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प्रशांत भूषण दे रहे थे दलील, तभी सरकारी वकील क्यों बोले- अलमारी से कंकाल निकाल रहे हैं जबकि ऐसा कुछ नहीं…

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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर ठेके देने के आरोप वाली पीआईएल पर तीन हफ़्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है. पीआईएल दाखिल करने वाले एनजीओ की तरफ से प्…और पढ़ें

प्रशांत भूषण दे रहे थे दलील, तभी सरकारी वकील क्यों बोले- अलमारी से कंकाल...सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को तुरंत हलफनामा दायर करने को कहा. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर तीन हफ़्ते के भीतर अपना रुख़ स्पष्ट करने का निर्देश दिया जिसमें अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर अपने परिवार के सदस्यों को ठेके देने का आरोप लगाया गया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ को सूचित किया गया कि राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत के 18 मार्च के आदेश के संदर्भ में अपना हलफ़नामा पहले ही दाखिल कर दिया है.

गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना द्वारा दायर एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य में सभी सरकारी ठेके मुख्यमंत्री के करीबी पारिवारिक सदस्यों को दिए जा रहे हैं. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने 18 मार्च के आदेश का हवाला दिया और कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक अपना हलफ़नामा दाखिल नहीं किया है.

प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया, “अरुणाचल प्रदेश राज्य को मुख्यमंत्री अपनी निजी कंपनी की तरह चला रहे हैं.” जब उन्होंने तर्क दिया कि राज्य के हलफनामे में सैकड़ों ठेके दिए जाने की बात कही गई है, तो अरुणाचल प्रदेश के वकील ने इसका विरोध किया. राज्य के वकील ने कहा, “यह ग़लत है. वह (याचिकाकर्ता) अलमारी से कंकाल निकाल रहा है, जबकि ऐसा कुछ है ही नहीं.” यह दावा करते हुए कि यह याचिका एक “प्रायोजित मुक़दमा” है, राज्य के वकील ने 2010 और 2011 में दिए गए कॉन्ट्रैक्ट्स का हवाला दिया.

भूषण ने 18 मार्च के आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया है, “भारत संघ, अर्थात गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय भी विस्तृत हलफनामा दाखिल करेंगे.” प्रशांत भूषण ने कहा, “उन्होंने (हलफ़नामा) दायर नहीं किया है. अब उनका हलफ़नामा न केवल याचिका के जवाब में होना चाहिए, बल्कि राज्य द्वारा दायर हलफ़नामे और साथ ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के जवाब में भी होना चाहिए.” केंद्र के वकील ने कहा कि उन्हें हलफ़नामा दायर करना था, लेकिन वित्त मंत्रालय इस मामले में पक्षकार नहीं है और मंत्रालय को इसमें शामिल होना होगा.

पीठ ने कहा, “इस अदालत ने आपको निर्देश दिया था. हलफ़नामा दायर करें.” शीर्ष अदालत ने कहा, “हमें ये सारी तकनीकी बातें मत बताइए. इस अदालत का एक विशिष्ट निर्देश है कि भारत संघ, यानी गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय भी विस्तृत हलफनामा दाखिल करें. आपके लिए हलफनामा दाखिल करना ही काफी है. इसमें पक्षकार बनने की कोई ज़रूरत नहीं है.” राज्य द्वारा हलफनामा दाखिल करने पर गौर करते हुए, पीठ ने कहा, “हालांकि, भारत संघ हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन हफ़्ते का समय मांगता है और उसे इससे ज़्यादा समय नहीं दिया जाता.”

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h… और पढ़ें

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