उन्होंने कहा, “आज भूपेन दा भले ही शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज लोगों को ऊर्जा देती है. उनके गीत भारत को एकता के सूत्र में पिरोते हैं. उनका संगीत ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को समेटे हुए है. वह भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में रचे-बसे थे.”
पीएम मोदी ने देश के विकास में सांस्कृतिक संपर्क के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर की प्रगति के बिना हम देश के विकास की कल्पना नहीं कर सकते. केंद्र सरकार सांस्कृतिक संपर्क पर जोर दे रही है, जिससे पूरा देश पूर्वोत्तर के इतिहास और विरासत से परिचित हो रहा है.”
उन्होंने कहा, “मैं असम में भूपेन हजारिका के जन्म शताब्दी समारोह का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं.” समारोह की शुरुआत 1,200 कलाकारों की ओर से हजारिका को दी गई 18 मिनट की संगीतमय श्रद्धांजलि के साथ हुई. इसके तहत कलाकारों ने असमिया, बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी में हजारिका के 14 सदाबहार गीतों को प्रस्तुत किया.
समारोह में हजारिका के जीवन पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई. राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने ‘मुगा’ गमोसा, पारंपरिक ‘होराई’ और हजारिका का चित्र भेंट करके मोदी का स्वागत किया. समारोह में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, असम के मंत्री, भाजपा सांसद, विधायक और सरकारी अधिकारी उपस्थित थे. हजारिका के बेटे तेज, परिवार के सदस्य और उनसे जुड़े अन्य लोग भी समारोह में शामिल हुए.





