भारत » पानी में डूबा भविष्य है और चुनाव भी पास है, जतहर पर नजरें तो इनायत करिए नेताजी! बच्चे रोज करते हैं मौत से मुकाबला

पानी में डूबा भविष्य है और चुनाव भी पास है, जतहर पर नजरें तो इनायत करिए नेताजी! बच्चे रोज करते हैं मौत से मुकाबला

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Jamui News : बरसात आते ही जतहर-केरवातरी गांव की किउल नदी एक तेज बहती नदी में तब्दील हो जाती है और यही लोगों की जिंदगी में सबसे बड़ी बाधा भी बन जाती है. इलाज से लेकर बच्चों के स्कूल जाने तक, हर कदम पर नदी पार करना ऐसा लगता है जैसे किसी खतरे से खेलना हो. छोटे-छोटे बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं तो बड़े बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं इलाज के लिए भी नहीं पहुंच पातीं. ऐसे में गांव वाले सालों से पुल की आस में जूझ रहे हैं, ताकि उनकी ये दिक्कतें खत्म हो सकें.

पानी में डूबा भविष्य है और चुनाव भी पास है,जतहर पर नजरें तो इनायत करिए नेताजी!जतहर गांव के बच्चे जोखिम उठाकर नदी पार कर स्कूल जाते हैं, पुल निर्माण की मांग तेज
जमुई. बरसात के महीनों में जमुई के जतहर-केरवातरी गांव के लोग भयंकर मुश्किलों का सामना करते हैं. किउल नदी का तेज बहाव उनकी जिंदगी को खतरे में डाल देता है. इलाज से लेकर बच्चों के स्कूल जाने तक, नदी पार करना यहां के लिए एक बड़ी चुनौती है. गांव के लोग वर्षों से पुल का इंतजार कर रहे हैं ताकि उनकी मुश्किलें कम हों और वे सुरक्षित जीवन जी सकें. खास बात यह है कि यह गांव जिला मुख्यालय से महज लगभग 40 किलोमीटर दूर है. खैरा प्रखंड के सुदूर पहाड़ी के ठीक किनारे पर बसा जतहर-केरवातरी गांव के लोगों की जिंदगी साल के 6 महीने मुश्किलों के बीच कटती है.  किउल नदी में पानी बढ़ जाता है तो बीमार को इलाज में और किसी के मौत हो जाने पर अंतिम संस्कार के लिए कफन लाने में परेशानी होती है. कई बार तो बगैर कफन के ही अंतिम संस्कार करना पड़ता है और गर्भवती महिला भी समय पर अस्पताल नहीं जा पाती.

बरसात में नदी पार करना बना जोखिम

बरसात के दिनों में जतहर गांव के घरों तक चारपहिया क्या बाइक भी नहीं जा सकता है. गांव के छोटे-छोटे बच्चो को स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डाल कर नदी पार करना पड़ता है. नदी में पानी बढ़ जाने के बाद स्कूल जाने वाले बच्चे किसी तरह गांव से बाहर निकलते, बच्चे हादसे के शिकार न हो जाए, उनकी निगरानी परिवार वाले करते हैं. छोटे-छोटे बच्चों को बड़े कंधे पर बैठा कर नदी पार करवाते हैं.

बरसात में जतहर-केरवातरी गांव की जिंदगी बने हादसों से लड़ाई, पुल के इंतजार में ग्रामीण

बच्चे जोखिम उठाकर स्कूल जाते हैं

इस गांव के लगभग 50 की संख्या में लड़के लड़कियां हर दिन अपना भविष्य बनाने के लिए सोखो मिशन स्कूल में पढ़ने जाते हैं. बच्चों की पढ़ाई लिखाई बाधित न हो उनका भविष्य बने इसलिए गांव के बड़े अपनी निगरानी में नदी पार करवा बच्चों को स्कूल भेजते हैं. जब स्कूल खत्म होता है और बच्चों को जब गांव आना होता है तो उस समय भी गांव वाले नदी के दोनों किनारे पर मौजूद रहते हैं. इस दौरान किसी प्रकार का हादसा न हो इसका भी ख्याल रखा जाता है.

छह महीने नदी के तेज बहाव के बीच जतहर गांव के बच्चे जान जोखिम में डालकर जाते हैं स्कूल.

गांव वालों का संघर्ष से भरा जीवन

पांचवीं और छठी में पढ़ने वाली सृष्टि कुजूर और मनीषा खैरवार ने बताया कि स्कूल जाने या आते समय उन्हें हर दिन नदी पार करना पड़ता है, डर लगता है कि वह नदी के तेज बहाव में बह न जाए. पढ़ाई जरूरी है इसलिए हम सरकार से मांग करते हैं कि हमारे गांव के पास नदी में पुल बनवा दें. गांव की पुष्पा खैरवार ने बताया कि जब नदी में पानी आता है तो गर्भवती महिला अस्पताल नहीं जा पाती है. तेज बहाव में तो और मुश्किल हो जाता है. जब नदी में पानी बढ़ जाता है तो गांव से निकलना मुश्किल हो जाता है.

दुरुह जिंदगी जीने का दर्द

इसी गांव के नंदकिशोर रविदास ने बताया कि गांव में बिजली भी वो लोग खुद के प्रयास से ले गए, नदी पर पुल जरुरी है कोई दूसरा रास्ता नहीं है और नदी के पानी में होकर ही आना जाना पड़ता है. पुल के लिए वे लोग कई बार आवेदन दिया है स्थानीय विधायक से भी मिले हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. गांव की आबादी 500 से अधिक है, जहां आदिवासी और दलित समाज के लोग रहते हैं. नदी पार करने के लिए यहां के लोग घर से एक्स्ट्रा कपड़े लेकर निकलते हैं. एक कपड़ा भींग जाता है तो दूसरा कपड़ा बदल कर आगे जाते हैं और भीगे कपड़े को नदी के किनारे ही सूखने के लिए छोड़ देते हैं.

नदी में पानी बढ़ जाने से बीमार का इलाज और कफन लाना हो जाता है मुश्किल

प्रशासन की ओर से आश्वासन

स्थानीय सिकंदरा विधायक प्रफुल्ल मांझी ने बताया कि जतहर के पास पुल के लिए उन्होंने विभाग से मांग किया है, जिसका सर्वे हो चुका है मिट्टी जांच कर और डीपीआर बना कर पुल का निर्माण करवाया जाएगा. अगर यह पुल बन जाता है तो गांव वालों के लिए बड़ी राहत की खबर होगी जो उनकी जिंदगी को सुरक्षित और आसान बनाएगा.

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Vijay jha

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें

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