नीले समंदर पर रखी जाएगी यहां से नजर
नीला समंदर जितना बड़ा है, उतनी ही बड़ी चुनौती होती है हर इलाके पर नजर रखना. लेकिन भारतीय नौसेना ना सिर्फ अपने समुद्री क्षेत्र की निगरानी करती है बल्कि मित्र देशों के साथ जानकारी भी साझा करती है. ऐसा सेंटर दिल्ली NCR के गुरुग्राम में साल 2018 से ही मौजूद है. इसका नाम है इनफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर- इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR). इसका मकसद है हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में मेरिटाइम डोमेन अवेयरनेस (Maritime Domain Awareness-MDA) को बढ़ाना और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना. इस सेंटर के इंफॉरमेशन मैनेजमेंट एंड एनालिसिस सेंटर (IMAC) के मॉनिटरिंग रूम में हिंद महासागर क्षेत्र में मूव करने वाले हर शिप को मॉनिटर किया जा सकता है. अगर किसी भी तरह का खतरा या फिर कोई दुर्घटना दिखती है तो तुरंत उसकी जानकारी संबंधित कमांड को भेज दी जाती है. यहा से तटीय इलाकों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया जाता है. यह सेंटर नेवी के सभी बेस के साथ सैटेलाइट के जरिए कनेक्ट है और किसी भी तरह की जानकारी को तुरंत रीले कर सकता है. लाइव टाइम मॉनिटरिंग भी की जाती है. यह सेंटर इंफॉरमेशन मैनेजमेंट एंड एनालिसिस सेंटर (IMAC) में स्थित है.
हिंद महासागर क्षेत्र से दुनिया का 80% से ज्यादा तेल और 75% समुद्री व्यापार होता है, जो कि रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण है। IFC-IOR इस क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. INS अरावली में मौजूद IFC-IOR का मुख्य काम है समुद्री डकैती, आतंकवाद, तस्करी, अवैध मछली पकड़ने (IUU Fishing), और मानव तस्करी जैसे गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना. यह सेंटर सूचनाओं के आदान-प्रदान, समन्वय और विशेषज्ञता के जरिए शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र की दिशा में काम करता है. 25 देशों के 43 मल्टीनैशनल सेंटर के सिस्टम की लाइव फीड यहां मिलती है. IFC-IOR ने 28 देशों के साथ 76 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय संपर्क स्थापित किए हैं. इसमें 12 इंटरनेशनल लायजिंग ऑफिसर (International Liaison Officers – ILO) शामिल हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हैं.
IMAC की नजर से कुछ नहीं छिपता
इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड एनालिटिक सेंटर (आईमेक) में बड़ी सी स्क्रीन पर समंदर में हो रही हर हरकत और गतिविधियों को मॉनिटर किया जाता है. आईमेक की स्क्रीन पर भारतीय नौसेना के सिस्टम के जरिए मिल रही फीड के साथ ही दूसरे देशों से मिल रही फीड पर लगातार नजर रखी जाती है.
– आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस और बिग डेटा अनालिसिस के जरिए चंद सेकंड में पता चल जाता है कि हमारे समंदर में कितने जहाज होते हैं और क्या कोई अतिरिक्त गतिविधि समंदर में दिख रही है.
– शिप अगर झूठा ट्रांसमिशन दिखाकर (स्पूफिंग) कोई हरकत करता है उसे भी IMAC पकड़ लेगा है.
– जमीन और स्पेस बेस्ड 89 ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम भारतीय समंदर पर चौकसी कर रहे हैं
– 20 मीटर से बड़ी कोई भी बोट या स्टीमर होता है उसका अपना आइडेंटिफिकेशन नंबर होता है.
– हमारे समुद्री इलाके में करीब 2 लाख 20 हजार से ज्यादा बोट हैं जो 20 मीटर से कम की साइज की हैं.
– बोट पर लगाए गए ट्रांसपोडर सिग्नल सेटेलाइट के जरिए मिलेंगे। इन्हें भी फिर आईमेक में देख सकेंगे





