सबसे पहले बात ट्रंप की. ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन किया, बर्थडे विश किया. ट्रंप ने कहा, हैप्पी बर्थडे, माय फ्रेंड! और दोनों ने इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर बात की. लेकिन बीच में रूस-यूक्रेन का टॉपिक भी आया. कह बैठे, रूस यूक्रेन जंग रुकवाने में मदद करने के लिए पीएम मोदी का थैंक्यू. कहानी, यहीं से बदल जाती है. सामरिक मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप भारत को यूक्रेन शांति वार्ता में शामिल करना चाहते हैं, क्योंकि भारत का रूस से रिश्ता पुराना है.
इंडिया अब एक ग्लोबल पीसमेकर के रूप में उभर रहा है, और ट्रंप ये जानते हैं कि मोदी पुतिन को इन्फ्लुएंस कर सकते हैं. ये बात सही लगती है, क्योंकि भारत ने हमेशा डायलॉग का सपोर्ट किया है.
-रिचर्ड रॉसो, फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट
पुतिन से बातचीत में भी नहीं छूटा मुद्दा
अब पुतिन की बारी. रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने भी मोदी जी को फोन किया, बधाई दी. रूसी राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पुतिन ने पीएम मोदी की लीडरशिप की तारीफ की और दोनों ने इंडिया-रूस स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप पर बात की, लेकिन यूक्रेन का मुद्दा छूटा नहीं. ये पहली बार नहीं है जब मोदी पुतिन से जंग खत्म करने की बात कर रहे हैं. याद है, 2022 में समरकंद मीटिंग में मोदी ने कहा था, ये जंग का वक्त नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत की ये पोजिशन बैलेंस्ड है.
इंडिया का रोल पीस टॉक्स में बड़ा हो सकता है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी का स्टैंड क्लियर है. इंडिया न्यूट्रल नहीं, बल्कि पीस के साइड में है. और हां, 2025 में इंडिया ने रूस-बेलारूस मिलिट्री ड्रिल्स में भी पार्टिसिपेट किया, जो दिखाता है कि रिलेशन कितने स्ट्रॉन्ग हैं. लेकिन ये पीस के लिए इस्तेमाल हो सकता है.
-अलेक्जेंडर पोलिशचुक, यूक्रेन के एंबेसडर
और अब बात ईयू चीफ उर्सुला वॉन डेर लेयेन. उन्होंने भी पीएम मोदी से बात की, बर्थडे विश किया. उन्हें अगले साल ब्रसेल्स में होने वाली इंडिया-ईयू समिट का न्योता दिया. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी बात हुई. लेकिन यहां भी यूक्रेन वॉर पर फोकस रहा. उर्सुला ने कहा, रूस की आक्रामकता को खत्म करने और शांति का रास्ता तलाशने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है. इससे पहले 4 सितंबर को भी उर्सुला ने यही बातें कही थीं. तब यूरोपीय यूनियन के लीडर्स ने पीएम मोदी से रूस को मनाने की मदद मांगी थी. यानी 15 दिन में दो बार उन्होंने पीएम मोदी से इस मुद्दे पर बात की है.
यूरोप के टेंशन की वजह?
रूस यूक्रेन जंग तीसरे साल में है. पश्चिमी देश इस बात से टेंशन में हैं कि ग्लोबल ऑर्डर चेंज हो रहा है. अमेरिका को लगता है कि चीन, भारत और नॉर्थ कोरिया रूस को बैक कर रहे हैं, लेकिन भारत का स्टैंड क्लियर है- बिजनेस की बात अलग है, मगर जब शांति की बात आएगी तो भारत सबसे आगे मदद करने के लिए खड़ा होगा. पश्चिमी देशों के ज्यादा एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत को मीडिएट करना चाहिए, क्योंकि उसकी क्रेडिबिलिटी दोनों साइड में है. यूक्रेन प्रेसिडेंट जेलेंस्की ने भी कहा, हमें भरोसा है कि भारत जंग खत्म कराने में हमारी मदद करेगा. साफ है कि भारत अब पुल बनने जा रहा है. दुनिया में शांति का रास्ता खोलने जा रहा है.





