साहित्य » शुभ हो मंगलमय हो प्रकाश मय हो बाहर भीतर ऊपर नीचे नौ दिशाएं जमीन आसमान

शुभ हो मंगलमय हो प्रकाश मय हो बाहर भीतर ऊपर नीचे नौ दिशाएं जमीन आसमान

Facebook
Twitter
WhatsApp

सभी के पास होते हैं

मिट्टी के दिए रुई की बाती

तेल और दियासलाई

जलाने के लिए कुछ भी कहीं भी कभी भी

सभी को जरूरत होती है

रोशनी की

सभी चाहते है फैलाना भी

प्रकाश को

इधर उधर सभी जगह कहीं भी कभी भी

रोशनी कहें प्रकाश कहें उजाला कहें

या ऐसा ही कुछ कहें

जिस से आभास हो सके

कुछ ऐसा दिखाई देने का सामने से

जो घुस सके दिमाग में

और कुलबुला सके

सुसुप्त पड़े जीवन कणों को

एक पुराने हो चुके मकान की

जीर्ण शीर्ण खिड़कियों के

हलकी हवा में भी हिलते

पल्लों के बीच की झिररियां भी

जीवंत हो उठती हैं कुछ देर के लिए ही सही

रोशनी बेचने से लेकर

रोशनी खरीदने के बीच की

दूरियां कहें या खाई कहें

बहुत प्यार से भरती चली जाती हैं स्वत: ही

गरीब की रोशनी और अमीर की रोशनी

सब साई के

“सबका मालिक एक” के मानिंद

आत्मसात कर लेती हैं एक दूसरे को

रोशनी का मजहब कह लिया जाए

या धर्म का प्रकाश कहें

दोनों एक ही बात

सोचिए कितनी इफ़रात रोशनी ही रोशनी

रोशनी ही इबादत रोशनी ही सौगात

बस एक ही

कुछ उलझन से भरा जीव ‘उलूक’

आंखें झपकाता ऊंघता हुआ अपने कोटर में

रात में हो चुके दिन से हैरान

जपता रोशनी की कामना ही है सबसे महान

शुभ हो मंगलमय हो प्रकाश मय हो

बाहर भीतर ऊपर नीचे

नौ दिशाएं जमीन आसमान |

चित्र साभार: https://pngtree.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी