Agency:एजेंसियां
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ओरेनबर्ग के यास्नी लॉन्च साइट से अवंगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल वाली UR-100N मिसाइल का टेस्ट फेल हो गया. वायरल वीडियो में पहले बैंगनी धुआं, फिर आग का गुबार दिखा. मिसाइल हवा में फटकर जमीन पर गिरी गई. रूसी टेलीग्राम चैनल ने पुष्टि की कि टेस्ट के दौरान विस्फोट हुआ. लिक्विड फ्यूल से बैंगनी रंग का धुआं उठा. यास्नी 13वीं रॉकेट डिवीजन का बेस है, जहां 2019 से पुरानी मिसाइलों को अवंगार्ड से बदला जा रहा है. रूस ने अभी कोई बयान नहीं दिया, लेकिन वीडियो तेजी से वायरल है.
रूस के अजेय हथियार का परीक्षण हुआ फैल, वीडियो वायरल (वीडियो ग्रैब)Russian Missile Crash: रूस की सैन्य ताकत पर एक बड़ा झटका लगा है. रूसी टेलीग्राम चैनलों पर वायरल एक वीडियो में अवंगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल से लैस UR-100N इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के लॉन्च के बाद आग के गोले में बदलता दिख रहा है. वीडियो में बैंगनी रंग का धुआं उड़ता दिखाई दे रहा है, जो यास्नी शहर के ऊपर फैल गया. स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि मिसाइल हवा में ही फट गई. यह घटना रूस के ओरेनबर्ग ओब्लास्ट के यास्नी लॉन्च साइट पर हुई, जहां रूसी स्ट्रैटेजिक रॉकेट फोर्सेस की 13वीं रेड बैनर रॉकेट डिवीजन तैनात है.
यास्नी रूस के 11 प्रमुख लॉन्च स्थलों में से एक है. यहां न्यूक्लियर वारहेड वाली लॉन्ग-रेंज ग्राउंड-लॉन्च्ड मिसाइलें दागी जाती हैं. यूक्रेनी मिलिट्री मीडिया आउटलेट के अनुसार, वीडियो देखने से पता चला कि मिसाइल के उड़ान के दौरान बोर्ड पर विस्फोट हो गया था, जिससे यह नियंत्रण खो बैठी. बाकी बचा रॉकेट फ्यूल आग लगने से भड़क उठा. इंस्टाग्राम पर वायरल इस वीडियो में शुरुआत में साफ आसमान दिखता है, फिर अचानक बैंगनी-नीला धुआं का विशाल बादल उभरता है, जो धीरे-धीरे फैलता हुआ आसपास के जगहों को ढक लेता है. बादल का रंग लिक्विड फ्यूल के रासायनिक मिश्रण से बैंगनी हो गया, जो हवा में घूमता नजर आता है. वीडियो के अंत में संतरे रंग का चमकदार बादल दिखता है, जो बचे फ्यूल की आग का संकेत देता है. ऐसा लग रहा था मानों ज्वालामुखी फटा हो.
रूस इन मिसाइलों से आखिर कर क्या रहा है?
रूसी मीडिया आउटलेट आस्त्रा ने रिपोर्ट किया कि यास्नी शहर के पास मिसाइल टेस्ट के बाद बैंगनी धुंध का गुबार उठा, जो लॉन्च साइट से जुड़ा है. इस साइट पर सोवियत कालीन R-36M2 Voyevoda ICBM का इस्तेमाल होता था. लेकिन, 2019 से इन्हें अवंगार्ड मिसाइल सिस्टम से बदलना जा रहा है. ये गाइडेड हाइपरसोनिक वारहेड से लैस है. 2022 में 13वीं डिवीजन के एक रेजिमेंट को अवंगार्ड से लैस किया गया. अवंगार्ड वारहेड को दो मिसाइलें ले जा सकती हैं, जिसमें पुरानी UR-100N और नई RS-28 सारमत शामिल हैं. लेकिन RS-28 का इस्तेमाल असंभव माना जा रहा है क्योंकि 2023 में सेवा में आने का दावा करने के बावजूद इसके कई टेस्ट लॉन्च विफल रहे हैं.
अजेय अस्त्र पर सवाल
यूक्रेन युद्ध के बीच यह फेलियर रूस की हाइपरसोनिक तकनीक पर सवाल खड़े कर रहा है. अवंगार्ड को ‘अनडिफेंडेबल’ बताया जाता है. जो मैक 20 से 27 की रफ्तार से उड़ सकता है. लेकिन, यह पहला बड़ा फेलियर नहीं है, इससे पहले 2018 में भी एक टेस्ट असफल रहा था. रूसी सरकार ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन टेलीग्राम चैनलों पर वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह UR-100N का लिक्विड फ्यूल टेस्ट था, जो बैंगनी धुंध से साबित होता है.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें
November 29, 2025, 12:39 IST





