विदेश » क्यूबा के स्कूल से वेनेजुएला की सत्ता तक, निकोलस मादुरो का लाल सफर; क्यों बने अमेरिका की आंखों की किरकिरी?

क्यूबा के स्कूल से वेनेजुएला की सत्ता तक, निकोलस मादुरो का लाल सफर; क्यों बने अमेरिका की आंखों की किरकिरी?

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Nicolas Maduro News: निकोलस मादुरो ने बस ड्राइवर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति तक का सफर तय किया. अमेरिका ने मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर देश से बाहर ले जाने का दावा किया है, जिसने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है. 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद से मादुरो लगातार इस पद पर बने रहे. इससे पहले मादुरो देश के विदेश मंत्री और उपराष्ट्रपति भी रह चुके थे.

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क्यूबा के स्कूल से वेनेजुएला की सत्ता तक, निकोलस मादुरो का लाल सफरट्रंप ने निकोलस मादुरो को वेनेजुएला का तानाशाह बताया है. (फाइल फोटो)

काराकस (वेनेजुएला). निकोलस मादुरो ने बस ड्राइवर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति बनने तक का सफर तय किया. हालांकि, उन पर देश में लोकतंत्र के गिरने और आर्थिक संकट को नजरअंदाज करने के आरोप लगे. अमेरिका ने शुक्रवार देर रात वेनेजुएला पर ‘बड़े पैमाने पर हमला’ किया. अमेरिका ने कहा कि मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया है और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है. कई महीनों तक अमेरिका के दबाव के बाद ये घटनाएं हुईं. मादुरो ऐसे वक्त में सत्ता में थे जब अमेरिका के वेनेजुएला पर हमला करने और उसे अपने नियंत्रण में लेने की चर्चाएं चल रही थीं.

अमेरिकी हमले का मकसद उस ‘स्वघोषित समाजवादी क्रांति’ को खत्म करना था, जिसे उनके राजनीतिक गुरु और पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने 1999 में शुरू किया था. शावेज की तरह मादुरो ने भी अमेरिका को वेनेजुएला के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था और लोकतांत्रिक नियमों को बहाल करने की कोशिशों के लिए अमेरिकी सरकारों की आलोचना की थी. मादुरो का राजनीतिक करियर करीब 40 साल पहले शुरू हुआ था. 1986 में वह एक साल के लिए क्यूबा गए थे, जो हाई स्कूल के बाद उनकी इकलौती औपचारिक पढ़ाई थी.

लौटने के बाद मादुरो ने काराकस में बस ड्राइवर के तौर पर काम किया, जहां वह जल्दी ही मजदूर संघ के नेता बन गए. 1990 के दशक में वेनेजुएला की खुफिया एजेंसियों ने उन्हें क्यूबा सरकार से करीबी रखने वाले कट्टर वामपंथी के रूप में पहचाना. मादुरो ने आखिरकार बस ड्राइवर की नौकरी छोड़ दी और शावेज के बनाए राजनीतिक आंदोलन में शामिल हो गए.

शावेज को पहले एक नाकाम सैन्य तख्तापलट के लिए 1994 में राष्ट्रपति से माफी मिली थी, जिसके बाद उन्होंने राजनीति शुरू की थी. 2013 में अपनी मौत से पहले शावेज ने मादुरो को अपना उत्तराधिकारी बताया था. 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद से मादुरो लगातार इस पद पर बने रहे. इससे पहले मादुरो देश के विदेश मंत्री और उपराष्ट्रपति भी रह चुके थे.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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