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भारत का वो पड़ोसी देश, जहां जमीन, इलाज, पढ़ाई, बिजली मुफ्त, बस ये नहीं कर सकते

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भारत का एक पड़ोसी देश है, जिसको धरती पर स्वर्ग भी कहते हैं. यहां राजा अपनी जनता को घर बनाने के लिए मुफ्त जमीन देता है. साथ ही बिजली, पानी, इलाज और पढ़ाई जैसी जरूरी चीजें भी फ्री हैं. लेकिन वहां के लिए एक शर्त के साथ बंधकर भी रहना होता है यानि वो एक काम तो बिल्कुल नहीं कर सकते.

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भारत के ठीक पड़ोस में एक ऐसा देश है, जिसे धरती पर स्वर्ग कहा जाता है. खूबसूरत प्रकृति है और ज्यादातर लोग स्वस्थ. यहां पर ज्यादा सुविधाएं फ्री में मिलती हैं, जो दुनिया के किसी देश में शायद ही मिलें. अगर इस देश में किसी को घर बनवाना हो और उसके पास जमीन नहीं हो और वो जमीन खरीदने की हैसियत में भी नहीं है, उसे बस राजा के पास तक अपनी फरियाद पहुंचानी होती है, फिर राजा मकान बनाने के लिए उसे मुफ्त जमीन दे देता है. 

यहां खाना फ्री में मिल जाएगा. बिजली भी मुफ्त है और पढ़ाई भी. सबसे बड़ी बात ये भी आप को कैसी भी बीमारी हो, इलाज बिल्कुल मुफ्त दिया जाएगा. है ना स्वर्ग जैसी जगह, दुनिया अब शायद ही कहीं ऐसा होता हो, जैसा हमारा ये पड़ोसी देश करता है. बस वो अपने लोगों के लिए एक शर्त रखता है, जिसे पूुरा करना जरूरी है.

इस देश में आपको ना तो कोई भिखारी मिलेंगे और ना कोई बेघर. हर किसी के पास अपने मकान हैं. यहां के लोग आमतौर पर खुश जीवन गुजारते हैं. टान में स्वास्थ्य सेवाएं सभी नागरिकों के लिए मुफ्त हैं. सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त इलाज और दवाएं उपलब्ध हैं. यहां तक कि कुछ गंभीर बीमारियों के लिए, सरकार विदेश में इलाज का खर्च भी उठाती है. इस पडोसी देश का नाम भूटान है.

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भूटान में अब बेशक टीवी और इंटरनेट है लेकिन लंबे समय तक यहां पर इन दोनों सेवाओं पर इसलिए प्रतिबंध लगा रहा कि इसके जरिए विदेशों की जो संस्कृति यहां आएगी, उसका भूटान के लोगों और जीवन पर गलत असर पड़ेगा. लेकिन 1999 से इसे राजा द्वारा हटा लिया गया. आप ये कह सकते हैं कि भूटान दुनिया का आखिरी देश था जिसने टेलीविजन का इस्तेमाल शुरू किया.

इस देश में 2008 में लोगों की आंतरिक शांति का ख्याल रखने के लिए, सकल राष्ट्रीय खुशी समिति का गठन किया गया. यहां तक कि जनसंख्या जनगणना प्रश्नावली में एक कॉलम होता है, जहां आप संकेत कर सकते हैं कि आप अपने जीवन से संतुष्ट हैं या नहीं. यहां एक खुशी मंत्रालय भी है, जो सकल घरेलू खुशी को मापते हैं. यहां पर जीवन की गुणवत्ता उनके वित्तीय और मानसिक मूल्यों के बीच संतुलन से निर्धारित होती है.

भूटान में कोई सड़कों पर नहीं रहता. यदि कोई व्यक्ति अपना घर खो देता है, तो उसे बस राजा के पास जाने की जरूरत होती है, जो उन्हें जमीन का एक टुकड़ा देता है, जहां वे घर बना सकते हैं और सब्जियां लगा सकते हैं. भूटानी लोग खुद को खुश मानते हैं और अपने जीवन से संतुष्ट रहते हैं. भूटान में प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा मुफ्त है. सरकारी स्कूल और कॉलेजों में ट्यूशन फीस नहीं ली जाती. कुछ विशेष मामलों में, सरकार विदेश में उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति भी देती है.

भूटान में ग्रामीण इलाकों में, घरेलू उपयोग के लिए एक सीमा तक बिजली मुफ्त दी जाती है. यह सुविधा मुख्य रूप से छोटे परिवारों और कम आय वाले नागरिकों के लिए है. किसानों को सरकार से बीज, खाद, और उपकरणों पर सब्सिडी मिलती है. खेती में उपयोग होने वाले कुछ संसाधन मुफ्त में या बहुत कम कीमत पर दिए जाते हैं.

भूटानी लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं. पुरुष भारी, घुटने की लंबाई वाले वस्त्र पहनते हैं. महिलाएं लंबी पोशाक पहनती हैं. एक व्यक्ति की स्थिति और सामाजिक स्तर की पहचान उनके बाएं कंधे पर दुपट्टे के रंग से की जाती है. साधारण लोग सफेद दुपट्टा पहनते हैं. कुलीन लोग और साधु पीले रंग के कपड़े पहनते हैं.

ये लंबे समय तक अलग थलग देश रहा है. 1970 में पहली बार किसी विदेशी पर्यटक को यहां आने की इजाज़त दी गई थी. अब भी अधिकारी विदेशी प्रभाव पर कड़ी नज़र रखते हैं.

वैसे अब भूटान में चीज़ें तेज़ी से बदल रही हैं. राजधानी थिम्पू में अब स्मार्टफ़ोन और कराओके बार आम हो गए हैं. युवा यहां आबादी में बहुतायत में हैं और उन्होंने सोशल मीडिया को आसानी से स्वीकार कर लिया है. इसकी वजह से वहां स्ट्रीट फ़ैशन में उछाल आ गया है और राजनीति में ज़्यादा खुलकर चर्चा हो रही है.

भूटान पर्यावरण क्षेत्र में अग्रणी रहा है. प्लास्टिक की थैलियां वहां 1999 से ही प्रतिबंधित हैं. तंबाकू लगभग पूरी तरह से ग़ैरक़ानूनी है. क़ानूनन देश के 60% भाग में जंगल होने ही चाहिए.कमाल के प्राकृतिक दृश्यों और शानदार संस्कृति के बावजूद यह अब भी बड़े पैमाने पर पर्यटन से बचा रहा है और ऐसा जान-बूझकर किया गया है.वे बढ़ते पेड़ों पर भी विशेष ध्यान देते हैं. वैसे, 2015 में, भूटान ने एक विश्व रिकॉर्ड बनाया जब लोगों ने सिर्फ एक घंटे में 50,000 पेड़ लगाए.

भूटान का मुख्य निर्यात बिजली है, वह भारत को पनबिजली बेचता है. इसके अलावा लकड़ी, सीमेंट, कृषि उत्पाद और हस्तशिल्प का भी निर्यात करता है. भूटान के पास सेना है लेकिन चारों ओर से घिरा होने की वजह से नौसेना नहीं है. इसके पास वायुसेना भी नहीं है और इस क्षेत्र में भारत उनका ख़्याल रखता है.

अधिकांश भूटानी लोग बौद्ध हैं. चूंकि यह धर्म पूरे जानवरों की दुनिया के लिए सम्मान सिखाता है, इसलिए शाकाहार वास्तव में वहां आम है. मुख्य और मूल पकवान चावल है. वैसे, साधारण चावल ऐसे ऊंचाई पर विकसित नहीं हो पाएंगे, इसलिए लोग लाल चावल उगाते हैं, जो कि कठिन है और एक अजीब स्वाद है. लोग चाय पीने पर बहुत ध्यान देते हैं. वे नमक, काली मिर्च और एक चम्मच मक्खन के साथ काली और हरी चाय पीते हैं.

.भूटान में महिलाओं को सम्मानित किया जाता है. सभी संपत्ति और सामान जैसे कि उनके घर, मवेशी और जमीन सबसे बड़ी बेटी को जाते हैं, बेटे को नहीं.  भूटान में किसी भी रासायनिक उत्पादों को आयात या उपयोग करने के कानून के खिलाफ है. इसलिए वे जो कुछ भी उपयोग करते हैं वह देश के अंदर खेती की जाती है और पूरी तरह से प्राकृतिक है.

भूटान में कोई भी नागरिक किसी भी विदेशी से शादी नहीं कर सकता. ये कानूनी तौर पर निषिद्ध है. राजा या राजकुमार या राजा के परिवार से जुड़े लोग इसका अपवाद हैं. सभी आवश्यक अनुष्ठान किए जाने के बाद ही एक युगल परिवार बनता है. वैसे, एक नियम के रूप में, एक पुरुष एक महिला के घर आता है और जब वह पर्याप्त पैसा कमाता है, तो वे दूसरे घर में जा सकते हैं.

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भारत का पड़ोसी देश, जहां राजा घर के लिए देता है मुफ्त जमीन, साथ में ये भी फ्री

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