भारत » 21000 लोगों को बचाया, 29 पुल बनाए, 10000 पीड़ितों का इलाज… बाढ़ में देवदूत बनकर आई सेना

21000 लोगों को बचाया, 29 पुल बनाए, 10000 पीड़ितों का इलाज… बाढ़ में देवदूत बनकर आई सेना

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नई दिल्ली. देश के अनेक हिस्से इस वर्ष भयंकर बाढ़ से प्रभावित हैं. ऐसे कठिन समय में भारतीय सेना ने आपदा में फंसे आम देशवासियों की तरह मदद का हाथ बढ़ाया है. भारतीय सेना ने बाढ़ में फंसे 21 हजार से अधिक नागरिकों को सुरक्षित बचाया है. वहीं देश भर के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों में हजारों लोगों को उपचार मुहैया कराया जा रहा है. सैकड़ों घंटे की हेलीकॉप्टर उड़ानों से हजारों बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई है. सेना के मुताबिक अकेले पंजाब में ही अब तक करीब 10 हजार लोगों को बचाया जा चुका है.

गौरतलब है कि पंजाब इस वर्ष भयंकर बाढ़ का सामना कर रहा है और राज्य के अधिकांश जिले बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं. सेना ने अपने इस अभियान से ‘सेवा परमो धर्म’ की मिसाल कायम की है. सेना ने अग्रिम चौकियों पर तैनात लगभग 500 सुरक्षा बल कर्मियों को भी सुरक्षित निकाला है. भारतीय सेना की कुल 126 रेस्क्यू कॉलम्स (बड़ी टीमों) को राहत कार्यों में लगाया गया. सेना की इन विभिन्न टीमों की मदद से अब तक 21,500 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है. ये बचाव अभियान हिमाचल, जम्मू कश्मीर, पंजाब, महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न इलाकों में चलाए गए.

सेना न केवल बाढ़ के दौरान लोगों को बचाने का काम कर रही है बल्कि बाढ़ से प्रभावित हुए व्यक्तियों को उचित उपचार भी प्रदान कर रही है. जिन इलाकों से पानी उतरा है या फिर बाढ़ग्रस्त इलाकों से सुरक्षित निकाले गए लोगों को भी चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है. अकेले सेना ने अब तक लगभग ऐसे करीब 9,700 लोगों को चिकित्सकीय सहायता प्रदान की है. इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को 23,500 किलोग्राम से अधिक राहत सामग्री वितरित की गई है. इस राहत सामग्री में आवश्यक दवाएं, खाने-पीने की वस्तुएं, पीने के लिए साफ पानी, बिस्तर व वस्त्र आदि जरूरी चीजें शामिल हैं.

इस कठिन समय में सेना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आपदा की घड़ी में उसकी प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा और सेवा है. सेना के मुताबिक अप्रैल 2025 में मानसून के आगमन से लेकर अब तक सेना की टुकड़ियां 75 से अधिक स्थानों पर राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटी हुई हैं. बाढ़ के कारण जो इलाके बाकी हिस्सों से कट गए हैं, सेना उन इलाकों में कनेक्टिविटी बहाल करने का काम भी कर रही है. संचार और राहत कार्यों को बनाए रखने के लिए सेना के इंजीनियरों ने देश भर के अलग-अलग बाढ़ग्रस्त हिस्सों में 29 पुलों का निर्माण किया है. इनमें से एक पुल की लंबाई 110 फीट है.

ये वे पुल हैं जो बाढ़, बरसात, भूस्खलन आदि के कारण क्षतिग्रस्त हो गए थे या फिर पूरी तरह से टूट गए थे. इस कारण से कई महत्वपूर्ण स्थानों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई थी. सेना की मदद से इन पुलों का निर्माण कर इन इलाकों की आवाजाही एक बार फिर सुनिश्चित की गई है. सेना के हेलिकॉप्टरों ने 500 से अधिक घंटे उड़ान भरते हुए राहत कार्यों को अंजाम दिया, जो सैनिकों की तत्परता और समर्पण का स्पष्ट उदाहरण है. पंजाब में सेना का बड़ा अभियान अभी भी जारी है.

पंजाब में भारी वर्षा के कारण व्यापक स्तर पर बाढ़ आई. यहाँ सेना के 48 रेस्क्यू कॉलम्स सक्रिय किए गए हैं, जिन्होंने लगभग 10,000 नागरिकों को सुरक्षित निकाला है. बाढ़ के कारण अस्वस्थ हुए 4,700 लोगों को चिकित्सकीय सहायता दी गई. यही नहीं, हेलिकॉप्टर की मदद से 12,500 किलोग्राम से अधिक आवश्यक सामग्री वितरित की गई है. सेना के मुताबिक पंजाब में सेना के हेलिकॉप्टरों ने 250 घंटे से अधिक उड़ान भरकर फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. उन क्षेत्रों तक भी राहत सामग्री पहुंचाई जहां जमीनी मार्ग से जाना संभव नहीं था.

इसके साथ ही, सेना ने लस्सियन, कसोवाल और दर्या मंसूर में अग्रिम चौकियों पर तैनात लगभग 500 सुरक्षा बल कर्मियों (बीएसएफ सहित) को भी सुरक्षित निकाला. मैदानी इलाकों से लेकर देश के आंतरिक हिस्सों तक, भारतीय सेना ने एक बार फिर अपने मूलमंत्र “सेवा परमो धर्म” को साकार किया है. गौरतलब है कि जब-जब आपदा आती है, सेना की हरी वर्दी सबसे पहले मोर्चे पर खड़ी होती है और सबसे अंत में वहां से लौटती है.

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