विदेश » अमेरिका ने जिस ‘पुतिन-भक्त’ पर लगाया था बैन, उसी ने मियामी होटल की सीक्रेट मीटिंग में लिखा यूक्रेन पीस प्लान?

अमेरिका ने जिस ‘पुतिन-भक्त’ पर लगाया था बैन, उसी ने मियामी होटल की सीक्रेट मीटिंग में लिखा यूक्रेन पीस प्लान?

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नई दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दुनिया में हलचल मचाने वाली एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. अमेरिका ने जिस शख्स पर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे, उसी किरिल दिमित्रिव को गोपनीय मीटिंग के लिए अमेरिका में एंट्री कैसे मिल गई? और क्या वाकई उसी मीटिंग में यूक्रेन-रूस युद्ध खत्म करने का विवादित 28-पॉइंट प्लान तैयार हुआ? रॉयटर्स की एक रिपोर्ट ने अमेरिकी विदेश नीति, ट्रंप कैंप और रूस के बीच ‘गुप्त चैनलों’ को लेकर तीखी बहस छेड़ दी है.

मियामी के होटल में ‘सीक्रेट मीटिंग, और कमरे में कौन था?
अक्टूबर 2025 के आखिरी हफ्ते में मियामी के एक आलीशान होटल में एक बैठक हुई, जिसका पता अमेरिका में भी कई बड़ी एजेंसियों को बाद में लगा.
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मीटिंग में शामिल थे:

किरिल दिमित्रिव – रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के प्रमुख, पुतिन के बेहद करीबी
जेरेड कुशनर – ट्रंप के दामाद
स्टीव विटकॉफ – न्यूयॉर्क के रियल एस्टेट टाइकून

यही दिमित्रिव वो व्यक्ति हैं जिन्हें अमेरिका ने 2022 में ‘ब्लैकलिस्ट’ किया था. यानी अमेरिकी नागरिकों, कंपनियों, संस्थानों – किसी को भी उनसे कोई भी डील करने की इजाजत नहीं. लेकिन सवाल यह है: फिर उन्हें अमेरिका में एंट्री कैसे और क्यों मिली?

बैन के बाद भी अमेरिका की एंट्री – ‘स्पेशल परमिशन’ ने जगाए सवाल

रिपोर्ट्स बताती हैं कि दिमित्रिव को वीज़ा के लिए एक विशेष छूट दी गई. अमेरिका में उनका प्रवेश अब एक राजनीतिक सवाल बन चुका है – क्या यह सिर्फ बातचीत के लिए था या कोई अदृश्य डिप्लोमैटिक सौदा चल रहा था? दिमित्रिव ने अपने एक्स (X) पोस्ट में कहा था, “अमेरिका-रूस बातचीत जारी रखने के लिए अमेरिका आया हूं… यह वार्ता दुनिया के लिए जरूरी है.” यानी वह खुले तौर पर संकेत दे रहे थे कि अमेरिका ने उनका दौरा मंजूर किया था.

क्या इसी मीटिंग में तैयार हुआ विवादित ‘यूक्रेन-रूस शांति प्रस्ताव’?
खुलासा यह भी हुआ कि मियामी मीटिंग के बाद ही एक 28-बिंदु वाला शांति प्लान उभरा, जिसमें यूक्रेन को अपनी ज़मीन छोड़ने की बात, सैन्य क्षमता सीमित करने का प्रस्ताव, नाटो से दूरी बनाए रखने की शर्त… ये सभी मांगें लगभग रूस की स्क्रिप्ट जैसी थीं – और यही वजह है कि अमेरिका, यूरोप और खुद यूक्रेन ने इस प्लान को ‘गहराई से संदिग्ध’ बताया. विशेषज्ञ इसे ‘भू-राजनीतिक बैकडोर’ कहते हैं – जहां प्रतिबंधित लोग भी बड़ी डील्स के लिए सड़कें खोज लेते हैं.

किरिल दिमित्रिव कौन है?
कहा जाता है कि दिमित्रिव सिर्फ एक बिज़नेस लीडर नहीं, बल्कि क्रेमलिन का भरोसेमंद रणनीतिक खिलाड़ी हैं. उनकी पहुंच पुतिन के आंतरिक सर्कल तक मानी जाती है. प्रतिबंधों के बावजूद उनका अमेरिका में प्रवेश इस बात का संकेत है कि सत्ता के असली खेल नियमों से ऊपर चलते हैं.

यह पूरा प्रकरण अब सवालों के घेरे में है – क्या यह सिर्फ बातचीत थी? या पर्दे के पीछे अमेरिका और रूस के बीच एक नया ‘सीक्रेट ट्रैक’ तैयार हो रहा है? दुनिया अभी जवाबों का इंतजार कर रही है, लेकिन एक बात साफ है कि इस मीटिंग ने वैश्विक राजनीति के पानी में बड़ी लहरें पैदा कर दी हैं.

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