साहित्य » जंगल की बात कर दिखा चारों तरफ सारा हरा हरा

जंगल की बात कर दिखा चारों तरफ सारा हरा हरा

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सोच कर के लिख कुछ

कुछ लिख कर के सोच

सिक्का उछाल

हवा में रोज का रोज

चित भी तेरी पट भी तेरी

किसे देखना है

किसे है कुछ होश

खड़ा हो जाए अगर

दे डाल एक भोज

दे डाल एक भोज

अखबार में सिक्का जरूर छपवा

परदे के पीछे हो चुके अनर्थ को

मिट्टी डाल ले दे के पीछा छुड़ा

ले दे के पीछा छुड़ा

बर्बाद कर खुद ही घर को जरा जरा

खीसें निपोर रोज सुबह शाम को मुस्कुरा

जंगल की बात कर दिखा चारों तरफ सारा हरा हरा

पूछे कोई कुछ

आंखें लाल कर नस दबा

मोगेमबो की फ़ोटो दिखा और डरा

‘उलूक’ कथा “नौ महीने”

पटाक्षेप सुनहरा

सूंघे पत्रकार खबर फैली हुई

जो हो गया उस पर तिरंगा लहरा |

चित्र साभार: https://www.shutterstock.com/

वैधानिक चेतावनी : सत्य कथा पर आधारित बकवास में पात्रों का जिक्र नहीं किया गया है |

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