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इंडोनेशिया में भूकंप और सूनामी से भारी तबाही, अब तक 248 लोगों की मौत

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इंडोनेशिया के सुमात्रा में 7.2 तीव्रता के भूकंप और सुनामी से अब तक 248 मौतें हो चुकी है. हजारों लोग बेघर और लापता बताए जा रहे हैं. उत्तरी सुमात्रा सबसे ज्यादा प्रभावित है. इसके अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई गई है.

इंडोनेशिया में भूकंप और सूनामी से भारी तबाही, अब तक 248 लोगों की मौतभूकंप के बाद सुनाई से इंडोनेशिया में भारी तबाही मची है. फोटो- रायटर

इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर आए शक्तिशाली भूकंप और उसके बाद आई सुनामी ने भयानक तबाही मचाई है. शनिवार शाम तक मृतकों की आधिकारिक संख्या 248 तक पहुंच गई है, जबकि अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लापता लोगों की तलाश और मलबे में दबे शवों के मिलने से यह संख्या अभी और बढ़ सकती है. सैकड़ों लोग घायल हैं और हजारों बेघर हो चुके हैं. सबसे ज्यादा नुकसान उत्तरी सुमात्रा प्रांत के मध्य तपनौली जिले और आसपास के इलाकों में हुआ है.

भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.2 मापी गई, जिसके बाद समुद्र में उठी ऊंची लहरों ने तटीय गांवों को अपनी चपेट में ले लिया. कई घर, स्कूल, अस्पताल और सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं. बिजली और दूरसंचार व्यवस्था ठप होने से प्रभावित इलाकों से संपर्क टूट गया है.बचाव कार्य में भारी मुश्किलें आ रही हैं. भारी बारिश, कीचड़ भरी सड़कें और जगह-जगह आए भूस्खलन के कारण राहत दल प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच पा रहे. कई पुल टूट चुके हैं और मुख्य सड़क मार्ग अवरुद्ध हैं. स्थानीय प्रशासन ने बताया कि कुछ दूरदराज के गांवों तक अभी भी कोई संपर्क नहीं हो सका है, वहां हालात और गंभीर हो सकते हैं.

इंडोनेशियाई सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (BNPB) और स्वयंसेवी संगठनों के जवान दिन-रात राहत कार्य में जुटे हैं. हेलिकॉप्टर और राहत विमानों से उत्तरी सुमात्रा के प्रभावित जिलों में खाना, पीने का पानी, दवाइयां और तिरपाल पहुंचाए जा रहे हैं. मेदान शहर के सैन्य हवाई अड्डे को राहत कार्यों का मुख्य केंद्र बनाया गया है.

राष्ट्रपति जोको विडोडो ने आपदा को राष्ट्रीय स्तर की त्रासदी घोषित करते हुए अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है. भारत, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और अमेरिका ने तत्काल मदद का आश्वासन दिया है. संयुक्त राष्ट्र की टीम भी मूल्यांकन के लिए रवाना हो चुकी है.इंडोनेशिया प्रशांत महासागर की ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है, जहां भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां आम हैं. पिछले कुछ वर्षों में 2004 की विनाशकारी सुनामी, 2018 का सुलावेसी भूकंप-सुनामी और 2022 का सियानजुर भूकंप जैसी घटनाओं से देश पहले भी जूझ चुका है.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

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