भारत » भूलभुलैया नहीं लगेगा एम्स, न भटकेंगे मरीज, हर कदम पर मदद करेगा द‍िशा ऐप internal navigation disha app in aiims delhi to help patients

भूलभुलैया नहीं लगेगा एम्स, न भटकेंगे मरीज, हर कदम पर मदद करेगा द‍िशा ऐप internal navigation disha app in aiims delhi to help patients

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एम्स दिल्ली भले ही इलाज के मामले में दुनिया के सबसे अच्छे अस्पतालों में शामिल हो लेकिन बहुत सारे मरीज यहां भारी भीड़ और भूलभुलैया की तरह फैले इस अस्पताल में जाने से घबरा जाते हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि एक बीमारी के इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को जांचों के दौरान ऐसी कई अन्य परेशानियां निकल आती हैं, जिनके लिए कई विभागों में जाना पड़ता है. वहीं नई-ओपीडी से लेकर पुरानी ओपीडी, इमरजेंसी, डायग्नोस्टिक फैशिलिटीज के लिए भी मरीज को एम्स के अंदर अलग- अलग ब्लॉकों में जाना होता है. ऐसे में मरीज को बार-बार रास्ते पूछने पड़ते हैं. लेकिन अब से इस परेशानी से निजात मिलने जा रही है.

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के लिए हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दिशा नाम का एक नया एप्लीकेशन लॉन्च किया है जो अस्पताल परिसर में मरीजों को रास्ता ढूंढने में मदद करेगा. सबसे खास बात है कि इस ऐप के लिए इंटरनेट की भी जरूरत नहीं है और आप हिंदी या अंग्रेजी किसी भी भाषा में इसे इस्तेमाल कर सकते हैं. यह मरीजों को ओपीडी, लैबोरेटरीज, फार्मेसी, अपॉइंटमेंट विंडो, डायग्नोस्टिक सेंटर्स आदि को खोजने में मदद करेगा.

बता दें कि एम्स नई दिल्ली में रोजाना करीब 15 से 16000 मरीज आते हैं. ये सभी दिल्ली, हरियाणा, यूपी, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश से ही नहीं होते बल्कि दूरदराज के अन्य राज्यों से भी होते हैं. चूंकि एम्स सिर्फ एक अस्पताल नहीं है बल्कि एक यूनिवर्सिटी से भी बड़ा मेडिकल इंस्टीट्यूट है, ऐसे में 213 एकड़ में फैले एम्स में मरीजों को अलग-अलग मेडिकल फेशिलिटी तक पहुंचने में काफी परेशानी होती है.

इन मरीजों को रास्ता पता नहीं होता ऐसे में कई बार ये भटक जाते हैं या पूछकर भी सही समय पर नहीं पहुंच पाते हैं. हालांकि अब अस्पताल परिसर के लिए जारी किए गए इस नेविगेशन एप से ऐसी हर मुश्किल आसान हो जाएगी. दिशा ऐप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पर आधारित इनडोर नेविगेशन सिस्टम है, जो एम्स के अंदर मौजूद सभी जगहों का रास्ता बताएगा.

दिशा ऐप में लगी है ये तकनीक
एम्स में रास्ता ढूंढने के लिए जगह-जगह सेंसर लगाए गए हैं, जो आपको लोकेशन बताकर उस जगह की सही दिशा दिखाते है. इसमें डिजिटल नक्शे होते हैं, जिनमें पूरे अस्पताल की मंजिलों और जरूरी जगहों की जानकारी दी गई है. यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल करके सबसे छोटा या आसान रास्ता बताता है, ताकि मरीजों या उनके परिजनों को कोई परेशानी न हो.

इस बारे में एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा, ‘ये ऐप हमारे विजन का प्रतीक है, जिसमें हम एआई और आईओटी तकनीक का उपयोग करके मरीज-केंद्रित सेवाएं दे रहे हैं. इससे एम्स स्मार्ट हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर में अग्रणी बनेगा.’

दिव्यांगों को मिलेगी कम भीड़ वाले रास्ते की जानकारी
ऐप में व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले मरीजों के लिए अलग सुविधा दी गई है. उन्हें सबसे आसान रास्ते की जानकारी दी जाएगी, ताकि वो बिना भीड़-भाड़ के आसानी से पहुंच सकें. इसमें टर्न-बाय-टर्न आवाज और विज़ुअल नेविगेशन भी है, जो कई भाषाओं में जानकारी देंगे. यह सिस्टम कई मंजिलों और इमारतों के बीच भी रास्ता दिखा सकता है. इसके जरिए आप आसानी से डॉक्टर, लैब, फार्मेसी, बिलिंग काउंटर और अन्य सुविधाओं को खोज सकते हैं. यह ज्यादा भीड़ वाली जगह की भी जानकारी देता है.

एम्स मीडिया सेल में पीआईसी प्रोफेसर रीमा दादा ने बताया कि अस्पताल पहली बार आने वाले आगंतुकों या बुजुर्ग मरीजों के लिए अक्सर डराने वाले लग सकते हैं. एम्स दिशा यह सुनिश्चित करेगा कि जो भी व्यक्ति एम्स में आए, उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो. यह स्वास्थ्य सेवाओं को एक मानवीय रूप देने के साथ-साथ उन्हें अधिक सुलभ और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक अहम कदम है.

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