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INS तमाल: भारतीय नौसेना का आखिरी इंपोर्टेड वॉरशिप कारवार पहुंचेगा.

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INDIAN NAVY WARSHIP: भारतीय नौसेना के बेड़े में ताकतवर जंगी जहाजों की भरमार है. इसी में एक नया वॉरशिप और जुड़ गया है. रूस के कलिनिनग्राद में INS तमाल पर भारतीय ध्वज लहराया और अब यह घर पहुंच रहा है. INS तमाल विद…और पढ़ें

10 सितंबर को घर पहुंच रहा है INS तमाल, देश का आखिरी इंपोर्टेड वॉरशिप हैघर पहुंच रहा है तमाल
INDIAN NAVY WARSHIP: भारतीय नौसेना का आखिरी इंपोर्टेड शिप INS तमाल घर पहुंच रहा है. बुधवार को कारवार नेवल बेस में INS तमाल लंगर डालेगा. 1 जुलाई 2025 को ही भारतीय नौसेना में इसे शामिल किया गया था. रूस के कलिनिनग्राद से भारत तक के लगभग 2 महीने के सफर में INS तमाल कई मित्र देशों के नेवल बेस से होते हुए आया है. कमीशनिंग के बाद रूस के कैलिनिनग्राद से सेंट पीटर्सबर्ग, कैसाब्लांका (मोरक्को), नेपल्स (इटली), सौदा बे (ग्रीस), जेद्दा (सऊदी अरब), सलालाह (ओमान) होते हुए 10 सितंबर को कारवार पहुंच रहा है. यह दुनिया का सबसे घातक मल्टी रोल स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है, जिसे रूस के यांतर शिपयार्ड में तैयार किया गया है. इस वॉरशिप से दुनिया की सबसे खतरनाक एंटी शिप मिसाइल ब्रह्मोस को दागा जा सकेगा.

चीन और पाकिस्तान के डर की नई वजह
तमाल एक तरह की तलवार को कहा जाता है. उसी तलवार की धार जैसी इस वॉरशिप की मार भी होने वाली है. खास बात यह है कि यह गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक के समुद्री इलाके की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगा. नौसेना के वेस्टर्न नेवल कमांड जिसे स्वॉर्ड आर्म के नाम से जाना जाता है, यह उसका हिस्सा है। वेस्टर्न सी बेड पर तलवार और तेग क्लास के अब 8 स्टेल्थ फ्रिगेट्स की तैनाती होगी. तमाल समंदर में 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से मूव कर सकता है. इससे एंटी शिप ब्रह्मोस मिसाइल फायर किया जा सकता है. तमाल 3000 किमी तक की दूरी एक बार में तय कर सकता है. एंटी सबमरीन वॉरफेयर के लिए भी इसे खास तौर पर डिजाइन किया गया है. दुश्मन की सबमरीन के हमलों से निपटने के लिए एंटी सबमरीन रॉकेट्स और टॉरपीडो भी इस वॉरशिप में मौजूद हैं. इस वॉरशिप पर एक हेलीकॉप्टर को भी तैनात किया जा सकता है। इसका वजन 3900 टन है.

तमाल है आखिरी इंपोर्टेड वॉरशिप
तलवार क्लास का यह फॉलोऑन प्रोजेक्ट है. INS तुशिल तलवार क्लास के तीसरे बैच का पहला और तमाल दूसरा वॉरशिप है. भारतीय नौसेना में तलवार क्लास के वॉरशिप 2003 से शामिल होना शुरू हो गए थे. अब तक इस क्लास के 6 जंगी जहाज भारतीय नौसेना में समुद्री सुरक्षा में लगे हैं. इन 6 स्टेल्थ फ्रिगेट्स में से 4 को ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस किया जा चुका है, जबकि बाकी दो को ब्रह्मोस से लैस करने का काम जारी है. तीन साल से ज्यादा से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते माना जा रहा था कि इसकी डिलिवरी में देरी हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इन वॉरशिप में यूक्रेन में निर्मित इंजन लगे हैं. रूस और यूक्रेन के बीच जंग से पहले ही वॉरशिप के लिए इंजन डिलिवर हो चुके थे.

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10 सितंबर को घर पहुंच रहा है INS तमाल, देश का आखिरी इंपोर्टेड वॉरशिप है

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