्यार, तितलियों और उस एहसास को बयां करता है जब किसी के आने से जिंदगी में रंग भर जाते हैं. यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा गाने का बोल है – ‘बहार बनके’. इसे सुनते ही आपको वो ताजी हवा का झोंका और खिले फूलों की महक महसूस होती है.

दूसरा एहसास: कुमार शानू की गहराई

वहीं, कुमार शानू का गाया वर्जन गहरे जज्बातों से भरा है. उनकी आवाज में एक अलग तरह की करुणा और गहरा प्यार है. यह वर्जन जुदाई के दर्द और किसी के बिना जीने की तड़प को बयां करता है. इसे सुनते हुए ऐसा लगता है जैसे कोई अपने महबूब की याद में डूबा जा रहा हो, उसकी कमी खल रही हो. यह प्यार का वो पहलू है, जो थोड़ा दर्द देता है, लेकिन एहसासों में गहराई भर देता है.

30 सालों से बरकरार है रोमांटिक जादू

चाहे उदित नारायण की मस्ती हो या कुमार शानू का दर्द, यह गाना आज भी उतना ही तरोताजा महसूस होता है, जितना 30 साल पहले हुआ करता था. समीर साहब के लिखे बोलों में वो ताकत है कि वो आज भी किसी के प्यार में डूबे इंसान की जुबान बन जाते हैं. नदीम-श्रवण की धुन और दो महान गायकों की आवाजों ने इस गाने को सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि प्यार का पर्याय बना दिया है. यही वजह है कि तीन दशक बाद भी यह गाना रोमांस के जादू को बिखेर रहा है.

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Shikha Pandey

शिखा पाण्डेय News18 Digital के साथ दिसंबर 2019 से जुड़ी हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. News18 Digital से पहले वह Zee News Digital, Samachar Plus, Virat Vaibhav जैसे प्रतिष्ठ…और पढ़ें

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