हालांकि ये पहली बार नहीं है जबकि उपराष्ट्रपति के चुनावों में क्रासवोटिंग के दावे हो रहे हों. पहले भी जब इस पद के लिए चुनाव हुए हैं तो क्रासवोटिंग हुई है. सियासी दल बागी सांसदों पर कार्रवाई तो करते हैं लेकिन ये अलग तरीके से होती है, क्योंकि इसमें संविधान द्वारा सियासी दलों को प्रदान किया गया व्हिप का चाबुक नहीं चलता.

उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव मंगलवार को होंगे
क्या है वोटों का समीकरण
इस चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य ही वोट कर सकते हैं. फिलहाल इन दोनों सदनों में कुल 782 सीटें हैं लेकिन 6 सीटें खाली हैं यानि 776 सांसद ही वोट दे सकते हैं. उपराष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 349 वोटों की जरूरत होगी.
इंडिया ब्लॉक का अनुमानित समर्थन – करीब 354 वोट (लोकसभा में 144 और राज्यसभा में 210)
ऐसे में एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को बहुमत प्राप्त करने में कोई मुश्किल नहीं होनी चाहिए बशर्ते कोई अप्रत्याशित क्रॉसवोटिंग नहीं हो. इस चुनावों में वोटिंग का रिजल्ट मतदान के तुरंत बाद शाम तक आ जाएगा. वोटिंग सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक होगी.
किन तीन चुनावों में व्हिप जारी नहीं होता
सीक्रेट बैलेट से होता है चुनाव
उप राष्ट्रपति का चुनाव गुप्त मतदान यानि सीक्रेट बैलेट के जरिए होता है. भारत के संविधान के आर्टिकल 66 जनप्रतिनिधि कानून,1956 के तहत उप राष्ट्रपति के चुनाव में गुप्त मतदान से होते हैं. यानि यहां कागज से वोट बैलेट बॉक्स में डाले जाते हैं. इसमें ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता. वोटिंग के समय प्रत्येक सांसद को व्यक्तिगत रूप से बूथ पर जाकर अपना वोट डालना होता है. हाथ उठाकर खुला मतदान नहीं होता.

क्या होती है क्रासवोटिंग
क्रॉसवोटिंग का अर्थ होता है जब सांसद अपनी पार्टी के निर्देश के खिलाफ वोट डालते हैं. चूंकि उप राष्ट्रपति चुनाव में कानूनी रूप से व्हिप लागू नहीं होता. लिहाजा हर सांसद स्वतंत्र रूप से वोट डाल सकता है.
क्रासवोटिंग पर क्या कार्रवाई
– सांसद को पार्टी से निष्कासित करना
– आगामी चुनाव में टिकट नहीं देना
– पार्टी पदों से हटा देना.
– ये कार्रवाई राजनीतिक फैसला होती है ना कि विधायी या न्यायिक प्रक्रिया.
2017 में क्रासवोटिंग में वैकेया नायडू जीते
वर्ष में 2017 का उप राष्ट्रपति चुनाव बीजेपी के उम्मीदवार एम. वेंकैया नायडू और कांग्रेस के ग़ुलाम नबी आज़ाद के बीच हुआ. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कुछ सांसदों ने क्रासवोटिंग करके वेंकैया नायडू को वोट दिया. विशेष रूप से कांग्रेस सांसदों को आधिकारिक तौर पर ग़ुलाम नबी आज़ाद के पक्ष में वोटिंग का आदेश था, लेकिन तब भी कई सांसदों ने स्वतंत्र रूप से वोटिंग की. करीब 30-40 सांसदों ने क्रॉसवोटिंग की. एम. वेंकैया नायडू विजयी हुए.

उपराष्ट्रपति पद का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत होता है.
2012 में ममता बीजेपी कैंडीडेट थीं, क्रासवोटिंग में हारीं
2012 के उप राष्ट्रपति चुनाव में भी यही हुआ. तब ममता बनर्जी और हामिद अंसारी उम्मीदवार थे. इस चुनाव में भी क्रॉसवोटिंग हुई. ममता बनर्जी को भाजपा ने समर्थन दिया था, लेकिन कई सांसद ममता के पक्ष में नहीं गए. कुछ तृणमूल सांसदों ने पार्टी लाइन का पालन नहीं किया और स्वतंत्र रूप से वोट डाला. हामिद अंसारी ने भारी अंतर से जीत हासिल की.
2007 में कम हुई क्रासवोटिंग
इस चुनाव में अपेक्षाकृत कम क्रॉसवोटिंग सामने आई थी. फिर भी कुछ निर्दलीय या अनुशासनहीन वोटिंग हुई. विपक्षी दलों के बीच असहमति के कारण कई सांसदों ने अपनी पार्टी की सिफारिश के खिलाफ मतदान किया. तब हामिद अंसारी कांग्रेस के उम्मीदवार थे. उनके अलावा दो उम्मीदवार और थे. बीजेपी की ओर से नजमा हेपतुल्ला और समाजवादी पार्टी की ओर से रशीद मसूद. ये दोनों हार गए थे.





