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क्या है कार्टेल डे लॉस सोलेस, जिसे लेकर वेनेजुएला को लगातार चेतावनी दे रहा था अमेरिका

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अमेरिका और वेनेजुएला के बीच ये तनावपूर्ण हालात बनने के पीछे लगातार कार्टेल डे लॉस सोलेस का नाम लिया जा रहा है. आखिर क्या है ये. क्या इसका इसका इतिहास है. अमेरिका कहता रहा है कि वेनेजुएला का ये ड्रग कार्टेल सरकार का ही बनाया हुआ है.

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क्या है कार्टेल डे लॉस सोलेस, जिसे लेकर वेनेजुएला को चेतावनी दे रहा था अमेरिका

अमेरिका ने वेनेजुएला पर आखिरकार हमला कर ही दिया, जिसकी आशंका लगातार जताई जा रही थी. अमेरिका पिछले कुछ समय से वेनेजुएला के कार्टेल डे लॉस सोलेस से सख्त नाराज था. इस संगठित कारटेल के जरिए अमेरिका में ड्रग्स भेजने का आरोप लगाता रहा था. क्या है आखिर कार्टेल डे लॉस सोलेस. क्या है आखिर वेनेजुएला सरकार से रिश्ता.

कार्टेल डे लॉस सोलेस या कार्टेल ऑफ द सन एक ऐसा नाम है जो वेनेजुएला की सैन्य और सरकारी उच्च अधिकारियों के उन नेटवर्क को दिया जाता है, जिन पर ड्रग तस्करी में शामिल होने के आरोप हैं. इसका नाम वेनेजुएला के जनरलों की यूनिफॉर्म पर लगे सूर्य के चिह्न (सोलेस) से आया है.

अमेरिका का दावा है कि यह एक संगठित नार्को-टेररिस्ट ग्रुप है, जिसका नेतृत्व निकोलस मादुरो और उनके करीबी अधिकारी करते हैं. 2020 में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने मादुरो और 14 अन्य अधिकारियों पर नार्को-टेररिज्म के आरोप लगाए थे. इसके बाद अमेरिका के आरोप और तीखे होते चले गए. 2025 में ट्रंप प्रशासन ने इसे पहले स्पेशली डिजाइनेटेड ग्लोबल टेररिस्ट और फिर नवंबर में फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन घोषित किया.

अमेरिका आरोप लगाता है कि यह कोलंबिया के एफएआरसी जैसे ग्रुप्स से कोकीन ट्रैफिकिंग करता है, ट्रेन डे अरागुआ और सिनालोआ कार्टेल जैसे संगठनों की मदद करता है. अमेरिका में ड्रग्स भेजकर इसे “हथियार” की तरह इस्तेमाल करता है. यही आरोप हालिया तनाव और हमले का मुख्य आधार हैं.

हालांकि कई स्वतंत्र विशेषज्ञ इसे कारटेल नहीं बल्कि एक ढीला-ढाला भ्रष्टाचार का सिस्टम मानते हैं, जहां अलग-अलग सैन्य अधिकारी व्यक्तिगत लाभ के लिए ड्रग ट्रैफिकर्स की मदद करते हैं.

इस शब्द की शुरुआत 1990 के दशक की शुरुआत में हुई. 1993 में, वेनेजुएला की नेशनल गार्ड के दो जनरलों – रामोन गुइलेन डाविला और ओरलैंडो हर्नांडेज विलेगास – पर ड्रग तस्करी के आरोप लगे. मीडिया ने इसे “कार्टेल डे लॉस सोलेस” नाम दिया, क्योंकि ये जनरल उच्च रैंक के थे. उनकी यूनिफॉर्म पर सूर्य के चिह्न लगे होते थे. उस समय कोलंबिया में कोकेन उत्पादन बढ़ रहा था. वेनेजुएला उसका एक ट्रांजिट रूट बन रहा था.

2000 के दशक में, ह्यूगो शावेज के शासनकाल में आरोप बढ़े. अमेरिका का दावा है कि शावेज और बाद में निकोलस मादुरो के समय में सैन्य अधिकारियों ने कोलंबिया के एफएआरसी गुरिल्ला ग्रुप से गठजोड़ किया. ये ग्रुप कोकीन उत्पादन करता था. वेनेजुएला के अधिकारी इसे सुरक्षित पासेज देते थे, जिसमें एयरस्ट्रिप्स सुरक्षित करना, रडार बंद करना या हथियार देना जैसी चीजें शामिल थीं. ये भी कहा जाता है कि कि 2000 के मध्य तक वेनेजुएला के अधिकारी सिर्फ रिश्वत नहीं लेते थे, बल्कि खुद कोकेन खरीदकर बेचने लगे.

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Sanjay Srivastavaडिप्टी एडीटर

लेखक न्यूज18 में डिप्टी एडीटर हैं. प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का 30 सालों से ज्यादा का अनुभव. लंबे पत्रकारिता जीवन में लोकल रिपोर्टिंग से लेकर खेल पत्रकारिता का अनुभव. रिसर्च जैसे विषयों में खास…और पढ़ें

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