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व्हाट्सऐप कॉल पर पुलिस वाला बना ठग… बुजुर्ग की लुटी 3.72 करोड़ की जमा-पूंजी

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Digital Arrest Fraud Case: केरल के 79 साल के बुजुर्ग साइबर ठगी का शिकार हो गए. ठगों ने खुद को पुलिस बताकर ‘वर्चुअल अरेस्ट’ का ड्रामा रचा और अकाउंट वेरिफाई करने के नाम पर 3.72 करोड़ रुपये हड़प लिए.

व्हाट्सऐप कॉल पर पुलिस वाला बना ठग… बुजुर्ग की लुटी 3.72 करोड़ की जमा-पूंजीप्रतीकात्मक तस्वीर

केरल के कोल्लम जिले से साइबर फ्रॉड का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां 79 साल के एक बुजुर्ग से ठगों ने ‘वर्चुअल अरेस्ट’ का झांसा देकर 3.72 करोड़ रुपये उड़ा लिए. पुलिस ने इस पूरे मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

दरअसल, बुजुर्ग को 7 जुलाई को एक व्हाट्सऐप कॉल आया. कॉल करने वाले शख्स ने खुद को बीएसएनएल का अधिकारी बताया. उसने दावा किया कि बुजुर्ग का मोबाइल नंबर मुंबई साइबर पुलिस की जांच के घेरे में है, क्योंकि इसका इस्तेमाल गलत कामों में हो रहा है.

वीडियो कॉल पर हो गई ठगी
इसके बाद एक और कॉल आया. इस बार वीडियो कॉल पर एक शख्स पुलिस की वर्दी पहने दिखाई दिया. उसने खुद को मुंबई साइबर पुलिस का अधिकारी बताया. उसने कहा कि बुजुर्ग के आधार कार्ड से नकली बैंक खाता खोला गया है, जिसका इस्तेमाल अपराधियों द्वारा किया जा रहा है. इतना ही नहीं, बुजुर्ग को एक नकली गिरफ्तारी वारंट भी दिखाया गया.

फिर उन्हें बताया गया कि अब वे ‘वर्चुअल अरेस्ट’ में हैं और उन्हें वीडियो कॉल के जरिए वर्चुअल कोर्ट में पेश होना होगा. वहां उन्हें बेल मिल गई, लेकिन शर्त यह रखी गई कि उन्हें लगातार पुलिस की निगरानी में रहना होगा. इसके लिए उनका व्हाट्सऐप कॉल हमेशा चालू रखना जरूरी बताया गया.

अकाउंट फ्रीज करने की धमकी…
ठगों ने डर दिखाकर कहा कि अगर उन्होंने बात नहीं मानी तो उनके बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए जाएंगे और प्रॉपर्टी भी जब्त हो जाएगी. इसके बाद उन्हें भरोसे में लेकर कहा गया कि अगर वे अपने बैंक खातों की “वेरिफिकेशन” करा दें, तो केस से बरी हो सकते हैं. इसी बहाने बुजुर्ग को अपने और अपनी पत्नी के खाते से पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया.

यकीन कर चुके बुजुर्ग ने 23 जुलाई से 29 अगस्त के बीच 17 बार ट्रांजेक्शन कर कुल 3.72 करोड़ रुपये ठगों के खातों में डाल दिए. बाद में जब पैसे वापस नहीं आए, तब उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ बड़ा धोखा हो चुका है. पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. जिन खातों में पैसा भेजा गया था, उनका पता लगा लिया गया है और उन्हें फ्रीज करने की कोशिश की जा रही है.

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