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बीआरओ ने खोली जिंदगी की राह, जम्मू की गुलाबगढ़-चाशोती सड़क 13 दिन बाद फिर जुड़ी

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लगभग दो हफ्ते हम बिल्कुल कट गए थे, बीआरओ ने हमारे लिए देवदूत की तरह काम किया. उनकी मशीनें दिन-रात चलती देख हमें उम्मीद मिलती थी, आज हम फिर जुड़ गए हैं, हम सब बहुत आभारी हैं

बीआरओ ने खोली जिंदगी की राह, जम्मू की गुलाबगढ़-चाशोती सड़क 13 दिन बाद जुड़ी
चाशोती, किश्तवाड़, जम्मू: भारी बारिश और भूस्खलन से टूटी गुलाबगढ़-चाशोती सड़क को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की 118 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी (RCC) ने फिर से चालू कर दिया है. मेजर जीवितेश रजोरा की अगुवाई में इस सड़क को 13 दिन की लगातार मेहनत के बाद, आम यातायात के लिए खोल दिया गया. 26 और 27 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से यह रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था. इसके कारण जम्मू डिवीजन के कई दूरदराज़ गांवों का संपर्क टूट गया था. लोगों को दवाई, राशन और ज़रूरी सामान तक नहीं मिल पा रहा था.

118 आरसीसी की टीम ने चाशोती की ओर से काम शुरू किया. खतरनाक पहाड़ियों और मलबे से जूझते हुए जवानों और मशीनों ने 14 किलोमीटर लंबा हिस्सा साफ किया. दूसरी ओर, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के कर्मचारियों ने गुलाबगढ़ की तरफ से 7 किलोमीटर सड़क खोली. इस तरह दोनों ओर से मिलकर 21 किलोमीटर लंबा बंद रास्ता दोबारा गाड़ियों के लायक बना दिया गया.

बीआरओ एक अधिकारी ने बताया कि, “शुरुआती दिन सबसे मुश्किल थे. हर वक्त नए भूस्खलन का खतरा बना हुआ था. लेकिन हमारा काम देश की जीवन रेखाओं को चालू रखना है. गांववाले पूरी तरह कट गए थे, उसी से हमें हौसला मिला और हमारी टीम दिन-रात जुटी रही.”

Source: Ministry of Defence / भूस्खलन से टूटी गुलाबगढ़-चाशोती सड़क को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की 118 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी (RCC) ने फिर से चालू कर दिया

सड़क खुलते ही गांव के लोग खुशी से झूम उठे. एक ग्रामीण ने कहा, “लगभग दो हफ्ते हम बिल्कुल कट गए थे. बीआरओ ने हमारे लिए देवदूत की तरह काम किया. उनकी मशीनें दिन-रात चलती देख हमें उम्मीद मिलती थी. आज हम फिर जुड़ गए हैं, हम सब बहुत आभारी हैं”

यह उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि कठिन से कठिन हालातों में भी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन केवल सेना की रणनीतिक ज़रूरतें पूरी करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जीवन रक्षक और संकटमोचक की भूमिका निभाती है. बीआरओ का मूलमंत्र – ‘श्रमेण सर्वं साध्यम्’ (मेहनत से सब संभव है) – इस अभियान में एक बार फिर साकार हुआ. यह नारा सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उनकी कार्यशैली और समर्पण का जीवंत प्रमाण है, जो कठिन पर्वतों और प्राकृतिक आपदाओं को भी परास्त कर देता है.

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Mohit Chauhan

Mohit Chauhan brings over seven years of experience as an Editorial Researcher, specializing in both digital and TV journalism. His expertise spans Defense, International Relations, and Strategic Military Affai…और पढ़ें

Mohit Chauhan brings over seven years of experience as an Editorial Researcher, specializing in both digital and TV journalism. His expertise spans Defense, International Relations, and Strategic Military Affai… और पढ़ें

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