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सुप्रीम कोर्ट की राहत पर वंतारा का आया रिएक्शन, कहा- यह हमारे मिशन के लिए आशीर्वाद

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Vantara On SC SIT Findings: सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जामनगर स्थित वंतारा एनिमल केयर फैसिलिटी पर उठाए गए सभी सवालों और आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यहां कोई भी कानून या दिशा-निर्देश का उल्लंघन नहीं हुआ है. इस फैसले के बाद वंतारा ने इसे अपने मिशन की सच्चाई का प्रमाण और आशीर्वाद बताते हुए स्वागत किया. संस्था ने कहा कि यह फैसला न सिर्फ उनके काम का प्रमाण है बल्कि उन सभी लोगों के लिए राहत है जो इस सेवा से जुड़े हैं. (सभी फोटो Instagram/Vantara)

SIT की रिपोर्ट में कहा गया कि वंतारा की सुविधाएं निर्धारित मानकों से कहीं अधिक हैं और यहां किसी भी तरह की कानूनी गड़बड़ी नहीं पाई गई. जांच दल ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, चिड़ियाघर मान्यता नियम 2009, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के दिशा-निर्देश, कस्टम्स अधिनियम 1962, विदेशी व्यापार अधिनियम 1992, FEMA 1999, मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम 2002 और भारतीय दंड संहिता 2023 जैसे तमाम कानूनों की कसौटी पर परीक्षण किया. सभी स्तरों पर वंतारा को क्लीन चिट दी गई.

वंतारा ने इस मामले पर रिएक्शन देते हुए कहा, “हम पूरे विनम्रता और आभार के साथ SIT और माननीय सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करते हैं. SIT की रिपोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय का आदेश साफ कर देता है कि वंतारा के पशु कल्याण मिशन पर लगाए गए संदेह और आरोप निराधार थे. हमारे काम को मान्यता मिलना हम सभी के लिए राहत के साथ-साथ आशीर्वाद भी है.”

रिएक्शन में आगे कहा गया, “SIT के फाइंडिंग और सर्वोच्च न्यायालय का आदेश हमें और मजबूती व प्रेरणा देता है ताकि हम पूरी निष्ठा और विनम्रता के साथ उन जीवों की सेवा कर सकें, जो स्वयं अपनी बात नहीं कह सकते. वंतारा परिवार इस सकारात्मक पुष्टि के लिए आभार व्यक्त करता है और सभी को आश्वस्त करता है कि हम आजीवन पशु-पक्षियों की रक्षा और देखभाल में समर्पित रहेंगे.”

वंतारा ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य हमेशा से ही करुणा, प्रेम और जिम्मेदारी के साथ ‘नि:शब्दों’ की सेवा करना रहा है. संस्था ने कहा, “हर वह जानवर जिसे हम बचाते हैं, हर वह पक्षी जिसे हम ठीक करते हैं और हर वह जीवन जिसे हम नया अवसर देते हैं, यह याद दिलाता है कि उनका कल्याण हमारे अपने जीवन से जुड़ा हुआ है. जब हम जानवरों की देखभाल करते हैं तो हम मानवता की आत्मा की भी देखभाल करते हैं.”

संस्था ने इस अवसर पर यह भी प्रतिज्ञा की कि वह भारत सरकार, राज्य सरकारों और इससे जुड़े हुए लोगों के साथ सहयोग में काम करने के लिए हमेशा तैयार रहेगी. बयान में कहा गया कि पशु देखभाल का यह कार्य बहुत बड़ा और चुनौतीपूर्ण है और इसे सफल बनाने के लिए सभी का मिलकर योगदान जरूरी है.

वंतारा ने अपने बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की यह पुष्टि उनके लिए केवल एक कानूनी जीत नहीं बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी की भी याद दिलाती है. यह संस्था के हर सदस्य के लिए प्रेरणा का स्रोत है ताकि वे और अधिक समर्पण और संवेदनशीलता के साथ पशु-पक्षियों की देखभाल कर सकें.

अंत में वंतारा ने कहा, “आइए मिलकर धरती को सभी जीवों के लिए एक बेहतर जगह बनाएं. वंतारा हमेशा इस दिशा में अग्रसर रहेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि हर पशु और हर पक्षी को वही सम्मान और सुरक्षा मिले, जिसका वे हकदार हैं. यह निर्णय हमें हमारी प्रतिबद्धता को और गहरा करने की प्रेरणा देता है.”

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