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शशि कपूर ने एक्टर की अदाकारी देखकर अपनी फिल्म में काम करने का मौका दिया था. दिलीप कुमार को अपना आदर्श मानने वाला यह सितारा जब भी पर्दे पर आता, अपनी सादगी से जान फूंका देता था. थिएटर से करियर शुरू कर घर-घर में पहचान बनाने वाले इस एक्टर की मौत की कहानी भी बेहद अजीब और भावुक करने वाली है. साल 1996 में भारत-श्रीलंका का क्रिकेट मैच देखते हुए आखिरी सांस ली.

नई दिल्ली. सिनेमा में लीड एक्टर्स की चमक के बीच शफी इनामदार जैसे मंझे हुए एक्टर ने अपनी एक अलग पहचान बनाई. वह एक ऐसे आर्टिस्ट थे, जो अपनी मौजूदगी से कहानी को गहराई और मजबूती देते थे. थिएटर से लेकर टीवी और फिल्मों तक शफी ने हर किरदार को पूरी शिद्दत के साथ जिया. उनके अभिनय में जो ठहराव और सच्चाई थी, उसने उन्हें दर्शकों का चहेता बना दिया. आज भी उनके निभाए किरदारों को उनकी सादगी और बेहतरीन अदाकारी के लिए याद किया जाता है.

सिनेमा और थिएटर के मशहूर कैरेक्टर एक्टर शफी इनामदार की 13 मार्च को पुण्यतिथि है. शफी इनामदार दिलीप कुमार के जबरदस्त फैन थे और उन्हें इस बात की बहुत खुशी थी कि उन्होंने दिलीप साहब के साथ इज्जतदार फिल्म में काम किया था. शफी इनामदार की एक्टिंग में ईमानदारी और गहराई थी. उनके किरदार दर्शकों को अपनी तकलीफ भुला देते थे. थिएटर से लेकर फिल्म और टीवी तक, उन्होंने हर माध्यम में अपनी छाप छोड़ी. आज भी उनके किरदारों की यादें लोगों के दिलों में जिंदा हैं.

शफी इनामदार का जन्म 23 अक्टूबर 1945 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था. उन्होंने मुंबई के केसी कॉलेज से पढ़ाई पूरी की. बचपन से ही एक्टिंग का शौक था, लिहाजा, स्कूल-कॉलेज के दिनों से ही नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे. इसी वजह से उनकी एक्टिंग की नींव बहुत मजबूत हो गई. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गुजराती थिएटर की मशहूर हस्ती प्रवीण जोशी के मार्गदर्शन में की. बाद में बलराज साहनी से मुलाकात हुई और उन्होंने आईपीटीए, यानी इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन जॉइन की.
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शफी कहते थे कि उनकी एक्टिंग और डायरेक्शन में असली निखार तब आया, जब वह बलराज साहनी के संपर्क में आए. 70 के दशक में उन्होंने पृथ्वी थिएटर्स जॉइन किया. यहां कई बड़े नाटक प्रोड्यूस और डायरेक्ट किए. पृथ्वीराज कपूर के बाद पृथ्वी थिएटर को उनके छोटे बेटे शशि कपूर ने संभाला.

शशि कपूर शफी की एक्टिंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें अपनी फिल्म विजेता में काम करने के लिए साइन कर लिया. साल 1982 में आई फिल्म के डायरेक्टर गोविंद निहलानी थे. उसी दौर में गोविंद निहलानी ने ‘अर्धसत्य’ में भी उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका दी, जो दर्शकों को बहुत पसंद आई.

शफी इनामदार का मानना था कि एक्टिंग उनकी जिंदगी है. वह यह नहीं देखते थे कि काम थिएटर में है, फिल्म में है या टीवी पर. 1984 में टीवी पर उनका सीरियल ‘ये जो है जिंदगी’ बहुत हिट हुआ, जिसमें स्वरूप संपत उनके साथ थीं. 80 के दशक में बीआर चोपड़ा की कई फिल्मों में उन्होंने काम किया, जो लोगों के दिलों में बस गईं.

अभिनय से आगे बढ़कर साल 1995 में शफी डायरेक्टर बने. उनकी पहली फिल्म हम दोनों थी, जिसमें नाना पाटेकर और ऋषि कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे. शफी ने लव मैरिज की थी. उनकी पत्नी भक्ति बरुवे महाराष्ट्रीयन थीं और एक अदाकारा व दूरदर्शन की न्यूज रीडर भी.

साल 1996 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था. उस वक्त वह घर पर आराम से बैठकर भारत बनाम श्रीलंका के विश्व कप सेमीफाइनल मैच का लाइव प्रसारण देख रहे थे. दरअसल, शफी को क्रिकेट देखना और खेलना बहुत पसंद था. मैच देखते हुए वह अचानक बेहाल हो गए. हार्ट अटैक आया और वह चल बसे. उनकी मौत के पांच साल बाद 2001 में उनकी पत्नी भक्ति भी एक कार एक्सीडेंट में चल बसी थीं.
March 13, 2026, 08:35 IST





