भारत » Passport News: पासपोर्ट पर तलाकशुदा पति का नाम? दूसरी शादी के बाद हसबैंड के नाम को लेकर मच बवाल, महिला पहुंच गई हाईकोर्ट और… – Divorced husband Name On Passport Punjab and Haryana High Court Says It is No Ground To Cancel It

Passport News: पासपोर्ट पर तलाकशुदा पति का नाम? दूसरी शादी के बाद हसबैंड के नाम को लेकर मच बवाल, महिला पहुंच गई हाईकोर्ट और… – Divorced husband Name On Passport Punjab and Haryana High Court Says It is No Ground To Cancel It

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High Court Order on Passport: पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महिला के पासपोर्ट को लेकर आदेश दिया है. यह महिला पासपोर्ट रद्द करने के फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंची थी क्योंकि उसने गलती से तलाकशुदा पति का नाम पासपोर्ट पर लिखवा दिया था. जानें कोर्ट ने दिया क्या आदेश….

पासपोर्ट पर तलाकशुदा पति का नाम? HC पहुंची महिला, जज के सामने दी ऐसी दलीलमहिला के पासपोर्ट को लेकर हाईकोर्ट ने दिया क्या आदेश
नई दिल्ली. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महिला के पासपोर्ट को रद्द करने के आदेश को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि उसके पिछले पति का नाम गलती से लिखने को पासपोर्ट अधिनियम,1967 के तहत ‘महत्वपूर्ण जानकारी को छुपाना” नहीं माना जा सकता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट को जब्त या रद्द करने की शक्ति विवेकाधीन है और इसे उस वास्तविक गलती के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता जो दस्तावेज जारी करने को प्रभावित नहीं करती.

यह निर्णय न्यायमूर्ति हर्ष बंजर की एकल-न्यायाधीश पीठ द्वारा दिया गया, जिसमें नवप्रीत कौर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की गई थी, जिन्होंने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, चंडीगढ़ द्वारा उनके पासपोर्ट को रद्द करने और मुख्य पासपोर्ट अधिकारी द्वारा उनकी अपील को खारिज करने को चुनौती दी थी.

क्या है मामला?

नवप्रीत कौर का साल 2011 में अपने पहले पति डॉ सिद्धार्थ नरूला से तलाक हो गया था. जब उन्होंने साल 2015 में नए पासपोर्ट आवेदन किया, तो डॉक्यूमेंट में ‘अनजाने में गलती’ और ‘ट्रैवल एजेंट’ ने डॉ नरूला का नाम उनके पति के रूप में लिख दिया. यह गलती साल 2023 में उनके दूसरे विवाह के बाद सामने आई, जब उन्होंने अपने पति का नाम अपडेट करने के लिए फिर से आवेदन किया. उनके दूसरे पति के नाम अपडेट करने का आवेदन देखकर मामले की जांच की. 29 जनवरी 2025 को पासपोर्ट कार्यालय ने पासपोर्ट अधिनियम की धारा 10(3)(b) के तहत महिला को गलत जानकारी/छुपाई गई जानकारी का हवाला देते हुए उनका पासपोर्ट को रद्द कर दिया. याचिकाकर्ता की अपील भी खारिज कर दी गई, जिसमें अपीलीय प्राधिकरण ने उन्हें नया पासपोर्ट आवेदन करने की स्वतंत्रता दी.

क्या था कोर्ट के सामने सवाल?

कोर्ट के समक्ष मुख्य कानूनी सवाल था कि क्या याचिकाकर्ता के पिछले पति का नाम पासपोर्ट आवेदन में ‘पति का नाम’ कॉलम में उल्लेख करना महत्वपूर्ण जानकारी को छुपाना या गलत जानकारी देना माना जा सकता है ताकि 1967 अधिनियम की धारा 10(3)(b) को आकर्षित किया जा सके…? न्यायमूर्ति हर्ष बंजर ने पासपोर्ट अधिनियम के प्रावधानों की जांच की. कोर्ट ने देखा कि धारा 10(3)(b) के तहत शक्ति ‘विवेकाधीन’ है. कोर्ट ने तर्क दिया कि जानकारी को ‘महत्वपूर्ण’ माना जाने के लिए उसकी छुपाई गई जानकारी ‘पासपोर्ट प्राप्त करने के उद्देश्य से’ होनी चाहिए और ऐसी होनी चाहिए कि पासपोर्ट प्राधिकरण को अधिनियम की धारा 6 के तहत पासपोर्ट जारी करने से इनकार करने के लिए प्रेरित करे.

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा…

कोर्ट ने पाया कि अधिनियम की धारा 6(2) जो पासपोर्ट को अस्वीकार करने के आधारों को रेखांकित करती है कि आवेदक की वैवाहिक स्थिति के संबंध में जानकारी को छुपाना या गलत जानकारी देना शामिल नहीं है. निर्णय में कहा गया कि स्पष्ट रूप से, 1967 अधिनियम की धारा 6 की उप-धारा (2) में आवेदक की वैवाहिक स्थिति के संबंध में जानकारी को छुपाने या गलत जानकारी देने का उल्लेख नहीं है. कोर्ट ने पासपोर्ट नियम, 1980 का भी संदर्भ दिया, जो ऐसी गलतियों पर एक सूक्ष्म दृष्टिकोण प्रदान करता है. नियमों की अनुसूची III वैवाहिक स्थिति/पति का नाम आदि के संबंध में जानकारी को अनजाने में छुपाने को एक मामूली अपराध के रूप में वर्गीकृत करती है, जिसके लिए 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. कोर्ट ने देखा कि यह प्रावधान इंगित करता है कि ऐसी गलती को पासपोर्ट रद्द करने के योग्य गंभीर अपराध नहीं माना जाता.

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पासपोर्ट पर तलाकशुदा पति का नाम? HC पहुंची महिला, जज के सामने दी ऐसी दलील

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