रूस के वैज्ञानिकों ने कोविड वैक्सीन की तर्ज पर ही पहली mRNA आधारित कैंसर वैक्सीन Enteromix तैयार की है. जिसका अभी क्लीनिकल या ह्यूमन ट्रायल होना बाकी है. सबसे बड़ी बात है कि इस वैक्सीन को लेकर कहा जा रहा है कि इसे अलग-अलग मरीजों के हिसाब से कस्टमाइज किया जा सकता है. जिस मरीज को जैसी जरूरत है उस हिसाब से मरीजों के कैंसर का सैंपल लेकर वैज्ञानिक इसे तैयार कर सकेंगे और फिर यह वैक्सीन कैंसर की नसें उधेड़ कर रख देगी.
डॉ. रथ ने कहा, ‘यह पहली बार नहीं है कि दुनिया में कहीं या रूस में कैंसर की वैक्सीन बनाई गई है और उसने शुरुआती ट्रायल में सफलता पाई है. कैंसर वैक्सीन को लेकर 20 सालों से रिसर्च चल रही है. इससे पहले भी कैंसर की वैक्सीन के 80 फीसदी तक सफल होने की बात सामने आ चुकी है. अब 100 फीसदी सफलता की बात की जा रही है.
सबसे बड़ी बात है कि यह ट्रायल की अभी शुरआती स्टेज है और सिर्फ 48 वॉलंटियर्स पर ट्रायल किया गया है. कोई भी वैक्सीन जब बनती है तो उसकी कई स्टेज होती हैं. किसी भी वैक्सीन को सफल तभी माना जाता है जब कि वह इंसानों पर ट्रायल के बाद 100 फीसदी परिणाम दे. इतना ही नहीं वैक्सीन को दुनिया में अलग-अलग जलवायु वाले देशों के अलग-अलग जीन्स और इम्यूनिटी वाले लोगों पर भी इस्तेमाल करके देखा जाता है कि क्या वह सच में असरदार है?
डॉ. रथ कहते हैं कि यह वैक्सीन कैंसर की सेल्स को खत्म करती है, यह काम कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी भी करती हैं लेकिन सबसे बड़ी चीज है कि क्या यह वैक्सीन कैंसर को जड़ से खत्म करेगी? अगर कैंसर जड़ से खत्म नहीं होता तो वह फिर हो जाएगा, क्योंकि कैंसर बीमारी ही ऐसी है कि वह बार-बार हो सकता है. इसलिए कैंसर का इलाज करने में कैंसर को जड़ से रोकने, इन दोनों बातों में अंतर है. तो यह वैक्सीन कैंसर का इलाज है या बचाव है? क्या है?
भारत में साल 2024 में करीब 16 लाख लोगों को कैंसर हुआ और 8.74 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई. जबकि इनमें से करीब 8 लाख लोगों में कैंसर को रोका जा सकता था. अगर लोग तंबाकू न खाएं, पैसिव स्मोकिंग न करें, प्रदूषण से बचें तो बहुत सारे मरीजों में कैंसर होगा ही नहीं. वहीं बाकी बचे कैंसर के मरीजों को इलाज से ठीक किया जा सकता है.
भारत में कितनी कारगर ?
अभी इस वैक्सीन का ट्रायल पूरी दुनिया में होना जरूरी है. अभी यह सिर्फ रूस में हुआ है और वह भी क्लीनिकल या ह्यूमन ट्रायल नहीं हुआ है. भारत के लोगों का जीन और जेनेटिक मेथड, रूस या अमेरिका के लोगों से अलग है. जब इस वैक्सीन का ट्रायल अलग-अलग तरह की जनसंख्या पर होगा, भारत में भी होगा और फिर उसका परिणाम 100 फीसदी सफल आएगा, तब कहा जा सकता है कि कैंसर की वैक्सीन कारगर है.
कैंसर का सफल इलाज, अभी फाइनल नतीजों का इंतजार
रथ ने कहा, ‘साल 1973 के आसपास कैंसर का सफल इलाज प्रतिशत 2 फीसदी था. जबकि अब यह बढ़कर 60 फीसदी हो गया है, तो ऐसा नहीं है कि इसका इलाज नहीं हो सकता, हो सकता है लेकिन सबसे बड़ी चीज है कि कैंसर दोबारा न लौटे.’
इसलिए अभी इंतजार करना चाहिए और देखना चाहिए कि रूस में इसके क्लीनिक ट्रायल के क्या नतीजे आ रहे हैं, फिर इसे बाकी देशों में भी इस्तेमाल करके परिणाम देखे जाएं.





