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सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की “गर्दन” है, जो उत्तर-पूर्वी राज्यों को जोड़ता है. चीन और बांग्लादेश के कारण यह क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है.
सिलीगुड़ी कॉरिडोरयह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी के पास से गुजरता है और भारत के मुख्य हिस्से को अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिलीगुड़ी और त्रिपुरा से जोड़ता है. यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील है. एक ओर बांग्लादेश और नेपाल की सीमाएं हैं, जबकि दूसरी ओर चीन के तिब्बत क्षेत्र का चुम्बी वैली, सिक्किम और भूटान के डोकलाम ट्राई-जंक्शन के पास स्थित है. इसलिए कोई भी बाहरी ताकत इस रास्ते को बाधित कर भारत की संप्रभुता और संपर्क व्यवस्था को कमजोर कर सकती है.
हाल के दिनों में यह कॉरिडोर फिर चर्चा में आया, जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के चीन दौरे के बाद कई रणनीतिक विश्लेषकों ने इसे भारत के लिए खतरे के रूप में देखा. चीन और अन्य शक्तियां बार-बार इस क्षेत्र को निशाना बनाने की कोशिश कर रही हैं ताकि भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों तक आपूर्ति और सैन्य सहायता पहुंचाने में बाधा आए. यहां से होकर देश की सबसे महत्वपूर्ण सड़क और रेल लाइनें गुजरती हैं. भारतीय सेना के लिए यह मार्ग आपूर्ति, तैनाती और सुरक्षा का मुख्य आधार है. अगर यह मार्ग बंद हो जाए तो सेना और नागरिकों दोनों के लिए गंभीर संकट पैदा हो सकता है। इसलिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं.
मल्टीमॉडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट पर काम
भारत सरकार वैकल्पिक मार्ग बनाने पर भी काम कर रही है. इसके तहत कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. इस परियोजना के माध्यम से कोलकाता बंदरगाह से म्यांमार के सिटवे बंदरगाह होते हुए कलादान नदी पार कर सड़क मार्ग से मिजोरम तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी. इसमें जल, नदी और सड़क – तीनों मार्गों का उपयोग होगा ताकि किसी भी परिस्थिति में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र का संपर्क न टूटे. इसके अलावा भारत सैन्य तैनाती, सीमा सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है. ड्रोन, उपग्रह और विशेष बलों के माध्यम से इस क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत की जा रही है. विशेषज्ञ मानते हैं कि “चिकन नेक” केवल भौगोलिक मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा, आर्थिक संपर्क और सामरिक रणनीति का केंद्रीय बिंदु है. यदि इसे सुरक्षित रखा गया तो भारत की एकता और क्षेत्रीय सहयोग मजबूत रहेगा. वहीं, इसकी कमजोरी देश की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है. यही कारण है कि दुश्मन बार‑बार इसे काटने की कोशिश करता है और भारत इसे “गर्दन” की तरह संरक्षित रखने पर लगातार ध्यान दे रहा है.
Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें
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Delhi,Delhi,Delhi
September 10, 2025, 20:12 IST





