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बिहार चुनाव का रंग हर बार बदलता रहा है. एक दौर था जब नेता बैलगाड़ी और टमटम से प्रचार करते थे और लोग साथ में भूजा सत्तू लेकर चलते थे. चुनावी खर्च हजारों में आता था. लेकिन अब प्रचार हेलीकॉप्टर और सोशल मीडिया से होता है और खर्च करोड़ों में पहुंच गया है.
बिहार का वह सीएम जो बैलगाड़ी से करता था चुनाव प्रचार.बिहार में एक दौर था जब चुनाव प्रचार टमटम और बैलगाड़ी से होता था. नेता जनता से टमटम, साइकिल और बैलगाड़ी से पहुंचकर सीधा संवाद करते थे. लेकिन अब माहौल पूरी तरह से बदल गया है. आज प्रचार हेलीकॉप्टर और आधुनिक तकनीक से होता है और इसके साथ ही चुनावी खर्च भी जमीन से आसमान तक पहुंच गया है. अगर हम 50 और 60 के दशक की बात करें तो चुनाव लड़ने का तरीका बेहद सीधा और सरल था.
जब होता था बैलगाड़ी और टमटम से प्रचार
भूजा और सत्तू का सहारा
उस दौर में चुनावी रैलियां और सभाएं भी होती थीं, लेकिन उनका स्वरूप आज जैसा भव्य नहीं था. लोग अक्सर पैदल ही सभा स्थल तक जाते थे और अपने साथ भूजा या सत्तू लेकर चलते थे, ताकि रास्ते में भूख लगने पर खा सकें. नेता भी अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे. खर्च था न के बराबर. उस समय एक चुनाव लड़ने का खर्च बहुत कम होता था. चुनाव आयोग की भी कोई सख्त गाइडलाइंस नहीं थीं. एक प्रत्याशी का कुल खर्च कुछ हजार रुपए में ही सिमट जाता था. उस समय पांच से दस हजार रुपए भी एक बड़ी राशि मानी जाती थी.
अब हेलीकॉप्टर से प्रचार, खर्च करोड़ों में
अब सोशल मीडिया चुनाव प्रचार का एक अहम हिस्सा बन गया है. उम्मीदवार अपनी छवि को बेहतर बनाने और विपक्षी दलों पर हमला करने के लिए डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों की मदद लेते हैं. एक प्रत्याशी का चुनाव खर्च लाखों से लेकर करोड़ों रुपए तक पहुंच जाता है. लेकिन बिहार के पहले सीएम श्रीकृष्ण सिंह, जिनको श्री बाबू के नाम से भी लोग जानते हैं, ने अपना पहला चुनाव बैलगाड़ी, टमटम और साइकिल से लड़ा. उस समय के लोग कहते हैं, ‘श्री बाबू नामांकन दाखिल करने के बाद क्षेत्र नहीं आते थे. नामांकन करने के बाद वह जनता के बीच वोट मांगने नहीं जाते थे. उनका मानना था कि अगर कोई जनप्रतिनिधि पांच साल तक जनता के लिए ईमानदारी से काम करेगा तो उसे चुनाव में वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी. शायद इसी सोच का असर था कि वह कभी कोई चुनाव नहीं हारे.’

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें
भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा… और पढ़ें
September 11, 2025, 19:32 IST





