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Archaeologists Unearth 1400 Year Old Cube Shaped Human Skull From Mexico | क्यूब के आकार की खोपड़ी देख चकराया वैज्ञानिकों का सिर, 1400 साल पहले क्यों करते थे लोग ऐसा काम

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Science News: मैक्सिको में पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान एक बेहद अजीबोगरीब चीज मिली है. यहां 1,400 साल पुरानी एक मानव खोपड़ी मिली है जिसका आकार गोल नहीं बल्कि चौकोर (क्यूब जैसा) है. यह खोज ‘बालकोन डी मोंटेजुमा’ नामक जगह पर हुई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह इस बात का पहला सबूत है कि इस इलाके के लोग सदियों पहले सिर का आकार बदलने की प्रथा का पालन करते थे. इसे विज्ञान की भाषा में ‘क्रेनियल मॉडिफिकेशन’ कहा जाता है. यह खोपड़ी एक अधेड़ उम्र के पुरुष की बताई जा रही है. इस खोज ने प्राचीन मेसोअमेरिकन सभ्यता के रीति-रिवाजों पर नई रोशनी डाली है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, सिर को ऐसा आकार देने के लिए बचपन में ही उसे विशेष तरीके से दबाया जाता था.

खोपड़ी का क्यूब जैसा आकार क्यों कर रहा वैज्ञानिकों को हैरान?

आमतौर पर प्राचीन सभ्यताओं में सिर को लंबा या शंकु के आकार का बनाने का चलन था. ऐसी खोपड़ियां देखने में एलियंस जैसी लगती हैं. उन्हें कपड़े या पट्टियों से बांधकर लंबा किया जाता था. लेकिन बालकोन डी मोंटेजुमा में मिला यह अवशेष बिल्कुल अलग है. बायोलॉजिकल एंथ्रोपोलॉजिस्ट जीसस अर्नेस्टो वेलास्को गोंजालेज ने बताया कि इस व्यक्ति के सिर का ऊपरी हिस्सा चपटा कर दिया गया था. इससे उसकी खोपड़ी को एक चौकोर या क्यूब जैसा लुक मिल गया.

  • विशेषज्ञ इसे ‘पैरेललपाइप्ड’ (Parallelepiped) आकार कह रहे हैं. ऐसा लगता है कि सिर के पीछे और आगे नरम पैडिंग लगाकर दबाव डाला गया होगा. इस तरह का ‘इरेक्ट’ मॉडिफिकेशन इस इलाके में पहले कभी नहीं देखा गया था.
  • चूंकि इस तरह की चपटी खोपड़ी वाले लोग अक्सर वेराक्रूज या माया क्षेत्र में पाए जाते थे. इसलिए वैज्ञानिकों को लगा कि यह व्यक्ति शायद बाहर से आया होगा. सच्चाई जानने के लिए शोधकर्ताओं ने एक खास टेस्ट किया. उन्होंने हड्डियों और दांतों की केमिस्ट्री की जांच की. जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ.
  • यह व्यक्ति किसी दूसरी जगह से नहीं आया था. उसका जन्म इसी इलाके में हुआ था. उसने अपनी पूरी जिंदगी यहीं बिताई और यहीं उसकी मौत भी हुई. इसका मतलब है कि सिर को आकार देने की यह प्रथा स्थानीय स्तर पर भी अपनाई गई थी. भले ही यह उस समय बहुत दुर्लभ रही हो.
  • रिसर्चर्स अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि इस व्यक्ति के सिर को ऐसा अजीब आकार क्यों दिया गया था. मेसोअमेरिका के कई हिस्सों में सिर का अलग-अलग आकार अलग-अलग सांस्कृतिक समूहों की पहचान होता था. यह किसी विशेष कबीले या रूतबे को दिखाने का तरीका हो सकता था.

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि भले ही यह व्यक्ति स्थानीय था. लेकिन हो सकता है कि जिन लोगों ने उसका सिर दबाया था, वे किसी अलग सांस्कृतिक समूह से प्रभावित थे. यह काम बचपन में ही किया जाता था जब हड्डियां नरम होती थीं. ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एंथ्रोपोलॉजी एंड हिस्ट्री’ (INAH) का कहना है कि पुरानी चीजों की जांच अभी जारी है. इससे हमें उस दौर के लोगों के बारे में और जानकारी मिलेगी.

इस आदमी की खोपड़ी (जिसे यहां एक फोटो और 3D स्कैन और पॉइंट क्लाउड के रूप में पीछे से दिखाया गया है) ऊपर से चपटी थी, जिससे यह क्यूब जैसी दिखती थी. (फोटो: INAH; Technical Archive of the Physical Anthropology Section of CINAH Tamaulipas)

Explainer: क्या होता है क्रेनियल मॉडिफिकेशन?

बचपन में शुरुआत: यह प्रक्रिया तब शुरू की जाती थी जब बच्चा बहुत छोटा होता था. उस समय सिर की हड्डियां बहुत नरम होती हैं और उन्हें आसानी से मोड़ा जा सकता है.

कैसे करते थे: सिर के चारों ओर लकड़ी के तख्ते, कपड़े या रस्सियां कसकर बांधी जाती थीं. इसे महीनों या सालों तक ऐसे ही रखा जाता था.

मकसद क्या था: यह अक्सर सुंदरता का पैमाना माना जाता था. कई बार यह समाज में ऊंचे दर्जे या किसी खास कबीले की पहचान के लिए भी किया जाता था.

दिमाग पर असर: वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे सिर का आकार तो बदल जाता था, लेकिन इससे व्यक्ति की दिमागी क्षमता या बुद्धिमत्ता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता था.

बालकोन डी मोंटेजुमा मैक्सिको के तमाउलिपास राज्य में स्थित एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल है. सिएरा माद्रे की पहाड़ियों में बसा यह स्थान अपनी प्राचीन गोलाकार पत्थर की संरचनाओं के लिए जाना जाता है. यहां 400 से 1200 ईस्वी के बीच सभ्यता फली-फूली थी. हाल ही में यहां मिली 1400 साल पुरानी ‘चौकोर खोपड़ी’ ने इसे दुनिया भर में चर्चा का विषय बना दिया है. (Photo : INAH)

बालकोन डी मोंटेजुमा का अपना खास इतिहास

जिस जगह यह खोपड़ी मिली है उसका अपना एक इतिहास है. बालकोन डी मोंटेजुमा मैक्सिको के तमाउलिपास राज्य में स्थित है. यहां 650 ईसा पूर्व से 1200 ईस्वी के बीच कई अलग-अलग समूह रहते थे. लगभग 400 ईस्वी के आसपास यहां एक गांव बसा था. इसमें करीब 90 गोलाकार घर थे. यहां खुदाई में अक्सर कलाकृतियां और हड्डियां मिलती रहती हैं. लेकिन क्यूब के आकार की खोपड़ी मिलना अपने आप में पहली घटना है. यह खोज बताती है कि प्राचीन काल में इंसान अपनी शारीरिक बनावट को बदलने के लिए किस हद तक जा सकता था.

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