Last Updated:
आमतौर पर जब हम विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो एयरपोर्ट पर पासपोर्ट चेक होता है, वीज़ा देखा जाता है और एंट्री मिल जाती है. लेकिन, दुनिया में एक ऐसा भी खूबसूरत देश है जहां नियम थोड़े अलग और बेहद खास हैं. प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में स्थित एक छोटा सा द्वीपीय देश ‘पलाऊ’ (Palau) अपने पर्यटकों से एक अनोखी मांग करता है.

यहां जैसे ही आप लैंड करते हैं, आपको अपने पासपोर्ट पर एक ‘शपथ’ (Pledge) लेनी पड़ती है और उस पर हस्ताक्षर करने होते हैं. अगर आप ऐसा नहीं करते, तो आपको देश में घूमने की इजाजत शायद ही मिले. यह पहल पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इसे एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है.

‘पलाऊ प्लेज’ दुनिया का अपनी तरह का पहला अनिवार्य समझौता है. जब कोई पर्यटक पलाऊ के एयरपोर्ट पर उतरता है, तो इमीग्रेशन अधिकारी उसके पासपोर्ट पर एक विशेष मुहर (Stamp) लगाते हैं. यह कोई साधारण वीज़ा स्टैम्प नहीं होता, बल्कि यह एक ‘शपथ पत्र’ है.

इस स्टैम्प पर पर्यटकों को साइन करना होता है, जिसका सार यह है कि पर्यटक पलाऊ की संस्कृति, पर्यावरण और प्राकृतिक सुंदरता का सम्मान करेंगे. हस्ताक्षर करके आप यह वादा करते हैं कि आप वहां के नाजुक पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे.
Add News18 as
Preferred Source on Google

सांस्कृतिक विरासत का आदर करेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस द्वीप की सुंदरता को बरकरार रखने में मदद करेंगे. इसे साइन करते ही आप केवल एक पर्यटक नहीं, बल्कि पलाऊ के ‘पार्ट-टाइम गार्जियन’ यानी अस्थायी संरक्षक बन जाते हैं.

पलाऊ अपने नीले समुद्र, कोरल रीफ और शानदार समुद्री जीवन के लिए मशहूर है, जिसके चलते पिछले कुछ सालों में यहाँ पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल आया है. पर्यटन से देश को आर्थिक लाभ तो हुआ, लेकिन लापरवाही से फेंके गए कचरे और प्लास्टिक ने वहां के इकोसिस्टम को खतरा पैदा कर दिया.

इसी को देखते हुए पलाऊ सरकार ने यह नियम बनाया ताकि पर्यटक ‘माइंडफुल ट्रैवल’ यानी सोच-समझकर यात्रा करें और अपनी जिम्मेदारी समझें. यह शपथ पत्र पर्यटकों को लगातार याद दिलाता रहता है कि उनकी यात्रा का प्रभाव इस द्वीप पर क्या पड़ रहा है.

अगर आप भारतीय हैं और अगली छुट्टियों में पलाऊ जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है क्योंकि यहाँ जाने के लिए भारतीय नागरिकों को पहले से वीज़ा लेने की लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ता.

भारतीयों के लिए पलाऊ यात्रा काफी आसान है, जहां आप ऑनलाइन या एयरपोर्ट पर पहुंचकर ‘एंट्री परमिट’ ले सकते हैं. हालांकि, पर्यटकों को एक ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट फीस’ (SDF) चुकानी पड़ती है.

यह एक छोटा सा योगदान है जो सीधे तौर पर इस द्वीप की प्राकृतिक सुंदरता को बचाने में खर्च किया जाता है. पलाऊ का यह कदम हमें सिखाता है कि घूमना-फिरना सिर्फ मौज-मस्ती नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है ताकि वो खूबसूरती हमारे बाद आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बची रहे.





