इस लाइन पर 48 टनल और छोटे-बड़े मिलकर 153 ब्रिज हैं. टनल की कुल लंबाई करीब 20 किमी. है. खास बात यह भी है कि एक ब्रिज कुतुबमीनार से 42 मीटर ऊंचा है. यह रेल लाइन देश की सबसे चैलेंजिंग लाइन श्रीनगर कटरा से कम नहीं थी. जो उन पहाड़ी इलाकों में बनायी गयी है, जहां खड़ी ढलानें और जटिल भू-संरचना( टोपोग्राफी) है. निर्माण में लगातार आ रहे चैलेंज की वजह से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ गयी है. पहले 5021 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 8000 करोड़ रुपये हो गई.
1- भूकंप क्षेत्र 5 में निर्माण: मिजोरम भूकंप के लिहाज से जोन पांच में आता है, जो सबसे संवेदनशील क्षेत्र है. इसलिए रेल ट्रैक, टनल और ब्रिज को भूकंपरोधी तकनीक के साथ बनाया गया है, जो तकनीकी और लागत दोनों के लिहाज से कठिन है.
3- पहाड़ खोदकर टनल बनाना: प्रोजेक्ट में 48 टनल बनाई गईं हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में टनल खोदना, उनकी स्टेबिलिटी तय करना और वेंटिलेशन की व्यवस्था करना टेक्निकल रूप से मुश्किल था. पहाड़ी क्षेत्रों में मशीनरी, मैटेरियल और श्रमिकों को पहुंचाना निर्माण स्थल तक पहुंचाना आसान नहीं था. सड़क मार्ग न होने से निर्माण स्थल तक लॉजिस्टिक्स पहुंचाना कठिन था.
5-पर्यावरणीय और सामाजिक चैलेंज: हरियाली और संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण से पर्यावरण को नुकसान न हो, इसका ध्यान रखना जरूरी था. साथ ही, स्थानीय लोगों के साथ कोआर्डीनेशन और भूमि अधिग्रहण भी चैलेंजिग रहा है.
जिरीबाम इंफाल और दीमापुर जुबजा (कोहिमा) तक रेल लाइन तैयार हो रही है, जल्द ही इस पर भी ट्रेन चलने लगेगी. अरुणाचल, त्रिपुरा और मणिपुर पहले से रेल लाइन से कनेक्ट हो चुके हैं. आइजोल चौथी राजधानी बनेगी.





