भारतीय सेना ने भी मौके पर पहुंचकर पूरे इलाके को सील कर दिया है और लोगों के घरों से सामान निकाल कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है.

आर्मी के जवानों ने रास्ता बनाकर पीड़ित परिवारों के घरों से समान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया.
पूरे गांव में 13 मकान ध्वस्त हो चुके हैं और राहत पहुंचाने के लिए कमाडिंग ऑफिसर की अगुआई में स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव में जुटा हुआ है, हर घर को आर्मी के जवानों ने रास्ता बनाकर पीड़ित परिवारों के घरों से समान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है.

पूरे गांव में 13 मकान ध्वस्त हो चुके हैं.
हैरानी को बात तो यह है कि यहां पर सड़क दो हिस्सों में बँट गई है और बीच में 15 फीट गहरी खाई बन गई है. लोगों का कहना है कि 15 सितंबर की रात को एक दम से भारी बरसात शुरू हुई, जिसके बाद जमीन के खिसकने का सिलसिला शुरू हो गया और लोग दहशत के मारे एक दूसरे को फ़ोन करने लगे.ऊषा कुमारी और सुनीता ने बताया कि यहां पर ज़मीन धंस रही है और वो तुरंत गाँव से भागे और सड़क की तरफ़ रूख किया और सुबह होते होते उनके घर जमींदोज़ होना शुरू हो गए. उनका सारा सामान घर के अंदर था लेकिन अब सेना ने मोर्चा संभाला है और वो सारा सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा रहे हैं.

कर्नल अर्पित पारिक ने बताया कि वो यहां पर जमीन धंस रही है.
मुख्यमंत्री ने जान-माल की रक्षा के लिए सेना और कांगड़ा प्रशासन को सराहा
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिला के थुरल कस्बे के बछवाई गांव में हाल ही में हुए भू-स्खलन के बाद भारतीय सेना, कांगड़ा जिला प्रशासन और स्थानीय निवासियों द्वारा किए गए राहत एवं बचाव कार्यों की सराहना की. मुख्यमंत्री ने उनके अथक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि फंसे हुए ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में क्षतिग्रस्त घरों से 13 प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालने में उल्लेखनीय कार्य किया. उन्होंने कहा कि सेना और जिला प्रशासन ने न केवल जान-माल की रक्षा की बल्कि प्रभावित परिवारों में सेना के प्रति विश्वास को और मजबूत बनाया है.





