आज जब पीएम मोदी 75 साल के हो रहे हैं, उनकी राजनीतिक ताकत अभी भी सबसे ऊपर है। उनकी पार्टी मुश्किल राज्य में चुनाव लड़ रही है, और सबकी उम्मीद एक ही शख्स पर- नरेंद्र मोदी। वो व्यक्ति जो हार को जीत में बदल सकता है। बीजेपी के कई सर्वे बताते हैं कि चुनाव के आखिरी दौर में जब मोदी कैंपेनिंग पर आते हैं, तो पार्टी की जीत पक्की हो जाती। बड़े चुनावों में- जैसे 2018 में त्रिपुरा की पहली जीत, 2024 में ओडिशा, या 2017 और 2022 में उत्तर प्रदेश की लगातार सफलताएं। इन सब में “मोदी का असर” साफ दिखता है। मैंने हाल के चुनावों में जमीनी स्तर पर देखा कि पार्टी लीडर अपने इलाके में मोदी की रैली लगवाने के लिए कैसे लड़ते हैं, क्योंकि यह जीत का आसान रास्ता माना जाता है।
निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बताया कि पीएम मोदी लंबे समय से उनसे “जीएसटी कट” पर काम करने को कह रहे थे, ताकि आम आदमी को राहत मिले। एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया, कि आयुष्मान भारत मेडिकल इंश्योरेंस को 70 साल से ऊपर के सभी लोगों के लिए बढ़ाने का फैसला भी जमीनी बातों से आया। पीएम को पता चला कि मध्यम वर्ग के बुजुर्गों को प्राइवेट इंश्योरेंस मिलना या खरीदना मुश्किल है, और वे बच्चों पर बोझ नहीं डालना चाहते। यह उनकी ही उम्र के लोगों के प्रति उनकी दया थी, क्योंकि PM खुद 70 से ऊपर हैं।
लेकिन PM मोदी को सिर्फ सफलता या जमीनी जुड़ाव ही इतना खास नहीं बनाता। उनकी असली ताकत है, झटकों से उबरना और रास्ते की रुकावटों को हटाना। चाहे 2002 गुजरात दंगों के बाद उन पर काफी राजनीतिक दवाब बनाया गया। यहां तक कि इस मामले को राजनीतिक रंग दे भी दिया गया। इसी तरह 2012-2014 में उन्हें जानबूझकर कानूनी जाल में फंसाने की कोशिश की गई, ताकि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री न बनें। एक पूर्व सीबीआई चीफ (जो अब नहीं हैं) ने मुझे बताया था कि कैसे उन्होंने कुछ लोगों की चाल नाकाम की, जो मोदी को झूठे क्रिमिनल केस में फंसाना चाहते थे। यहां तक कि मोदी के सबसे करीबी, अमित शाह से CBI ने कहा था कि मोदी का नाम ले लो तो रिहा हो जाओगे। आप समझ सकते हैं कि विरोध की ऐसी कड़वी राजनीति किसी को भी तोड़ देती, लेकिन नरेंद्र मोदी नहीं टूटे।
ये मजबूती आती कहां से है?
यह मजबूत चरित्र आरएसएस के दिनों से आता है। वहां उन्होंने मुश्किल हालात में जीना और असंभव चुनौतियों का सामना करना सीखा। क्या आप जानते हैं कि 29 साल की उम्र में आरएसएस वर्कर नरेंद्र मोदी ने 1979 में गुजरात के मोरबी में बाढ़ वाले इलाके में एक महीने से ज्यादा बिताए? डैम टूटने से तबाही मच गई थी, और मोदी ने छह हफ्ते वहां कीचड़ साफ किया, मरे हुए जानवरों और सड़ते शवों को हटाया, और परिवारों के लिए अंतिम संस्कार किए। यह उनकी पहली आपदा प्रबंधन की मिसाल थी।
इमरजेंसी के दिनों में गिरफ्तारी से बचने के लिए नरेंद्र मोदी ने अक्सर सिख का रूप धारण किया। उनका भेष इतना सही था कि करीबी लोग भी पहचान न पाते। पुलिस फाइलों में मोदी का नाम बड़ा था, और गिरफ्तारी से बचना बड़ी चुनौती थी। लेकिन उन्होंने मौका लपका। वे एंटी-इमरजेंसी किताबों का प्रकाशन करके उन्हें गुजरात भर में बांटने का काम खुद संभालते थे।
75 की उम्र में, और 11 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद, मोदी को आराम का मन नहीं है। वे अटल हैं और नई चुनौतियों के लिए तैयार हैं।





