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NDA Seat Sharing in Bihar: बिहार में एनडीए के सीट शेयरिंग को लेकर सभी अटकलें खत्म हो गई हैं. गृह मंत्री अमित शाह और सीएम नीतीश कुमार के बीच मोर्या होटल में मुलाकात के बाद क्या 2020 वाले फॉर्मूले पर ही सहमति बन गई है? अगर ऐसा हुआ तो चिराग पासवान के हिस्से में कितनी सीटें आएंगी?

तब अमित शाह अब नीतीश, 2020 वाला फॉर्मूला 2025 में या चिराग काटेंगे बवाल?क्या एनडीए में सीट शेयरिंग फॉर्मूला 2020 वाला होगा?
पटना.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पटना में हैं और एनडीए के सीट शेयरिंग पर फैसला लगभग तय हो गया है.  2020 के चुनाव से पहले भी अमित शाह पटना आए थे और सीएम नीतीश कुमार के आवास पर जाकर उनसे मिले थे. दोनों में बातचीत हुई थी और फिर दिल्ली में दोनों ने मिलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह ऐलान किया था कि कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा. तब रात 11 बजे के आस-पास दोनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय कर दिया था. कुछ कहानी इस बार भी उसी तरह दोहरा रही है. साल 2020 की तरह 2025 के चुनाव से पहले अमित शाह बिहार आए हैं. इस बार सीएम नीतीश कुमार मोर्या होटल पहुंचकर अमित शाह से मिले हैं. ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या एनडीए में 2020 वाला ही फॉर्मूला 2025 में दोहराया जाएगा? क्या 2020 की तरह 2025 में भी जेडीयू बड़े भाई की भूमिका में रहेगी? चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा किस गठबंधन में जाएंगे और उन्हें कितनी सीटें मिलेंगी?

एनडीए में अब लगभग सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही सभी अटकलें खत्म हो गई हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच बुधवार को पटना के मोर्या होटल में हुई गुप्त बैठक के बाद 2020 वाले फॉर्मूले पर ही सहमति बनने की खबर है. यह मुलाकात ठीक उसी तरह हुई, जैसे 2020 के चुनाव से पहले हुई थी, जब अमित शाह पटना आए थे और नीतीश के साथ मिलकर सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय किया था. इस बार भी बैठक के बाद यह साफ है कि जेडीयू एक बार फिर से गठबंधन में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में रहेगी. हालांकि, इस बार चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों को भी संतुष्ट करना एक बड़ी चुनौती होगी.

क्या होगा सीटों का गणित?

सूत्रों के मुताबिक, इस बार भी सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला 2020 की तरह ही रहेगा. जेडीयू 115-120 सीटों पर, जबकि बीजेपी 110-115 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. दोनों पार्टियों के बीच सीटों की संख्या लगभग बराबर ही रहेगी, जिससे गठबंधन में संतुलन बना रहेगा. सांकेतिक तौर पर एक सीट जेडीयू को बीजेपी से ज्यादा मिल सकती है. क्योंकि, 2020 में जेडीयू 122 और बीजेपी को 121 सीटें मिली थीं. इसके बाद जेडीयू के कोटे से जीतन राम मांझी की पार्टी हम को 8 सीट दी गई थी और इधर बीजेपी ने अपने कोटे से मुकेश सहनी की पार्टी हम को 12 सीटें दी थीं.

चिराग पासवान अब क्या करेंगे?

लेकिन इस बार मसला है चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) की, जो 40 सीटों की डिमांड कर रही है. चिराग पासवान साफ-साफ कह रहे हैं कि बिहार के हर जिले में एलजेपी रामविलास का कम से कम एक उम्मीदवार जरूर होगा. इस लिहाज से बिहार में 38 जिलें हैं और चिराग इतनी सीटों पर अड़े हुए हैं. शायद एनडीए में चिराग पासवान को बीजेपी अपने कोटे से सीट देगी और हम और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलपी को जेडीयू अपने कोटे से सीट देने जा रही है. बीजेपी चिराग पासवान को 15 सीटें देकर मनाएगी तो वहीं नीतीश कुमार भी उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी को 10-15 सीट देकर मनाएगी.

यह फॉर्मूला इसलिए भी अहम है क्योंकि चिराग पासवान ने लोकसभा चुनाव में अपनी बढ़ती लोकप्रियता का सबूत दिया है. ऐसे में चिराग 15 सीटों से संतुष्ट होंगे या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है. चिराग पासवान के लिए यह फॉर्मूला गले का फांस बन सकता है. लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 100% स्ट्राइक रेट हासिल किया था. ऐसे में चिराग विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटों की मांग कर सकते हैं. अगर उन्हें 15 सीटों से कम मिलती है, तो वे सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर कर सकते हैं, जिससे गठबंधन के भीतर दरार पड़ने की संभावना है. लेकिन कहा जा रहा है कि बीजेपी से उनकी बात हो गई है.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा… और पढ़ें

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