मनोरंजन » सीबीएफसी अनिवार्य किया सबटाइटल-ऑडियो डिस्क्रिप्शन, लोग बोले- ‘फिल्म देखने में मजा नहीं आएगा, ध्यान भटकता है’

सीबीएफसी अनिवार्य किया सबटाइटल-ऑडियो डिस्क्रिप्शन, लोग बोले- ‘फिल्म देखने में मजा नहीं आएगा, ध्यान भटकता है’

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सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने घोषणा की है कि सभी भारतीय फिल्मों को सर्टिफिकेट लिए सबटाइटल और ऑडियो डिस्क्रिप्शन देना अनिवार्य होगा. इस निर्देश के बाद हर सिनेमाघर में रिलीज होने वाली हर भारतीय फिल्म में सबटाइल देखने को मिलेगा. लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि इससे लोगों का ध्यान भटकेगा. फिल्म देखने में मजा नहीं आएगा.

सीबीएफसी अनिवार्य किया सबटाइटल-ऑडियो डिस्क्रिप्शन, हो रही आलोचनाZoom

सीबीएफसी ने फिल्मों प्रमाणन के लिए सबटाइटल अनिवार्य किया. (फाइल फोटो)

मुंबई. सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन यानी सीबीएफसी फिल्मों को ऑडियंस के लिए और बेहतर बनाने के लिए एक नए नियम का ऐलान किया है. यह नियम है कि अब सभी भारतीय फिल्मों में सबटाइटल और ऑडियो डिस्क्रिप्शन देना जरूरी होगा. सीबीएफसी के इस फैसले को कई लोगों ने सही बताया है जबकि कई लोगों का कहना है कि इससे थिएटर में फिल्म देखने का एक्सपीरिएंस खराब हो सकता है. सीबीएफसी द्वारा बनाया गया यह नियम 15 मार्च 2026 से लागू होगा.

इस नियम के तहत, फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्मों को सर्टिफिकेशन के लिए भेजते समय उसमें सबटाइटल और ऑडियो डिस्क्रिप्शन दोनों शामिल करना अनिवार्य होगा. प्रोड्यूसर्स को अपनी फिल्में डिजिटल सिनेमा पैकेज यानी डीसीपी के रूप में ई-सिनेप्रमाण पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी, जिसमें ये एक्सेसिबिलिटी फीचर्स भी शामिल होंगे. इस फैसले का मकसद है कि सुनने या देखने में असमर्थ ऑडियंस के लिए फिल्म को बेहतरन बनाया जाए.

हालांकि इस घोषणा को कई लोगों ने एक्सेसिबिलिटी की दिशा में अहम कदम बताया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस भी छिड़ गई है. कुछ यूजर्स का कहना है कि स्क्रीन पर लगातार सबटाइटल रहने से थिएटर में फिल्म देखते वक्त ध्यान भटकता है. एक यूजर ने एक्स पर लिखा, “क्या? अब हर फिल्म में सबटाइटल होंगे? ये तो ध्यान भटकाता है. इंग्लिश फिल्मों के लिए समझ आता है, लेकिन बॉलीवुड फिल्मों में क्यों?”

एक अन्य यूजर ने भी चिंता जताई, “नीचे शब्द दिखना ध्यान भटकाता है. कई बार तो सबटाइटल तब भी होते हैं जब एक्टर बोल भी नहीं रहे होते.” कई लोगों ने इसी तरह की बात कही. एक पोस्ट में लिखा गया, “मेरा हमेशा सबटाइटल से ध्यान भटकता है. मैं तमिल फिल्म देख रहा हूं, फिर भी जब सबटाइटल आता है तो मेरी नजर वहीं चली जाती है.”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “बड़ी स्क्रीन पर सबटाइटल फिल्म देखने का मजा खराब कर देते हैं और कोई एक साथ पढ़ और देख नहीं सकता, ये डरावना है.” कुछ लोगों ने इस फैसले को ‘देखने का अनुभव खराब करने वाला’ भी बताया. आलोचनाओं के बावजूद, यह नियम सभी भारतीय भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्मों पर लागू होगा. यह कदम पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट, 2016 के अनुरूप है, जिसमें जानकारी, सेवाओं और मनोरंजन तक समान पहुंच को बढ़ावा दिया गया है. सबटाइटल और ऑडियो डिस्क्रिप्शन जैसे एक्सेसिबिलिटी फीचर्स कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म बाजारों में आम हैं और ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी इनका खूब इस्तेमाल होता है.

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Ramesh Kumar

रमेश कुमार, सितंबर 2021 से न्यूज 18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. इससे पहले एबीपी न्यूज, हिंदीरश (पिंकविला), हरिभूमि, यूनीवार्ता (UNI) और नेशनल दुनिया में काम कर चुके हैं. एंटरटेनमेंट, एजुकेशन और पॉलिटिक्स में रूच…और पढ़ें

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