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Myanmar Humanitarian Corridor: बांग्लादेश में यूनुस सरकार पाकिस्तान के ISI और जमात के हाथों में खेल रही है. रोहिग्या उनके लिए सबसे आसान जरिया है भारत में गड़बड़ी फैलाने के लिए. म्यांमार ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर से इस साजिश को और ताकत मिल सकती है
म्यांमार ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर बन सकता है SPY HUBकॉरिडोर भारत के लिए बन सकता है नई चुनौती
इस कॉरिडोर के जितने फायदे हैं, उससे कहीं ज्यादा नुकसान दिखाई देने लगा है. लाखों लोगों की जान तो बचा सकता है, रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी में मदद कर सकता है, लेकिन इसके नुकसान भारत के लिहाज से काफी हैं. रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल अशोक कुमार (सेवानिवृत्त) का मानना है कि इस कॉरिडोर का अस्तित्व में आना प्रस्तावित बांग्लादेश चुनाव के बाद बनने वाली सरकार पर निर्भर करेगा. मेजर जनरल अशोक कुमार का कहना है कि अगर यह ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर बनता है तो भारत के लिए कई चुनौतियां बढ़ सकती हैं. इस कॉरिडोर के जरिए पूरा इलाका जासूसी का एक बड़ा केंद्र बन सकता है. इसके अलावा ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर में अमेरिकी NGO और चीन समर्थित गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई बढ़ सकती है. ऐसा भी हो सकता है कि दोनो देश अलग-अलग विद्रोही गुटों को समर्थन देने के चलते प्रॉक्सी वॉर की भी नौबत आ सकती है. मेजर जनरल अशोक कुमार ने इस बात की भी आशंका जताई है कि इस कॉरिडोर के जरिए हथियारों और ड्रग्स की तस्करी आसानी से हो सकती है. हथियार रोहिंग्या के जरिए पहले म्यांमार से बांग्लादेश और फिर बांग्लादेश के जरिए भारत के नॉर्थ ईस्ट के विद्रोही गुटों तक पहुंच सकते हैं. इसी तरह से बांग्लादेश के आतंकी संगठन और जमात इसी कॉरिडोर का इस्तेमाल कर म्यांमार रूट से उत्तर पूर्व के राज्यों तक अपनी पहुंच बना सकते हैं.
म्यांमार में ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर एक सुरक्षित मार्ग है, जिसे संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रस्तावित किया गया है. यह मुख्य रूप से 2021 के म्यांमार में तख्तापलट, अराकान आर्मी (AA) और म्यांमार सैन्य सरकार (जुंटा) के बीच गृहयुद्ध, 2017 के रोहिंग्या संकट, और मार्च 2025 के भूकंप के चलते पैदा हुए मानवीय संकट को एड्रेस करने के लिए है. म्यांमार में जुंटा और विद्रोही गुटों के बीच की जंग ने बांग्लादेश के जरिए भारत के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.
रोहिंग्या के पलायन पर UNHCR जारी कर चुका है बयान
यूनाइटेड नेशन हाई कमिशनर फॉर रिफ्यूजी (UNHCR) की तरफ से एक बयान जारी किया गया था. इस बयान में कहा गया था कि म्यांमार के अंदर हिंसक टकराव के तेज़ होने और हालात बिगड़ने के चलते हज़ारों लोग सुरक्षा की तलाश में बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के भीड़भाड़ वाले शिविरों में पहुँच रहे हैं. UNHCR के प्रवक्ता बाबर बलोच ने जिनेवा में पत्रकारों को बताया था कि 2017 के बाद से बांग्लादेश में पहुँचने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों का यह सबसे बड़ा पलायन है. महज 18 महीने के अंदर 1.5 लाख रोहिंग्या बांग्लादेश पहुंचे हैं.
September 13, 2025, 00:23 IST





